Uttar Pradesh

Ground Report: सिर्फ वीआईपी दौरे के वक्त ही खुलता है शौचालय.. अमेठी में सामुदायिक शौचालयों को लेकर ग्रामीणों ने खोली सरकारी दावों की पोल

अमेठी: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने जिस स्वच्छ भारत मिशन का सपना गांव में देखा आज लाखों रुपए खर्च करने बाद भी उसे पूरा नहीं किया जा रहा है. अमेठी जिले में स्वच्छता अभियान और गांव को खुले में शौच मुक्त करने के लिए अमेठी जनपद में करोड़ों रुपए खर्च कर स्वच्छ भारत अभियान के तहत बनाए गए सामुदायिक शौचालय हाथी दांत साबित हो रहे हैं. सामुदायिक शौचालय का उपयोग आम जनमानस नहीं कर पाता.

हैरान कर देने वाली बात यह है कि जब भी वीआईपी निरीक्षण होता है तभी सामुदायिक शौचालय का दरवाजा खोला जाता है. वहां पर साफ-सफाई की जाती है. इसके बाद फिर सामुदायिक शौचालय में ताला लगाकर उसे बंद कर दिया जाता है. विभागीय अधिकारियों को शिकायत करने के बाद समस्या का समाधान नहीं हो रहा. ऐसे में विभागीय अधिकारी कैमरे पर कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं.

खुले में शौच करने के लिए मजबूर

यह तस्वीरें हैं अमेठी जिले के पंचायती राज विभाग की तरफ से बनवाए गए सामुदायिक शौचायलयों की जहां पर आप खुद देख सकते हैं कि शौचालय न खुलने की वजह से तालों में जंग लग रहा है. वहीं दीवालें धूल फांक कर जर्जर हो रही हैं. एक तरफ जहां गांव की महिलाओं,  बेटियों और आम जनमानस को आज खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है, तो वहीं दूसरी तरफ शौचालय में करोड़ों रुपए खर्च करने का मतलब सिर्फ कागजों पर दिखाई दे रहा है.

सरकारी शौचालयों पर लगे हैं ताले

लोकल 18 की टीम ने ग्राउंड पर पहुंचकर लोगों से बातचीत की गांव की प्रिया बताती है कि जब सरकार ने व्यवस्था दी पैसे खर्च किए बड़े-बड़े वादें और दावे किए गए कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय का उपयोग आमजन करेगा तो शौचालय में ताले क्यों लगे हैं. सरकार ने व्यवस्था दी है, तो सरकारी शौचालय को शुरू भी करें. उन्होंने कहा कि बहुत दिक्कत होती है सुरक्षा का खतरा रहता है, लोगों को समस्या होती है और पैसे का दुरुपयोग हो रहा है.

वही एक और बुजुर्ग बताती हैं कि शौचालय की समस्या काफी दिनों से है. कई बार इसके लिए शिकायत भी हुई लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ता और शौचालय लंबे समय से बंद है.

सामुदायिक शौचालय का हाल बेहाल

जिले में 600 से अधिक ग्राम पंचायत में समूह की महिलाओं को केयरटेकरिंग की जिम्मेदारी दी गई है जिन्हें प्रतिमाह 6 हजार का मानदेय दिया जाता है. जिससे वह उसकी देखरेख कर सकें लेकिन सभी सामुदायिक शौचालय का हाल बाहर बेहाल है और उन्हें फर्जी तरीके से घर बैठे मानदेय भी दिया जा रहा है. समूह के लोग घर बैठे मानदेंय ले रहे हैं और शौचालय में ताले शोभा बढ़ा रहे हैं.

दोषी पाए जाने पर होगी कार्रवाई

फिलहाल, इस पूरी समस्या को लेकर जिला पंचायत राज अधिकारी मनोज त्यागी ने कहा कि शौचालय की समस्या विकट और गंभीर है. फिलहाल, सभी शौचालय एक्टिव हैं लेकिन जहां पर भी शौचालय बंद पाए गए और निरीक्षण में या फिर शिकायत मिली तो संबंधित समूह और केयरटेकर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी.

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