Uttar Pradesh

Mustard Farming : पत्तियां सूख जाएंगी, पौधे काले…फरवरी का महीना सरसों के लिए घातक, ये 2 रोग बर्बाद कर देंगे पूरी फसल

Last Updated:February 04, 2026, 15:33 ISTMustard Crop Diseases : सरसों किसानों के लिए सावधान होने का समय है. फरवरी के मौसम में सबसे अधिक खतरा सरसों को रहता है. सरसों की फसल में विल्ट और पाउडरी मिल्डयू का खतरा मंडराने लगता है. विल्ट रोग लगने पर सरसों की पत्तियां तेजी से सूखने लगती हैं. समय पर अगर ध्यान नहीं दिया गया तो पौधा काला पड़ जाता है. यह रोग पौधे में फूल और फली निकलने के दौरान लगता है. लोकल 18 से बात करते हुए जमुनाबाद कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप बिसेन बताते हैं कि फरवरी से मार्च के बीच मध्यम तापमान और अधिक आर्द्रता होने से इन रोगों का प्रकोप बढ़ने लगता है. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में किसान बड़े पैमाने पर सरसों की खेती करते हैं. इसकी खेती से किसानों को अच्छा मुनाफा होता है. सरसों कम लागत में अधिक मुनाफे वाली फसल है, लेकिन फरवरी के महीने में इसकी अधिक देखभाल करनी पड़ती है. इस मौसम में लगातार कीटों का प्रकोप देखा जाता है. थोड़ी सी लापरवाही फसल बर्बाद कर सकती है. सरसों रबी सीजन की प्रमुख तिलहनी फसल है. कम लागत, कम सिंचाई और बेहतर मुनाफे के कारण सरसों को किसान “पीला सोना” भी कहते हैं. यह फसल न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाती है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और मिट्टी की सेहत सुधारने में भी अहम भूमिका निभाती है. लेकिन बदलते मौसम और बढ़ते रोगों के कारण सरसों की फसल पर खतरा बढ़ता जा रहा है, जिससे किसानों की चिंता भी बढ़ गई है. जमुनाबाद कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप बिसेन बताते हैं कि अचानक मौसम में परिवर्तन देखा जा रहा है. इससे फसलों में रोग बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है, जिसे लेकर किसान बेहद परेशान रहते हैं. सरसों ऐसी फसल है जिसे कई सालों तक अपने पास सुरक्षित रखा जा सकता है. यह खराब नहीं होती है इसीलिए भी किसान सरसों की खेती अधिक करते रहे हैं. Add News18 as Preferred Source on Google फरवरी के मौसम में सरसों की फसल में विल्ट और पाउडरी मिल्डयू का खतरा रहता है. विल्ट रोग में सरसों की पत्तियां तेजी से सूखने लगती हैं, फिर भूरे रंग की हो जाती है. समय पर अगर ध्यान नहीं दिया गया तो पौधा काला पड़कर नष्ट हो जाता है. यह रोग जब सरसों की पौधे में फूल और फली निकलने लगती हैं तब अटैक करता है. बचाव के लिए कार्बेंडाजिम या ट्राइकोडर्मा का छिड़काव कर सकते हैं. पाउडरी मिल्डयू रोग लगने पर सरसों के पौधे की पत्तियों, तनों और फूलों पर सफेद धूल जैसी परत जम जाती है. फरवरी से मार्च के बीच मध्यम तापमान और अधिक आर्द्रता होने के कारण प्रकोप बढ़ने लगता है. ट्रायडाइमेफॉन का छिड़काव कर सकते हैं. रोग के लक्षण दिखने पर 15 दिनों के अंतराल पर 2-3 बार छिड़काव करें जिससे पाउडरी मिल्डयू का प्रकोप कम हो जाता है. यदि समय रहते इनका प्रबंधन न किया जाए, तो फसल की पैदावार में 30 से 60 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आ सकती है. ये रोग न केवल दाने के आकार को छोटा करते हैं, बल्कि तेल की मात्रा और गुणवत्ता को भी बुरी तरह प्रभावित करते हैं. सरसों की फसल को इन रोगों से बचाने के लिए किसानों को सतर्क रहना चाहिए. किसानों को सरसों की बुवाई करते समय बीज उपचार कर लेना चाहिए.First Published :February 04, 2026, 15:33 ISThomeagricultureपत्तियां सूख जाएंगी, पौधे काले…फरवरी का महीना सरसों के लिए घातक, जानें बचाव

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