Uttar Pradesh

ट्यूबवेल का बिजली बिल शून्य होगा, पीएम-कुसुम योजना कैसे मदद करती है? जानिए पूरा प्रक्रिया

पीएम-कुसुम योजना किसानों के लिए राहत की नींव

मेरठ। जो भी किसान ट्यूबवेल के बिजली बिल को लेकर परेशान हैं, उनके लिए पीएम-कुसुम योजना एक राहत साबित हो सकती है. इस योजना के तहत किसान अपने खेतों में सौर ऊर्जा कनेक्शन लगवा सकते हैं और बिजली के आने-जाने की समस्या खत्म हो सकती है और उनका बिजली बिल शून्य हो सकता है.

वित्तीय वर्ष के अनुसार ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने वाली है, इसलिए किसान अभी से अपने आवश्यक दस्तावेज तैयार रख लें. मेरठ जिले के ग्रामीण क्षेत्र के किसान जो अपने खेतों में सौर ऊर्जा से चलने वाले ट्यूबवेल लगवाना चाहते हैं, उनके लिए पीएम-कुसुम योजना लाभकारी साबित हो सकती है.

लोकल-18 की टीम ने मेरठ जिला कृषि अधिकारी राजीव कुमार से खास बातचीत की. उन्होंने बताया कि किसानों के लिए पीएम-कुसुम योजना बहुत लाभकारी हो सकती है. इसके तहत किसान अपने खेतों में 2 एचपी या 3 एचपी के ट्यूबवेल लगा सकते हैं, और इसके लिए शासन की ओर से 60% तक का अनुदान उपलब्ध कराया जाता है.

राजीव कुमार ने बताया कि मेरठ जिले के कई किसान इस योजना का बेहतर तरीके से लाभ उठा रहे हैं. इससे उनका बिजली बिल शून्य हो गया है और वे निर्धारित समय पर खेतों की सिंचाई के लिए ट्यूबवेल आसानी से चला पा रहे हैं. उन्होंने यह भी बताया कि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया समय-समय पर ऑनलाइन पोर्टल पर खोल दी जाती है और इस वित्तीय वर्ष के लिए भी जल्द ही रजिस्ट्रेशन शुरू हो जाएगा.

उन्होंने बताया कि जो किसान ऑनलाइन माध्यम से सौर ऊर्जा कनेक्शन के लिए आवेदन करते हैं, उनका पहले वेरिफिकेशन किया जाता है. इसके बाद यदि निर्धारित टारगेट से अधिक किसानों ने आवेदन किया है, तो उन सभी के लिए लॉटरी सिस्टम लागू किया जाता है. लॉटरी के अंतर्गत ही किसानों को सौर ऊर्जा से संबंधित कनेक्शन उपलब्ध कराया जाता है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सौर ऊर्जा कनेक्शन लगवाने वाले किसानों को बोरिंग की व्यवस्था स्वयं करनी पड़ती है और सरकार केवल सौर ऊर्जा कनेक्शन पर ही सब्सिडी देती है.

किसानों के लिए फायदेमंद यह भी बताया जा रहा है कि जिन किसानों ने सौर ऊर्जा कनेक्शन लगवाए हैं, उनके द्वारा एकत्रित बिजली ऊर्जा को कई बार बिजली विभाग भी खरीद लेता है. ऐसे में यह योजना किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है. इसलिए किसान जैसे ही पोर्टल पर आवेदन प्रक्रिया शुरू हो, उसके लिए तैयारी कर लें और जो ट्यूबवेल के लिए बोरिंग करनी है, उसकी व्यवस्था स्वयं से सुनिश्चित करें.

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