काशी के प्रसिद्ध शिव मंदिर
काशी को महादेव का प्रिय नगर कहा जाता है. यहां विराजमान हैं बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर, जिनके दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं. मान्यता है कि काशी में स्वयं शिव का वास है, इसलिए इसे मोक्ष की नगरी भी कहा जाता है. हालांकि काशी केवल विश्वनाथ मंदिर तक सीमित नहीं है. यहां कई ऐसे प्राचीन और चमत्कारिक शिव मंदिर हैं, जिनका इतिहास सैकड़ों वर्षों पुराना है और जिनसे जुड़ी आस्थाएं आज भी भक्तों को आकर्षित करती हैं।
काशी के केदारखंड में गौरी केदारेश्वर का मंदिर है. यह लिंग भी स्वयम्भू ज्योतिर्लिंग है. ऐसी धार्मिक कथा है, यहां खिचड़ी से शिवलिंग की उत्पत्ति हुई थी. काशी में इस शिवलिंग के दर्शन से भैरवी यातना से भी मुक्ति मिल जाती है. यह शिवलिंग 16 कलाओं से युक्त है. यहां दर्शन से हर मनोकामना पूरी होती है. काशी के औसानगंज में जागेश्वर महादेव का मंदिर है. इस मंदिर में विराजे शिवलिंग हर साल एक जौ के आकार का बढ़ता है. यह शिवलिंग भी आकार में बाकी शिवलिंग से काफी बड़ा है. वाराणसी के कंदवा में कर्मदेश्वर महादेव का अति प्राचीन मंदिर है. इस मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में हुआ था. तब से यह मंदिर आज तक जस का तस है. इसकी देख रेख की जिम्मेदारी संस्कृति विभाग की है. यह मंदिर वर्तमान के काशी विश्वनाथ मंदिर से भी पुराना भगवान शिव का मंदिर है. इस शिव मंदिर को गढ़वाल के राजाओं ने बनवाया था. इसकी प्राचीनता और खूबसूरती लोगों को अपनी और आकर्षित करती है. काशी में तिल के आकार में बढ़ने वाला शिव मंदिर भी है. इसे तिलभांडेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है. इस शिवलिंग पर जलाभिषेक से नौ ग्रहों के दोष भी दूर हो जाते है. यह शिवलिंग भी जमीन से करीब 30 फीट ऊंचा है. इस मंदिर के चमत्कार की महिमा का वर्णन काशी खंडोक्ट में भी है. इसके अलावा काशी का मणि मंदिर भी बेहद फेमस मंदिर है. इस मंदिर में द्वादश ज्योतिर्लिंग एक साथ विराजमान है. इसके अलावा भी यहां 108 शिवलिंग नर्मदेश्वर स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते है. यह मंदिर धर्मसंघ शिक्षा मंडल में स्थित है.

