Uttar Pradesh

स्वस्थ पशु और स्थिर दुग्ध उत्पादन के टिप्स

Last Updated:February 05, 2026, 23:31 ISTAnimal Husbandry: रायबरेली में मौसम में बदलाव केवल इंसानों पर नहीं, बल्कि पशुओं पर भी गहरा असर डालता है. ठंड में सर्दी, खांसी और जोड़ों का दर्द, गर्मी में लू और डिहाइड्रेशन, और बरसात में त्वचा रोग व संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. डॉ. इंद्रजीत वर्मा के अनुसार, पशुपालकों को बदलते मौसम में पशुशाला की व्यवस्था, हरा चारा, सूखा भूसा, गुनगुना पानी और स्वच्छता का खास ध्यान रखना चाहिए. समय पर टीकाकरण और कृमिनाशक दवाएं भी जरूरी हैं.

ख़बरें फटाफटरायबरेली. मौसम में बदलाव का असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि पशुओं की सेहत पर भी गहराई से पड़ता है. खासकर ठंड, गर्मी या बरसात के दौरान अचानक तापमान में उतार-चढ़ाव होने से पशु बीमार पड़ सकते हैं. इसका सीधा असर न सिर्फ पशुओं के स्वास्थ्य पर पड़ता है, बल्कि दुग्ध उत्पादन में भी गिरावट देखने को मिलती है. ऐसे में पशुपालकों के लिए जरूरी है कि वे बदलते मौसम में पशुओं की विशेष देखभाल करें. रायबरेली जिले के राजकीय पशु चिकित्सालय, शिवगढ़ की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, डॉक्टर इंद्रजीत वर्मा (एमवीएससी, मथुरा) ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि ठंड के मौसम में पशुओं को सर्दी, खांसी, निमोनिया और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

वहीं, गर्मी में लू लगना, डिहाइड्रेशन और भूख कम लगना आम है. बरसात के मौसम में कीड़े-मकोड़े, त्वचा रोग और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए मौसम के अनुसार पशुओं के रहने की व्यवस्था में बदलाव करना बेहद जरूरी है. ठंड में पशुशाला को ठंडी हवा से बचाना चाहिए और सूखा बिछावन रखना चाहिए. गर्मी में पशुओं के लिए छायादार जगह और साफ पानी की भरपूर व्यवस्था होनी चाहिए.

पशुओं के खान-पान का रखें विशेष ध्यानइंद्रजीत वर्मा के अनुसार बदलते मौसम में हरा चारा, सूखा भूसा और संतुलित आहार देना चाहिए. खनिज मिश्रण और नमक का नियमित सेवन पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है. ठंड में गुनगुना पानी पिलाने से पशु स्वस्थ रहते हैं और दूध उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ता है. साथ ही स्वच्छता का भी खास ध्यान रखना चाहिए. पशुशाला की नियमित सफाई, गोबर और गंदगी को समय पर हटाना जरूरी है ताकि संक्रमण न फैले. इसके अलावा समय-समय पर टीकाकरण और कृमिनाशक दवाएं देना पशुओं को बीमारियों से बचाने में मदद करता है. किसी भी प्रकार के लक्षण दिखने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए.

दुग्ध उत्पादन पर पड़ेगा असरअगर पशु स्वस्थ रहते हैं तो दुग्ध उत्पादन भी स्थिर रहता है, लापरवाही बरतने पर दूध की मात्रा और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकती हैं, जिससे पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. बदलते मौसम में पशुओं की देखभाल को प्राथमिकता देना जरूरी है, ताकि पशु स्वस्थ रहें और दुग्ध उत्पादन पर कोई नकारात्मक असर न पड़े.About the AuthorMonali PaulHello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ेंLocation :Rae Bareli,Uttar PradeshFirst Published :February 05, 2026, 23:31 ISThomeuttar-pradeshमौसम बदलते ही पशुओं की देखभाल जरूरी, दुग्ध उत्पादन बनाए रखने के टिप्स

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