नोएडा: नोएडा में कई फेमस पर्सनालिटी हैं, लेकिन एक नाम ऐसा है, जो समाजसेवा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुका है. अनूप खन्ना, जिन्हें देशभर में लोग प्यार से दादी की रसोई वाले अंकल के नाम से जानते हैं, ने 68 वर्ष की उम्र में समाजसेवा की मिसाल कायम की है. उनका कहना है कि जिंदगी का असली हिसाब इस बात से होता है कि हमने समाज को क्या लौटाया. यही सोच उन्हें भीड़ से अलग खड़ा करती है और यही कारण है कि नोएडा ही नहीं, देशभर में उनके जज्बे को सलाम किया जाता है.
अनूप खन्ना ने साल 1984 में नोएडा आने के बाद से ही सामाजिक कार्यों में खुद को झोंक दिया. लेकिन 21 अगस्त 2015 को शुरू हुई दादी की रसोई ने उन्हें जन-जन तक पहुंचा दिया. यहां जरूरतमंदों को मात्र पांच रुपये में पौष्टिक और अच्छी क्वालिटी का भोजन मिलता है. खन्ना का मानना है कि मुफ्त में दी गई चीजें अक्सर आत्मसम्मान को चोट पहुंचाती हैं, इसलिए उन्होंने प्रतीकात्मक कीमत रखी. इसी के साथ उनकी संस्था जरूरतमंदों को मात्र दस रुपये में कपड़े भी उपलब्ध कराती है और सस्ती दवाइयों के लिए प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र भी चलाती है. उनका सीधा सा कॉन्सेप्ट है रोटी, कपड़ा और सस्ती दवाई.
अनूप खन्ना की लोकप्रियता केवल समाजसेवा तक सीमित नहीं रही. वे टीवी के चर्चित शो कौन बनेगा करोड़पति में भी पहुंचे और अच्छी रकम जीतकर चर्चा में आए. इसके अलावा उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी हो चुकी है और पीएम ने उनके कार्यों की सराहना करी थी और उन्हें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान मिल चुके हैं. हालांकि वे खुद कहते हैं, मैं नहीं, मेरा काम फेमस हुआ है. मेरे जैसे हजारों लोग सेवा करते हैं, फर्क सिर्फ इतना है कि वे कुछ दिन बाद रुक जाते हैं और मैंने इसे जारी रखा.
अनूप खन्ना की कहानी में पारिवारिक समर्थन भी एक मजबूत स्तंभ रहा है. एक निजी कंपनी में ऑल इंडिया सेल्स मैनेजर की जिम्मेदारी निभाने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ी और समाजसेवा को ही अपना मिशन बना लिया. वे बताते हैं कि उनके पिता स्वतंत्रता सेनानी थे और उन्होंने ही उन्हें प्रेरित किया कि परिवार बिजनेस संभाल लेगा, तुम सेवा करते रहो. शायद यही संस्कार हैं जो उन्हें यह कहने का साहस देते हैं कि हमारी संस्कृति सिखाती है कि कोई भी भूखा न सोए.
अनूप खन्ना का कहना है कि दादी की रसोई का उद्देश्य सिर्फ पेट भरना नहीं, बल्कि सम्मान के साथ अच्छा खाना उपलब्ध कराना है. खन्ना कहते हैं कि समाजसेवा में भी वही भाव होना चाहिए जो परिवार के किसी समारोह में होता है सब अपने हैं, बस सोच अलग-अलग है. चुनौतियां भी आईं, लेकिन उन्होंने उन्हें रिश्तेदारों के मतभेद की तरह संभाला और आगे बढ़ते रहे. उनकी रसोई आज हजारों लोगों के लिए उम्मीद की थाली बन चुकी है. भविष्य की योजनाओं में भी उनका नजरिया अलग है. वे चाहते हैं कि संस्था परिसर में एक गाय और बछड़ा रखा जाए ताकि लोग उनकी सेवा कर सकें. उनका मानना है कि पशुओं के प्रति स्नेह भी मनुष्य के स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए जरूरी है.

