गाजियाबाद: गाजियाबाद की भारत सिटी सोसाइटी में 9वीं मंजिल से कूदकर जान देने वाली तीन सगी बहनों के मामले में लगातार चौंकाने वाले अपडेट सामने आ रहे हैं. इस ट्रिपल सुसाइड केस की चर्चा सुबह से ही हो रही है. हर कोई जानना चाहता है कि आखिर क्या सच में एक ऑनलाइन गेम किसी की जान के लिए खतरा बन सकता है. अब इस मामले में सूत्रों की माने तो पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है. जिस घटना को ऑनलाइन गेम या किसी कथित कोरियन लव गेम से जोड़कर देखा जा रहा था उसे पुलिस ने सिरे से नकार दिया है. पुलिस का कहना है कि तीनों की मौत किसी ऑनलाइन गेम की वजह से नहीं हुई है. आइए जानते हैं सबकुछ…
आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस सूत्रों ने बताया कि अब तक की जांच में किसी भी तरह के कोरियन लव गेम या ऑनलाइन सुसाइड चैलेंज का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है. न तो मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में और न ही डायरी के पन्नों में किसी ऐसे गेम या टास्क का जिक्र है, जो सीधे तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाता हो. हो सकता है कि यह मामला किसी संगठित ऑनलाइन गेम का नहीं, बल्कि डिजिटल कंटेंट की लत और उससे अचानक दूरी का है.
पुलिस को मिली थी 8 पन्नों की डायरीइस केस में एक 8 पन्नों की डायरी मिली है, जिसे सबसे अहम माना जा रहा है. इसमें तीनों बच्चियों ने अपने मन की बातें लिखी हैं. सूत्रों के मुताबिक, बच्चियों ने साफ लिखा है कि वे कोरियन कल्चर से बेहद प्रभावित थीं और उससे अलग रहना उनके लिए असहनीय हो गया था. डायरी में कोरियन कल्चर, K-POP, कोरियन म्यूजिक, कोरियन मूवीज, कोरियन शॉर्ट फिल्म्स, कोरियन शोज और कोरियन सीरीज का बार-बार जिक्र है. एक जगह अंग्रेजी में लिखा गया है WE LOVE KOREAN CULTURE. पुलिस का कहना है कि यह केवल पसंद या शौक नहीं था, बल्कि धीरे-धीरे यह एक तरह की लत बन चुका था.
मोबाइल फोन करने से किया था मनायह मामला बच्चों की बदलती मानसिक दुनिया और डिजिटल निर्भरता की एक बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश करता है. पुलिस जांच में सामने आया है कि कुछ समय पहले परिवार ने तीनों बच्चियों के मोबाइल फोन इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी. इसी फैसले ने उनके मानसिक तनाव को गहराई से बढ़ा दिया. बच्चियों ने अपनी डायरी में लिखा था कि मोबाइल बंद होने के बाद वे खुद को बेहद अकेला और टूटा हुआ महसूस करने लगी थीं. उनके लिए मोबाइल सिर्फ एक डिवाइस नहीं, बल्कि भावनात्मक सहारे का जरिया बन चुका था.
कोरोना के बाद से नहीं जा रही थीं स्कूलइस पूरे घटनाक्रम में कोरोना काल के बाद स्कूल से कटाव भी एक अहम वजह बनकर उभरा है. तीनों बच्चियां लंबे समय से स्कूल नहीं जा रही थीं. पढ़ाई में कमजोर होना और परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होना इसके पीछे कारण बताए जा रहे हैं. स्कूल छूटने के साथ ही उनका सामाजिक दायरा भी सिमटता चला गया. पड़ोसियों के मुताबिक, बच्चियां बहुत कम बाहर निकलती थीं और ज्यादातर समय अपने कमरे में ही रहती थीं. धीरे-धीरे उनकी दुनिया घर की चार दीवारों और मोबाइल तक सीमित हो गई.
घटना के बाद जब पुलिस फ्लैट में पहुंची, तो अंदर का माहौल बेहद भयावह था. कमरे की दीवार पर अंग्रेजी में लिखा था- “I AM REALLY VERY ALONE. MY LIFE IS VERY VERY ALONE.” ये शब्द बच्चियों की मानसिक स्थिति को साफ तौर पर बयान करते हैं. घर में परिवार के साथ रहते हुए भी वे खुद को पूरी तरह अकेला महसूस कर रही थीं. इस केस में पारिवारिक पृष्ठभूमि भी जांच के दायरे में है. बच्चियों के पिता ने दो शादियां की थीं और घर में दो पत्नियां व पांच बच्चे साथ रहते थे. हालांकि पुलिस को अब तक घरेलू हिंसा या प्रताड़ना के सीधे सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन पारिवारिक माहौल, भावनात्मक दबाव और बच्चों की मानसिक स्थिति से जुड़े हर पहलू की गहन जांच की जा रही है.
डीसीपी ट्रांस हिंडन निमिष पाटिल ने क्या कहा
डीसीपी ट्रांस हिंडन निमिष पाटिल ने बताया कि जिन 3 बहनों से सुसाइड किया है उसमें अभी तक के जांच में यह सामने आया है कि यह कोरियन कल्चर से बहुत इन्फ्लुएंस थी. मोबाइल की लत थी. पिछले कुछ दिनों से उन्हें मोबाइल चलाने से मना किया था. जिस वजह से ये लड़कियां परेशान थी और 9वीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी.
साइबर सेल कर रही जांच
वहीं गाजियाबाद में तीन बच्चियों की आत्महत्या के मामले में गाजियाबाद साइबर सेल जांच करने पहुंची. साइबर सेल की टीम गाजियाबाद पोस्टमार्टम हाउस पर बच्चियों के पिता से जानकारी ले रही है.

