Uttar Pradesh

मल्चिंग विधि: सब्जी खेती में पैदावार और मुनाफा बढ़ाने की आधुनिक तकनीक

रायबरेली.किसानों के लिए सब्जियों की खेती आय बढ़ाने का एक बेहतरीन जरिया है, लेकिन मौसम की मार, खरपतवार, रोग और कीट अक्सर मुनाफे में बड़ी बाधा बन जाते हैं. ऐसे में मल्चिंग विधि किसानों के लिए एक आधुनिक और कारगर तकनीक बनकर उभरी है. विशेषज्ञों के अनुसार, मल्चिंग अपनाकर न केवल फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है, बल्कि उत्पादन और गुणवत्ता में भी जबरदस्त बढ़ोतरी होती है. दरअसल, रायबरेली जिले के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के प्रभारी कृषि रक्षा अधिकारी ऋषि कुमार चौरसिया (बीएससी एग्रीकल्चर, कानपुर विश्वविद्यालय) लोकल 18 से बात करते हुए बताते हैं कि मल्चिंग विधि आधुनिक सब्जी खेती की रीढ़ बनती जा रही है. सही तकनीक और विशेषज्ञ सलाह के साथ इसे अपनाकर किसान कम जोखिम में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं, क्योंकि मल्चिंग विधि को मॉडर्न फार्मिंग के तौर पर देखा जा रहा है, जो किसानों के लिए बेहद मुनाफे वाली खेती साबित हो रही है.

क्या है मल्चिंग विधि

ऋषि चौरसिया बताते हैं कि मल्चिंग वह तकनीक है, जिसमें खेत की मिट्टी की सतह को किसी आवरण से ढक दिया जाता है। यह आवरण जैविक भी हो सकता है, जैसे सूखी घास, पुआल, फसल अवशेष, या फिर अजैविक, जैसे प्लास्टिक मल्च (काली या सिल्वर शीट)। इसका मुख्य उद्देश्य मिट्टी में नमी बनाए रखना, खरपतवार को रोकना और फसल को अनुकूल वातावरण देना है।

सब्जी खेती में कैसे फायदेमंद

वे बताते हैं कि टमाटर, मिर्च, बैंगन, खीरा, तरबूज, खरबूजा जैसी सब्जियों में मल्चिंग से बेहतरीन परिणाम मिलते हैं। मल्चिंग से मिट्टी का तापमान संतुलित रहता है, जिससे जड़ों का विकास अच्छा होता है। साथ ही, मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे सिंचाई की जरूरत कम पड़ती है और पानी की बचत होती है।

रोग-कीट और खरपतवार से बचाव

मल्चिंग विधि का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह खरपतवार की वृद्धि को रोकती है। जब खरपतवार नहीं उगते, तो फसल के पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं। इसके अलावा, मिट्टी से पत्तियों पर कीचड़ उछलने की समस्या कम होती है, जिससे फंगल और बैक्टीरियल रोगों का खतरा घटता है। प्लास्टिक मल्च की सिल्वर सतह कीटों को भ्रमित करती है, जिससे एफिड्स और व्हाइट फ्लाई जैसे कीट दूर रहते हैं।

बढ़ता है उत्पादन और मुनाफा

ऋषि चौरसिया के मुताबिक, मल्चिंग अपनाने से सब्जियों की पैदावार 20 से 40 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। फसल जल्दी तैयार होती है और गुणवत्ता बेहतर होने के कारण बाजार में अच्छा दाम मिलता है। शुरुआती लागत भले ही थोड़ी अधिक हो, लेकिन कम सिंचाई, कम दवाइयों और ज्यादा उत्पादन से किसान को अच्छा मुनाफा मिलता है।

कैसे अपनाएं मल्चिंग

खेत की अच्छी तरह जुताई करके बेड तैयार करें. ड्रिप सिंचाई लाइन बिछाने के बाद प्लास्टिक मल्च शीट लगाएं और निर्धारित दूरी पर छेद करके पौध रोपण करें. जैविक मल्च के लिए सूखी घास या पुआल की मोटी परत मिट्टी पर बिछाई जा सकती है.

Source link

You Missed

authorimg
Uttar PradeshFeb 5, 2026

Namkaran Sanskar : 5 फरवरी को जन्मे बच्चों पर ग्रह-नक्षत्रों की दुर्लभ कृपा, इस अक्षर से रखें नाम, दिमाग चलेगा तेज

अयोध्या. हिंदू धर्म में कोई भी मांगलिक कार्य जब शुरू करना होता है तो शुभ मुहूर्त देखा जाता…

Scroll to Top