उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की आहट सुनाई देने लगी है. सूबे की सत्ता पर काबिज होने के लिए राजनीतिक दलों ने अपनी सियासी बिसात बिछानी शुरू कर दी है. दिलचस्प बात यह है कि इस बार सियासी रणभेरी का केंद्र बना है गौतमबुद्ध नगर (नोएडा). जिसे कभी यूपी का ‘अशुभ’ जिला कहा जाता था, आज वही जिला भाजपा, सपा और बसपा के लिए ‘सत्ता की चाबी’ बन गया है. अगले एक महीने के भीतर यहां रैलियों का सैलाब उमड़ने वाला है, जो 2027 के चुनावी ऊंट की करवट तय करेगा.
भाजपा का मास्टरस्ट्रोक: सेमीकंडक्टर यूनिट और जेवर एयरपोर्ट
सत्तमरूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) विकास के एजेंडे के साथ मैदान में उतर रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी की यमुना सिटी के औद्योगिक सेक्टर-28 में 21 फरवरी को एक ऐतिहासिक जनसभा होने जा रही है. यहां उत्तर भारत की पहली सेमीकंडक्टर यूनिट का शिलान्यास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री अश्वनी वैष्णव करेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम को वर्चुअल संबोधित करेंगे.
भाजपा के पश्चिम क्षेत्र के अध्यक्ष सतेंद्र सिसौदिया के अनुसार, यह सिर्फ एक शिलान्यास नहीं, बल्कि मिशन-2027 का आगाज है. इसके तुरंत बाद जेवर में एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट के शुभारंभ की तैयारी है, जहाँ पीएम मोदी खुद एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे. भाजपा का मानना है कि जेवर एयरपोर्ट का विकास उसे पश्चिमी यूपी में अजेय बना देगा.
अखिलेश यादव का दांव, नोएडा का ‘अंधविश्वास’ बनाम ‘PDA’ फॉर्मूला
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इस बार अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी है. मुख्यमंत्री रहते हुए नोएडा न आने का ‘मिथक’ पालने वाले अखिलेश अब इसी जिले से चुनावी अभियान शुरू कर रहे हैं. 29 मार्च को दादरी के मिहिर भोज डिग्री कॉलेज में ‘समाजवादी समानता भाईचारा रैली’ और ‘PDA भागीदारी यात्रा’ का आगाज होगा.
सपा प्रवक्ता राजकुमार भाटी के मुताबिक, 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली सफलता के बाद पार्टी अब PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को घर-घर तक पहुँचाना चाहती है. पश्चिमी यूपी में गुर्जर, मुस्लिम और दलित गठजोड़ को मजबूत करने के लिए सपा ने दादरी में बड़े सम्मेलन की योजना बनाई है. अखिलेश का मानना है कि 2012 में भी उन्होंने नोएडा से साइकिल यात्रा शुरू कर पूर्ण बहुमत पाया था, और 2027 में भी वही इतिहास दोहराया जाएगा.
बसपा का ‘मिशन 15 मार्च’: दलित वोटों की घेराबंदी
बहुजन समाज पार्टी (BSP) भी पीछे नहीं है. बसपा सुप्रीमो मायावती का यह गृह जनपद है और इसे प्रदेश की ‘शो विंडो’ कहा जाता है. 15 मार्च को मान्यवर कांशीराम की जयंती पर नोएडा के ‘राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल’ पर एक विशाल शक्ति प्रदर्शन होने जा रहा है. इसमें मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, अलीगढ़ और आगरा मंडल के लाखों कार्यकर्ताओं के जुटने का दावा किया जा रहा है. बसपा इस कार्यक्रम के जरिए अपने कोर वोट बैंक को एकजुट कर यह संदेश देना चाहती है कि यूपी की रेस में वह अभी भी सबसे मजबूत दावेदार है.
नोएडा ही क्यों बना ‘पावर सेंटर’?
गौतमबुद्ध नगर को उत्तर प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहा जाता है. यहां एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट, फिल्म सिटी और भारी विदेशी निवेश आ रहा है. राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जो दल नोएडा में अपना दबदबा साबित कर देता है, उसका प्रभाव पूरी दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की करीब 100 सीटों पर पड़ता है. 2022 में बीजेपी ने यहां क्लीन स्वीप किया था, लेकिन इस बार सपा और बसपा इस किले में सेंध लगाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं.
निष्कर्ष: नोएडा में होने वाली रैलियों और कार्यक्रमों का 2027 के विधानसभा चुनाव पर गहरा प्रभाव पड़ेगा. जो दल यहां अपना दबदबा साबित करेगा, वह उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज होने के लिए एक मजबूत आधार प्राप्त कर लेगा.

