Last Updated:February 05, 2026, 18:57 ISTBaba Maheshnath Temple: सुल्तानपुर के देवरहर, इसौली और दिखौली क्षेत्रों में स्थित प्राचीन शिव मंदिर आस्था, इतिहास और रहस्यों का अनोखा संगम हैं. बाबा महेश नाथ धाम से जुड़ी मान्यताएँ महाभारत और रामायण काल तक जाती हैं, जबकि अंग्रेजों के दौर की गोलियों के निशान आज भी शिवलिंग पर देखे जा सकते हैं. गोमती नदी के तट पर स्थित ये शिवालय हजारों वर्षों से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिए प्रसिद्ध हैं, जहां महाशिवरात्रि और मलमास के अवसर पर लाखों भक्त उमड़ पड़ते हैं. सुल्तानपुर का बाबा महेश नाथ मंदिर भगवान शिव का एक प्राचीन और दिव्य मंदिर है, जो ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताओं के कारण काफी प्रसिद्ध है. इस मंदिर के पुजारी प्रशांत उपाध्याय लोकल 18 से बताते हैं कि देवरहर गांव में स्थित बाबा महेशनाथ धाम को लेकर मान्यता है कि यह स्थान महाभारत काल में भुरुचों के कबीले का निवास स्थान था. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और धार्मिक मान्यताओं के चलते यह मंदिर सुल्तानपुर के प्रमुख शिव धामों में गिना जाता है. मंदिर के पुजारी पंडित शिव शंकर पांडे लोकल 18 से बातचीत के दौरान बताते हैं कि गोमती नदी के तट पर बनाए गए शंकर जी के शिवालय का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है. यहां पर, जब राजा दशरथ के सारथी और महामंत्री सुमंत जी माता जानकी को छोड़ने जा रहे थे, तो उन्होंने यहीं पर विश्राम किया था. माता जानकी महर्षि वाल्मीकि के आश्रम इसी शिवालय से ही गई थी. यह शिवालय कई हजार वर्षों से भी अधिक पुराना माना जाता है, जिसका संबंध रामायण काल से है. इस मंदिर में जो भी दर्शन और पूजन करता है, उसकी सारी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं. गांव के बुजुर्ग अच्चिदानंद बताते हैं कि इस मंदिर का इतिहास 200 वर्षों से भी अधिक पुराना है. भारत जब अंग्रेजों की पराधीनता कर रहा था, उस समय ब्रिटिश हुकूमत ने इस शिवलिंग को खोदने का प्रयास किया था, लेकिन इसकी गहराई आज भी उन्हें पता नहीं लगी. शिवलिंग एक टीले पर मौजूद है, जिसकी ऊंचाई लगभग जमीन से 10 फीट ऊपर है, लेकिन इसके बावजूद भी अंग्रेज इस शिवलिंग की गहराई को नहीं जान पाए. जब अंग्रेजों और ग्रामीणों के बीच लड़ाई हुई, तब अंग्रेजों ने गोलियां चलाई और कुछ गोलियां शिवलिंग में लगीं, जिसके निशान आज भी मौजूद हैं. इस शिवलिंग पर जो भी व्यक्ति जल चढ़ाता है, भगवान भोलेनाथ उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी करते हैं, ऐसा वहां के लोगों का विश्वास है. Add News18 as Preferred Source on Google सुल्तानपुर के इसौली गांव में स्थित यह शिव मंदिर भी करीब 20 फीट ऊंचे टीले पर बना हुआ है. लगभग 200 वर्ष से अधिक पुराना यह मंदिर स्थानीय लोगों की गहरी आस्था का प्रतीक है. महाशिवरात्रि के दिन यहां विशाल मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. इस शिवलिंग की अभी तक आयु का पता नहीं लग पाया है. ग्रामीणों के मुताबिक यह शिवलिंग उस समय का है जब भगवान श्रीराम सुल्तानपुर आए थे. सुल्तानपुर से लगभग 7 किलोमीटर दूर दिखौली ग्राम सभा में यह प्राचीन शिवलिंग स्थित है. इसके खंडहर आज भी मौजूद हैं और यहां कई मूर्तियां भी हैं. लगभग 20 फीट ऊंचे टीले पर स्थित दिखौली का शिव मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है. हर वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां भव्य भंडारे का आयोजन होता है. वहीं, प्रत्येक तीसरे वर्ष मलमास में पूरे एक महीने तक शिव कथा का आयोजन किया जाता है. इस दौरान टिकरी से मंदिर तक भव्य शिव बारात निकाली जाती है, जिसमें 15 हजार से अधिक श्रद्धालु शामिल होते हैं. शिव बारात में हाथी, घोड़े और नंदी बैल आकर्षण के केंद्र रहते हैं.First Published :February 05, 2026, 18:57 ISThomeuttar-pradeshरामायण–महाभारत काल से जुड़ा सुल्तानपुर का बाबा महेश नाथ धाम, जानिए इसका रहस्य!
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