Last Updated:February 08, 2026, 08:06 ISTJhulsa rog tomato: बदलते मौसम के कारण इस समय टमाटर की फसल में रोगों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है जिस कारण टमाटर की खेती करने वाले किसान बेहद परेशान है थोड़ी सी लापरवाही फसल के लिए भारी पड़ सकती है ऐसे में किसानो का भारी नुकसान होगा. फरवरी के महीने में झुलसा रोग का प्रकोप रहता है झुलसा रोग लगने के कारण टमाटर का पौधा सूखने लगता है जिस कारण फसल उत्पादन में कमी आती है. लखीमपुर खीरी जिले में किसान बड़े पैमाने पर टमाटर की खेती करते हैं. टमाटर की खेती कर किसानों को अच्छा खासा मुनाफा भी होता है. कम लागत में अधिक मुनाफा टमाटर की खेती से कमाया जा सकता है टमाटर की खेती को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग की ओर से लगातार किसानों को जागरूक किया जाता है वहीं किसानों को टमाटर के बीज निशुल्क में उपलब्ध कराए जाते हैं. टमाटर का प्रयोग सब्जी से लेकर चटनी और बड़े-बड़े रेस्टोरेंट में किया जाता है जिस कारण डिमांड लगातार बढ़ती जाती है. बदलते मौसम के कारण इस समय टमाटर की फसल में रोगों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है. जिस कारण टमाटर की खेती करने वाले किसान बेहद परेशान है. थोड़ी सी लापरवाही फसल के लिए भारी पड़ सकती है ऐसे में किसानो का भारी नुकसान होगा. फरवरी के महीने में झुलसा रोग का प्रकोप रहता है झुलसा रोग लगने के कारण टमाटर का पौधा सूखने लगता है. जिस कारण फसल उत्पादन में कमी आती है फसल उत्पादन में कमी आने के साथ-साथ किसान की आय पर भी इसका सीधा असर पड़ता है. झुलसा का प्रकोप खेतों में अत्यधिक नमी होने के कारण दिखाई देने लगता है. टमाटर के पौधे की पत्तियों और फलों पर छोटे, काले, धंसे हुए धब्बे दिखाई देते हैं. जिससे टमाटर की गुणवत्ता खराब हो जाती है और बाजारों में सही दाम नहीं मिल पाते हैं. कृषि वैज्ञानिक डॉ सुहेल खान ने जानकारी देते हुए बताया कि मौसम में परिवर्तन होने के साथ टमाटर में रोगों का प्रकोप बढ़ गया है कहीं धूप तो कहीं घना कोहरा होने के कारण प्रकोप बढ़ता जा रहा है ऐसे में किसान कीटनाशक दावों का छिड़काव कर सकते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google झुलसा रोग तेजी से फसलों को प्रभावित करता है. यह पत्ती, तना और फल को भी नुकसान पहुंचाता है. जैसे ही टमाटर के पौधों पर इस रोग के लक्षण 10% से ज्यादा होने पर मेटालैक्सिल 8% + मैंकोजेब 64% डबल्यू पी का 2-2.5 ग्राम/लीटर पानी के हिसाब से 10 से 15 दिन के अंतर पर छिड़काव करें. उन्होंने कहा कि जहां रोग की अधिकता हो वहां पर रोग ग्रस्त पौधों के अवशेषों को पहले एकत्र कर जलाएं उसके बाद उपरोक्त फफूंदनाशक का छिड़काव करें. इसके अलावा किसान नीम के तेल का छिड़काव भी कर सकते हैं फरवरी के महीने में टमाटर की फसल में बैक्टेरियल स्पॉट रोग का प्रकोप देखा जा रहा है. जिसको लेकर किसान बेहद चिंतित है यह रोग टमाटर को पूरी तरीके से बर्बाद कर देता है. यह एक बैक्टीरिया जानिए रोग हैं, फसल चक्र बेहद जरूरी होता है लगातार आप एक ही खेत में टमाटर की खेती न करें जिससे इस रोग पर नियंत्रण पाया जा सकता है. बैक्टीरियल स्पॉट मुख्यतः गीले और नम मौसम में फैलता है, खासकर तब जब हवा में नमी अधिक होती है और तापमान 20-30 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है.टमाटर के फलों पर भी काले धब्बे उभरने लगते हैं, जिससे फल खराब हो जाते हैं. झुलसा से टमाटर की फसल में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कर सकते हैं. मैनकोज़ेब (Mancozeb) (2-3 ग्राम/लीटर) मिलाकर स्प्रे करने से बैक्टीरियल स्पॉट का प्रकोप धीरे-धीरे कम हो जाएगा आप 15 दिन में दो बार दवा का छिड़काव कर सकते हैं.बैक्टीरियल स्पॉट टमाटर के पौधे के सभी ऊपरी हिस्सों को प्रभावित करता हैं। जिससे टमाटर का फल बाजारों में बिकने के लायक नहीं रह जाता है जिससे किसानों का आर्थिक नुकसान होता है.First Published :February 08, 2026, 08:06 ISThomeuttar-pradeshटमाटर की फसल पर झुलसा रोग से हो रहा नुकसान, किसान करें इस घोल का छिड़काव
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