अमेठी. इलाके और क्षेत्र की पहचान उसके विकास कार्यों से होती है, यदि कोई इलाका बेहतर विकसित हो, तो लोग उसकी तारीफ करते हैं. लेकिन अगर लाखों रुपये खर्च किए जाएं और काम हज़ार रुपये का भी न हो, तो यह सवाल खड़े करने जैसा होता है. कुछ ऐसा ही हाल अमेठी जिले के गौरीगंज नगर पालिका का है, जहां कागज़ों पर तो विकास के दावे खूब किए गए, लेकिन हकीकत में विकास के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई, जिसके कारण आज लोगों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. तस्वीरें अमेठी जिले के गौरीगंज नगर पालिका की हैं. यह जिला मुख्यालय की नगर पालिका का गठन हुए लगभग 16 वर्ष हो चुके हैं. 2015 में इस नगर पालिका का गठन किया गया था, लेकिन आज यहां के इलाके अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं. जिन सड़कों पर शहर के बड़े अधिकारी और वरिष्ठ नागरिक रहते हैं, वहां की असलियत नगर पालिका के दावों की पोल खोल रही है. ‘लोकल 18’ की टीम जब वार्डों में जाकर ग्राउंड जीरो पर हकीकत जानने गई, तो चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आई.
जगह-जगह टूटे चैंबर से हादसे का खतरा
जल निकासी के लिए लगाए गए नालियों के चैंबर जगह-जगह टूट गए हैं, जिसके कारण बरसात में ही नहीं, बल्कि आम दिनों में भी सड़क पर टूटे चैंबर से जल भराव ऊपर सड़कों तक आ जाता है. इसके साथ ही टूटे और क्षतिग्रस्त चैंबर आए दिन लोगों को अस्पताल पहुंचा देते हैं. आए दिन लोग हादसे का शिकार हो जाते हैं. इसके अलावा, आने वाली दो-पहिया और चार-पहिया वाहन भी इन्हीं टूटे चैंबर में फंस जाते हैं, जिससे लोगों को गंभीर समस्या होती है.
सफाई के नाम पर सिर्फ ‘खानापूर्ति’, गंदगी का अंबार
स्थानीय निवासी मोहम्मद माज़िद अहमद बताते हैं कि कभी भी सफाई कर्मचारी उनके वार्ड में नहीं आते हैं. फोन किया जाता है तो कहते हैं कि आएंगे, लेकिन पता नहीं चलता. सफाई होती भी है तो सिर्फ नाम मात्र की; जगह-जगह जल भराव है और गंदगी रहती है, जिसके कारण बीमारियों का खतरा बना रहता है. उन्होंने कहा कि बड़ी-बड़ी नेताओं के घरों की साफ-सफाई तो हो जाती है, लेकिन आम जनता पर भी ध्यान देना चाहिए. वही एक अन्य स्थानीय निवासी शशिकांत तिवारी बताते हैं कि स्वच्छता वार्ड और नगर की सबसे प्रमुख समस्या है. इसे प्राथमिकता देकर सुधारना चाहिए, उन्होंने कहा कि हर वार्ड में कूड़े के लिए डस्टबिन स्थापित किए जाएं. इसके साथ ही जो कूड़ा इकट्ठा हो, उसे बनाए गए कूड़ा घर तक पहुंचाया जाए. इसके अलावा, जो भी टूटे चैंबर हैं, उन्हें सही कराया जाए, ताकि हादसे न हों और लोगों को परेशानी न उठानी पड़े. एक और स्थानीय निवासी मोहम्मद इसरार बताते हैं कि साफ-सफाई की बहुत दिक्कत है. पानी भर जाने के कारण आने-जाने में समस्या होती है, इसके अलावा सबसे ज्यादा दिक्कत सड़कों पर टूटे ढक्कन और चैंबरों से होती है. अंधेरे में कभी-कभी लोग अचानक इसी में फंस जाते हैं और घायल हो जाते हैं, इसे तुरंत सही किया जाना चाहिए.
कैमरे से भागे जिम्मेदार अधिकारी
जब इस पूरी बदहाली और जनता की शिकायतों को लेकर अधिशासी अभियंता सुनील कुमार से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने कैमरे पर कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया. ऑफ़ कैमरा उन्होंने कहा कि लोगों की समस्या का ध्यान दिया जा रहा है और जहां भी शिकायत होगी, उसका निस्तारण कराया जाएगा. लेकिन उन्होंने कैमरे पर किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया.

