लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में किसान गेहूं की खेती बड़े पैमाने पर करते हैं। गेहूं की खेती करने से किसानों को अच्छा खासा मुनाफा होता है। कम लागत में अधिक मुनाफा गेहूं की खेती से कमाया जा सकता है। वहीं गेहूं की फसल में बाली निकलते समय पौधे का भार ऊपर की ओर बढ़ जाता है। इस अवस्था में तेज हवा के दौरान सिंचाई की जाती है, तो फसल जमीन पर गिर सकती है, जिससे फसल उत्पादन में कमी आती है।
नवंबर में बोई गई फसल अब 90 दिन पड़ाव पार कर चुकी है और गेहूं की फसल में बालियां निकलने लगी हैं। यह वह समय होता है, जब किसान थोड़ी-सी लापरवाही कर देते हैं, जिससे किसानों का काफी नुकसान हो जाता है। अगर किसान इस समय सही से देख-रेख कर लें, तो दाने न केवल वजनदार और चमकदार बनते हैं, बल्कि उत्पादन भी बेहतर मिलता है।
गेहूं की फसल में पोटाश का छिड़काव बेहद जरूरी है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप बिसेन ने बताया कि जब गेहूं की फसल गभोट अवस्था में हो या बालियां निकल रही हों, तब किसानों को तरल उर्वरकों का छिड़काव करना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि N.P.K. 00:50 या 00:52:34 जैसे लिक्विड फर्टिलाइजर्स का उपयोग इस समय फायदेमंद साबित होता है।
गेहूं की सिंचाई करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। फरवरी के महीने में गेहूं की फसल में बालियां निकलने लगती हैं। ऐसे में खेतों में नमी होना बेहद जरूरी होता है। खेतों में नमी कम होने के कारण उत्पादन घट सकता है। वहीं कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि अगर आप इस समय गेहूं की फसल में पानी लगा रहे हैं, तो विशेष सावधानी भी रखनी होगी।
सिंचाई करते समय खेतों में जल भराव ना होने दें। कोहरा अत्यधिक ठंड होने पर हल्की सिंचाई करें, ताकि गेहूं की फसल को पाला न लगे। जिन किसानों ने अभी तक खेतों में उर्वरक नहीं डाले हैं, सिंचाई के बाद अवश्य डाल दें।
इस समय गेहूं की फसल में पीला रतुआ का प्रकोप दिख रहा है। इसके लिए प्रोपिकोनाजोल (Propiconazole 25% EC) का छिड़काव करना जरूरी है। 200 मिली प्रति एकड़ को 100-150 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। अगर प्रकोप अधिक है, तो आप इसे 10 दिन के अंतराल पर फिर छिड़काव कर सकते हैं।
इस प्रकार, गेहूं की फसल की देखभाल करने के लिए कुछ जरूरी बातें हैं। अगर किसान इन बातों का ध्यान रखेंगे, तो उनकी फसल अच्छी तरह से बढ़ेगी और उन्हें अच्छा उत्पादन मिलेगा।

