काशी में महाशिवरात्रि की तैयारियां तेज हो गई हैं। महंत परिवार से जुड़े संजीव रत्न मिश्रा के मुताबिक, महाशिवरात्रि से पहले ही महंत आवास पर विवाह से जुड़ी पारंपरिक रस्में शुरू हो जाएंगी और मंगलगीतों की गूंज माहौल को भक्तिमय बना देगी। इस बार बाबा विश्वनाथ असमिया वस्त्र धारण करेंगे और उनके लिए विशेष लकड़ियों से बना भव्य सिंहासन भी तैयार किया गया है, जो उत्सव को और खास बनाएगा।
काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत आवास पर महाशिवरात्रि की तैयारियां लगभग पूरी हो गई हैं। महंत परिवार से जुड़े संजीव रत्न मिश्रा ने बताया कि महाशिवरात्रि से पहले ही महंत आवास पर विवाह से जुड़ी रस्में शुरू हो जाएंगी और मंगलगीतों की आवाज भी सुनाई देगी। इस बार बाबा विश्वनाथ असमिया वस्त्र धारण करेंगे। इसके साथ ही, उनके लिए विशेष लकड़ियों का सिंघासन भी बनाया गया है। इस सिंघासन को 11 तरह के लकड़ियों से तैयार किया गया है।
नवरत्नों से बना छत्र आकर्षण का केंद्र होगा
महाशिवरात्रि पर बाबा दूल्हा बन नगर भ्रमण पर निकलेंगे तो नव रत्नों से बना राजसी छत्र और सिंगोल के साथ वो अपने भक्तों को दर्शन देंगे। इसके अलावा वो रुद्राक्ष, फल और मेवे से बना सेहरा भी पहनेंगे।
खास होगा परिधान
इस बार महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ और माता गौरा का श्रृंगार विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रहेगा। इस बार पहला ऐसा मौका होगा जब भगवान शिव और माता गौरा की चल प्रतिमा असमिया पारंपरिक परिधान और आभूषणों में सजेगी। पूर्व महंत वाचस्पति तिवारी ने बताया कि इस बार महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ और माता गौरा को जो परिधान धारण कराए जाएंगे, वे असम के ऐतिहासिक नगर शिवसागर से विशेष रूप से मंगाए गए हैं। यह श्रृंगार न केवल परिधान की दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक संदेश के रूप में भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
काशी शिवमय होता है
महाशिवरात्रि पर काशी शिवमय होता है। इस दिन काशी विश्वनाथ मंदिर सहित सभी शिव मंदिरों में भारी भीड़ होती है। इस बार काशी में महाशिवरात्रि में करीब 15 लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन के लिए आ सकते हैं। इसके लिए काशी विश्वनाथ मंदिर में भी खास तैयारियां जारी हैं। इस बार महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ भक्तों को सिर्फ और सिर्फ झांकी दर्शन देंगे। मन्दिर प्रशासन ने स्पर्श दर्शन पर रोक लगाई गई है।

