Uttar Pradesh

Ajab Gajab: यूपी में एक ऐसा भी गांव, जहां हर घर में कब्र, खौफ में कटती हैं लोगों की रातें

Last Updated:February 03, 2026, 09:55 ISTAgra News: इंसान की जब मृत्यु हो जाती है तो उस व्यक्ति का उसके धर्म के हिसाब से क्रिया कर्म किया जाता है. किसी धर्म में जलाने का प्रवाधान है तो कहीं दफनाने का. वहीं अगर हम आपसे कहें कि किसी मरे हुए को दफनाने के बाद लोग उसी कब्र के पास रहते हैं वो भी अपने पूरे परिवार के साथ तो शायद आपको यकीन न हो, लेकिन ऐसा सच में होता है. यूपी के एक गांव के लोग कब्र के साथ रहने को मजबूर हैं.घर के अंदर कब्र.आगरा: हर धर्म की अपनी रीति रिवाज हैं. कहीं जलने के बाद लोगों को जलाया जाता है तो कहीं शव को दफनाया जाता है. मगर, सोचिए कुछ लोगों को कब्र के साथ ही रहना पड़ जाए तो कैसा लगेगा. यूपी के आगरा के एक गांव से ऐसा ही अजब गजब मामला सामने आया है. यहां लगभग हर घर में कब्र बनी है. कब्र के सामने ही चूल्हा जलता है, खाना बनता है. हम बात कर रहे हैं आगरा से 30 किलोमीटर दूर स्थित छोटा सा गांव छह पोखर की है. बाहर से देखने पर यह गांव किसी भी सामान्य गांव जैसा ही लगता है, लेकिन जैसे ही आप इसकी गलियों में कदम रखते हैं, यहां की हकीकत आपको भीतर तक झकझोर देती है. इस गांव में कुछ घर ऐसे हैं, जहां जिंदगी और मौत एक ही छत के नीचे साथ रहती हैं.

किरावली तहसील के अछनेरा में स्थित छह पोखर गांव में करीब 15 मुस्लिम परिवार रहते हैं. इन सभी के घरों में एक नहीं, बल्कि किसी अपने की कब्र मौजूद है. यह कोई परंपरा या रिवाज नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही मजबूरी है. न्यूज 18 की टीम जब गांव पहुंची, तो हर घर से एक ही दर्द भरी कहानी सामने आई. ग्रामीणों ने कहा कि कब्रिस्तान न होने की वजह से लोगों को अपनों को अपने ही घर में दफनाना पड़ रहा है. उनके घर में उनकी पत्नी और मासूम बच्ची की कब्र है.

बात करते हुए ग्रामीणों की आंखें भर आती हैं. वे कहते हैं, जब दफनाने की जगह ही नहीं थी, तो इंसान क्या करे? यहां लगभग हर मुस्लिम घर में मौत की एक खामोश निशानी मौजूद है. हम लोग जमीन के मालिक नहीं हैं. गांव में मुस्लिमों का कोई कब्रिस्तान नहीं है, इसलिए मजबूरी में मुर्दों को घर में ही दफनाना पड़ता है. जब न्यूज 18 की टीम उनके घर पहुंची तो देखा एक कोने में चूल्हा जल रहा था, तो ठीक बगल में कब्र बनी हुई थी. जहां बच्चे खेलते हैं, वहीं किसी मां या पिता की आखिरी आरामगाह है. रोजमर्रा की ज़िंदगी मौत की मौजूदगी के बीच चल रही है. बच्चे कब्रों के ऊपर खेल रहे थे.

अब सबसे बड़ा सवाल यह बनता है कि क्या इन गरीब मुस्लिम परिवारों को इंसान की आखिरी जरूरत, यानी 2 गज जमीन भी नसीब नहीं हो पाएगी. छह पोखर गांव आज भी इसी सवाल के साथ जी रहा है. जहां लोग ज़िंदगी अपने घरों में बिताते हैं और मौत भी उसी घर में दफन हो जाती है. किसी अपने की मौत होती है तो लोग कब्रिस्तान की जगह ओर अपने ही घर में गड्ढा खोदकर सुपुर्द ए खाक करते हैं.About the Authorकाव्‍या मिश्राKavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ेंLocation :Agra,Uttar PradeshFirst Published :February 03, 2026, 09:55 ISThomeuttar-pradeshयूपी में एक ऐसा भी गांव, जहां हर घर में कब्र, खौफ में कटती हैं लोगों की रातें

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