अमेठी. बेरोजगारी की तलाश में भटक रही बेरोजगार महिलाएं अब अपने हुनर और सम्मान के साथ आत्मनिर्भर बनेंगी. महिलाओं को काम और रोजगार के लिए अब भटकने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि उन्हें स्वयं समूहों से जोड़ने के लिए गांव-गांव जाकर उनका चयन किया जाएगा. इसकी जिम्मेदारी राष्ट्रीय आजीविका मिशन के एनआरएलएम प्रभारियों को दी गई है. महिलाओं को उनकी पसंद के अनुसार काम दिया जाएगा. जिस क्षेत्र में महिला रुचि रखती हैं, उन्हें उसी क्षेत्र में हुनर और रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा. इससे कहीं न कहीं महिलाओं को रोजगार का अवसर मिलेगा और उनकी बेरोजगारी दूर होगी.
जिले में वर्तमान समय में 8000 से अधिक स्वयं सहायता समूह हैं, जिनसे महिलाओं को रोजगार के लिए जोड़ा गया है. हालांकि, कुछ स्वयं सहायता समूह जागरूकता के अभाव में बंद हो गए थे. लेकिन अब शासन से मिले निर्देश के बाद ब्लॉक मैनेजमेंट प्रभारी यानी बीएएम गांव-गांव जाकर स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं, मनरेगा से जुड़ी महिलाएं, बैंक सखी, बीसी सखी के साथ-साथ जो भी महिलाएं कक्षा आठवीं पास हैं. रोजगार से जुड़ना चाहती हैं, उन्हें समूह में जोड़कर सीधे बिना किसी समस्या के रोजगार से जोड़ा जाएगा.
जिले में खुद के तैयार होंगे उत्पाद
विभाग का मकसद यह है कि जिले में जो महिलाएं अचार, मुरब्बा, बिस्किट, नमकीन जैसे खाने-पीने के उत्पाद, कपड़े, सिलाई-कढ़ाई, गुलदस्ता, फूलों का कारोबार या फिर जिस भी क्षेत्र में बेहतर कर रही हैं, उन्हें उसी क्षेत्र में रोजगार दिया जाए. महिलाओं को अनुदान की आवश्यकता पड़ने पर बिना किसी गारंटी के अनुदान भी उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे महिलाएं सीधे रोजगार से जुड़ सकें और आत्मनिर्भर बनें.
आत्मनिर्भर बनने का मिलेगा मौका
स्वयं सहायता समूह से जुड़ी एक महिला रिंकी सिंह बताती हैं कि इस पहल से न सिर्फ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का मौका मिलेगा, बल्कि उनकी बेरोजगारी भी दूर होगी. महिलाएं अक्सर घर की दहलीज नहीं लांघ पाती हैं और उन्हें रोजगार के लिए भटकना पड़ता है. अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए दूसरों के सामने हाथ फैलाने की मजबूरी होती है. अब इस पहल से इस समस्या को दूर किया जाएगा, यह एक बहुत ही सकारात्मक कदम है और इसे पूरी पारदर्शिता के साथ लागू किया जाना चाहिए. वहीं एक और महिला बताती हैं कि लगातार महिलाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है, चाहे वह फूड का क्षेत्र हो, सिलाई-कढ़ाई का क्षेत्र हो या फिर महिलाओं के खुद के बने उत्पाद हों, उन्हें आगे लाया जा रहा है.
अब इस कदम से जो भी छूटी हुई महिलाएं हैं, उन्हें भी रोजगार पाने का मौका मिलेगा. इससे एक बेहतर माहौल बनेगा और समाज में महिलाओं को रोजगार के बेहतर विकल्प मिलेंगे. राष्ट्रीय आजीविका मिशन की प्रभारी प्रवीणा शुक्ला बताती हैं कि सभी ब्लॉकों में ऐसी महिलाओं को चिन्हित किए जाने के लिए उनका चिन्हांकन और सर्वे किया जा रहा है. सर्वे के बाद एक बैठक होगी, बैठक में इच्छुक महिलाएं अपना आवेदन भरकर आगे की प्रक्रिया में शामिल होंगी और अपना खुद का रोजगार शुरू कर सकेंगी. इसी के साथ समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनेंगी.

