उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव 2026: सरकार ने बड़ा फैसला किया, समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग बनाने का निर्णय
उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर सरकार ने हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच को सूचित किया है कि चुनाव से पहले एक समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग बनाया जाएगा. सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही सीटों का आरक्षण तय होगा. यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में उठाया गया है, जिसमें स्थानीय निकाय चुनावों से पहले समर्पित आयोग का होना अनिवार्य बताया गया है.
हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें मौजूदा पिछड़ा वर्ग आयोग के अधिकारों को चुनौती दी गई थी. जस्टिस राजन राय और जस्टिस अवधेश चौधरी की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी. सरकार का यह कदम इस याचिका के संदर्भ में उठाया गया है, जिसमें याचिकाकर्ता ने ओबीसी कमीशन के कार्यकाल को बढ़ाने के सरकार के फैसले को चुनौती दिया था. बता दें कि यूपी में ओबीसी कमीशन का कार्यकाल अक्टूबर 2025 में समाप्त हो गया था, लेकिन सरकार ने इसे बढ़ाकर अक्टूबर 2026 तक कर दिया था।
इसी के खिलाफ याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी थी. याचिकाकर्ता के वकील मोती लाल यादव का कहना है कि यदि आयोग का तीन साल का मूल कार्यकाल खत्म नहीं हुआ होता, तो वही आरक्षण का सर्वे कर सकता था. अब नया समर्पित आयोग पिछड़ों का ‘रैपिड सर्वे’ करेगा. इस सर्वे के जरिए ही पिछड़ों की वास्तविक आबादी का पता लगाया जाएगा और उसी के अनुसार सीटों का आरक्षण लागू होगा।
यह फैसला उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव 2026 के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पिछड़े वर्ग के लोगों को आरक्षण का लाभ मिलेगा. सरकार का यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन में उठाया गया है, जिसमें स्थानीय निकाय चुनावों से पहले समर्पित आयोग का होना अनिवार्य बताया गया है.

