Kanpur Lamborghini Accident Case: कानपुर की सड़कों पर छह लोगों को अपनी तेज रफ्तार लैंबॉर्गिनी से रौंदने वाले शिवम मिश्रा का मामला क्या अदालती दांव-पेंच की भेंट चढ़ जाएगा? सोमवार को कानपुर के एक बड़े तंबाकू कारोबारी के बेटे शिवम मिश्रा के वकील मृत्युंजय कुमार ने जो दलीलें पेश कीं, उसने पूरे शहर में आक्रोश पैदा कर दिया है. एक तरफ पीड़ित इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं, तो दूसरी तरफ वकील का दावा है कि शिवम को मिर्गी के दौरे आते हैं और कार वह नहीं, बल्कि उनका ड्राइवर मोहन चला रहा था. शिवम के वकील का कहना है कि एक्सीडेंट के वक्त शिवम की तबीयत खराब थी. लेकिन सीसीटीवी फुटेज ने इस दावे की धज्जियां उड़ा दी हैं. वीडियो में साफ दिख रहा है कि एक्सीडेंट के तुरंत बाद बाउंसर ड्राइविंग सीट से शिवम मिश्रा को बाहर निकाल रहा है.
भारत में यह पहली बार नहीं है जब किसी हाई-प्रोफाइल मामले में ड्राइवर या बीमारी को ढाल बनाया गया हो. देश के कुछ बड़े एक्सीडेंट केस इस बात के सबूत हैं कि रसूख कैसे कानून को अपनी उंगलियों पर नचाता है. पहले उन मामलों को समझें, जिसमें रसूखदार लोग बड़ी आसानी से निकल गए. जबकि, सबूत चीख-चीख कर कह रहा था कि वह दोषी था.
कानपुर हिट एंड रन केस में बड़ा एक्शन.
देश में इस तरह के कितने हाई-प्रोफाइल मामले?
सलमान खान हिट एंड रन केस 2002: इस केस में लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अंत में यही तर्क दिया गया कि कार सलमान नहीं, उनका ड्राइवर अशोक सिंह चला रहा था. सबूतों के अभाव में सलमान बरी हो गए.
संजीव नंदा (बीएमडब्ल्यू केस, 1999): रईस खानदान के संजीव नंदा ने दिल्ली में 6 लोगों को कुचल दिया था. इस मामले में भी गवाहों को तोड़ने और सबूत मिटाने की हर संभव कोशिश हुई, हालांकि अंत में सजा हुई लेकिन बहुत कम.
पुणे पोर्श कांड (2024): एक नाबालिग रईसजादे ने दो इंजीनियरों को कुचल दिया. पुलिस और डॉक्टरों ने मिलकर ब्लड सैंपल बदले और ड्राइवर को जबरन जुर्म कबूल करने के लिए धमकाया. बाद में हाईकोर्ट की दखल से मामला खुला.
कानपुर लैंबॉर्गिनी हादसे पर क्या कहते हैं पुलिस अधिकारी
न्यूज़ 18 इंडिया ने उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी अरविंद जैन से बात की. उन्होंने कहा कि शिवम मिश्रा का तुरंत मेडिकल होना चाहिए था और पुलिस ने इस मामले में लापरवाही बरती है. कानपुर में एक लैम्बोर्गिनी कार हादसे में तीन लोगों को रौंदा गया, जिसमें पुलिस ने लापरवाही की. अगर अधिकारी मौके पर जाते तो सही जानकारी मिलती. पुलिस कमिश्नर ने इंस्पेक्टर को हटा दिया है. शिवम मिश्रा खुद कार चला रहा था और बाउंसर ने उसे बचाया. मौके पर जाकर सही जानकारी लेकर एफआईआर दर्ज करनी चाहिए थी.
क्या कहते हैं कानूनी जानकार?
कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि शिवम को मिर्गी (Epilepsy) की बीमारी है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस कैसे बना? मेडिकल नियमों के अनुसार, मिर्गी के मरीजों को ड्राइविंग की अनुमति नहीं है. यदि वह सचमुच बीमार है तो उसने गाड़ी चलाकर जानबूझकर दूसरों की जान जोखिम में डाली, जो गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में आता है.
कानपुर पुलिस के सामने अब क्या चुनौती?
अब गेंद कानपुर पुलिस के पाले में है. क्या पुलिस सीसीटीवी और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर इस दावे को झूठा साबित कर पाएगी? या फिर 100 करोड़ के साम्राज्य का वारिस शिवम मिश्रा भी इंसाफ की देरी का फायदा उठाकर बाहर घूमता रहेगा?
बचाव पक्ष क्या तर्क अदालत में दे सकती है?
लैंबॉर्गिनी केस पर बचाव पक्ष के वकील मृत्युंजय ने कहा, शिवम गाड़ी नहीं चला रहा था. उसका ड्राइवर मोहन चला रहा था. यह एक एक्सीडेंट का मामला है. जब वह गाड़ी नहीं चला रहा था, तो उसके खिलाफ कोई केस नहीं बन सकता. इस बीच, एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें बाउंसर शिवम को ड्राइविंग सीट से उठाकर ले जा रहे हैं. एक्सीडेंट के 24 घंटे बाद सामने आए फुटेज में एक बाउंसर शिवम मिश्रा को लेम्बोर्गिनी रेवुएल्टो की ड्राइवर सीट से खींचता हुआ दिख रहा है. बैकग्राउंड में स्थानीय लोगों को लोगों से वीडियो रिकॉर्ड करने की अपील करते हुए सुना जा सकता है.
इस मामले में अबतक किसी की गिरफ्तारी नहीं की गई है. अधिकारियों के मुताबिक प्रकरण में लापरवाही बतरने के आरोप में ग्वालटोली थाना के थानाध्यक्ष को लाइन हाजिर कर दिया गया है. वहीं बंशीधर एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के मालिक केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा भी जांच के दायरे में है. अधिकारियों ने बताया कि रविवार को ग्वालटोली इलाके में वीआईपी मार्ग पर दोपहर करीब सवा तीन बजे करीब 10 करोड़ रुपये कीमत की इतालवी लग्जरी स्पोर्ट्स कार लैंबॉर्गिनी ने कई वाहनों को टक्कर मार दी थी. कार ने कई लोगों को कुचल दिया था. इस घटना में कम से कम छह लोग जख्मी हो गए थे.

