Uttar Pradesh

121 साल पुराना जलप्रपात, पेयजल का स्त्रोत

Last Updated:February 04, 2026, 22:39 ISTबुंदेलखंड में अक्सर सूखे जैसी स्थिति रहती है, इसलिए किसानों के खेतों की सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण होता था. इस समस्या को दूर करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने पूरे क्षेत्र में बड़े-बड़े बांध बनवाए. इनमें से सुकवा ढुकवा बांध सबसे प्रमुख है, जिसे 1905 में निर्माण शुरू करके 1909 में पूरा किया गया.ख़बरें फटाफटसुखवा दुकुवं बांध झांसी. बुंदेलखंड में अक्सर सूखे जैसे हालात रहते हैं, कई-कई साल तक मानसून की बारिश न होने के कारण किसानों के खेतों के लिए सिंचाई का पानी उपलब्ध कराना और पेयजल संकट को दूर करना चुनौतीपूर्ण होता था. इस समस्या से निपटने के लिए ब्रिटिश सरकार ने पूरे बुंदेलखंड में बड़े-बड़े बांध बनवाए. इन बांधों को जलप्रपात भी कहा जाता है, बुंदेलखंड के सभी सातों जिलों में कई ऐसे जलप्रपात हैं जो 100 साल से भी अधिक पुराने हैं. बुंदेलखंड के इन जलप्रपातों (बांधों) ने सूखे की स्थिति से निपटने के लिए दशकों से अपने भीतर संचित पानी को बेतवा नदी और नहरों में छोड़कर किसानों के खेतों की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया है. साथ ही, पेयजल संकट को भी दूर करने में इन बांधों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

बांध में कुल 3,759 मिलियन क्यूबिक फीट पानी हो सकता है संचित

देश की आजादी से पहले, साल 1905 में सुकवा ढुकवा बांध का निर्माण ब्रिटिश सरकार ने बेतवा नदी पर शुरू किया था. 1909 में ढुकवा बांध पूरी तरह से बनकर तैयार हुआ. इस बांध को बनाने का उद्देश्य ब्रिटिश सरकार का यह था कि बारिश का पानी हर हाल में इन बांधों में संचित किया जाए, ताकि बुंदेलखंड के सभी जिलों में रहने वाले किसानों और आम लोगों के लिए पानी की कभी कमी न हो. सुकवा बांध 121 साल पुराना है, इस बांध की कुल लंबाई 3845 फीट है और ऊंचाई 50 फीट है. सुकवा बांध में कुल 383 क्रेन-ऑपरेटेड गेट और तीन सुलाइस गेट हैं, इस बांध में कुल 3,759 मिलियन क्यूबिक फीट पानी संचित किया जा सकता है.

बांध का पानी पिछले कई दशकों से इस्तेमाल किया जा रहा

इस महत्वपूर्ण सुकवा बांध के पानी से दो लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में पानी की सप्लाई की जा सकती है. सिंचाई और पेयजल संकट को दूर करने के लिए बांध का पानी पिछले कई दशकों से इस्तेमाल किया जा रहा है. बेतवा नदी पर बने सुकवा ढुकवा बांध के पानी से कुछ हिस्सों में बिजली उत्पादन का भी काम किया जा रहा है. इससे बुंदेलखंड समेत आसपास के राज्यों में बांध के पानी से बनी बिजली की सप्लाई होती है. इस बांध के पानी से 201 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में किसानों के खेतों की सिंचाई भी की जाती है. 121 साल पुराने इस बड़े जलप्रपात को देखने के लिए खास तौर पर मानसून के मौसम में हजारों लोग यहां पहुंचते हैं. बांध के आसपास प्राकृतिक सुंदरता के अलावा घने जंगल, बड़े-बड़े पत्थरों के पहाड़ और जलप्रपात के भीतर पानी के सैलाब को देखकर लोग रोमांचित होते हैं.About the AuthorMonali PaulHello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ेंLocation :Jhansi,Uttar PradeshFirst Published :February 04, 2026, 22:39 ISThomeuttar-pradeshअंग्रेजों के समय में बना बुंदेलखंड का सुकवा बांध आज भी दे रहा लोगों को पानी

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