Uttar Pradesh

बड़का तुलापुर में बुढ़िया माई मंदिर आस्था का केंद्र

बृजेंद्र प्रताप सिंह/ प्रतापगढ़ : उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के लालगंज अझारा क्षेत्र के स्थित तुलापुर गांव एक ऐसे अनोखे मंदिर का गवाह है, जो सदियों से ग्रामीणों की आस्था का केंद्र बना हुआ है. यह मंदिर ‘बुढ़िया माई का मंदिर’ के नाम से मशहूर है. यहां गांव की कुल देवी के रूप में पूजी जाने वाली ‘बुढ़िया माई’ की पूजा बिना किसी पुजारी के होती है. यहां के ग्रामीणों का मानना है कि यह मंदिर लगभग 300 साल पुराना है और यहां की पूजा में कोई मध्यस्थ भी नहीं होता है. यहां सीधे भक्त अपनी मनोकामना लेकर मां के सामने बैठ जाते हैं. इस मंदिर का पुननिर्माण कार्य गांव के रजवंत सिहं उर्फ रिंकू सिंह, अनंत पाल सिंह, धर्मेंद्र सिंह उर्फ सुग्गू, प्रभात सिंह ( विपिन सिंह ) समेत अन्य ग्रामीणों के सहयोग से किया जा रहा है. आइये जानते हैं इस मंदिर के बारे में.

बुढ़िया माई हर भक्त की मनोकामना करती हैं पूरी

जिले के मुल्तानीपुर ग्राम पंचायत के गांव तुलापुर निवासी सबसे बुजुर्ग 90 वर्षीय रामलखन सिहं बताते हैं, ‘हमारे पूर्वजों के समय से बुढ़िया माई’ का मंदिर गांव में है. ‘बुढ़िया माई’ को गांव की कुल देवी के रुप में माना जाता है. पहले यहां छोटा-सा मिट्टी का मंदिर था, लेकिन समय के साथ ग्रामीणों ने मिलकर इसे पक्का बनवाया. इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां कोई पुजारी नहीं हैं. यहां कोई भी भक्त सुबह-शाम आकर स्वयं फूल चढ़ाता है, अगरबत्ती-धूप जलाता है. इसके साथ ही मनोकामना के लिए पूजा-पाठ करता है. मान्यता है कि बुढ़िया माई की पूजा सच्चे मन से की जाए तो मनोकामना पूरी होने में देर नहीं लगती है.’

मंदिर में पूजा-पाठ करते ग्रामीण

बुढ़िया माई के नाम से होता है विशाल भंडारे का आयोजन

वहीं, गांव की महिलाएं रेखा सिंह, सरिता सिंह बताती हैं कि विवाह, संतान प्राप्ति, नौकरी, बीमारी से मुक्ति जैसी कई मनोकामनाएं भी यहां पूरी हुई हैं. यहां गांव की महिलाओं द्वारा नवरात्रि में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. इसके लिए यहां पर तरह-तरह का पकवान भी चढ़ाया जाता है. साथ ही साथ समय-समय पर गांव की महिलाएं दुर-दुरिया का भी पूजा करवाती हैं. इसके अलावा गांव के ही पुलिस विभाग में तैनात प्रशांत सिंह, उदय प्रताप सिंह, रिंकू सिंह, शिवदीप सिंह, अमरीश सिंह, सुनील सिंह उर्फ भोलू , ललित कुमार, आशू सिंह समेत अन्य ग्रामीणों के सहयोग से विशाल भंडारे का भी आयोजन किया जाता है. जहां सैकड़ों ग्रामीण भंडारे में शामिल होते हैं.

मंदिर के पुननिर्माण के पहले एकत्र हुए ग्रामीण

बुढ़िया माई के मंदिर की है अनोखी मान्यता

तुलापुर गांव के इस मंदिर से जुड़ी एक और रोचक बात यह है कि यहां सभी ग्रामीणों द्वारा एकजुटता से सभी कार्य किए जाते हैं. आज के दौर में जहां बड़े-बड़े मंदिरों में भीड़ और पुजारियों की लाइन लगती है. वहां बुढ़िया माई का यह मंदिर सादगी, विश्वास और सीधी भक्ति का जीवंत उदाहरण है. यहां के ग्रामीणों में कमलेश सिंह, राजेश सिंह उर्फ मोछा, बलवंत सिंह उर्फ लौकेश, उमेश सिंह, अरविंद सिंह उर्फ राजाबाबू, वैभव सिंह, अभय प्रताप सिंह उर्फ मुन्ना, प्रवीण सिंह समेत ग्रामीणों का कहना है कि ‘मां बुढ़िया माई सबकी सुनती हैं, बस दिल से पुकारो. यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है. बल्कि ग्रामीण संस्कृति और परंपरा का जीता-जागता प्रमाण भी है.

बुढ़िया माई का बन रहा भव्य मंदिर

बता दें कि इस मंदिर का पुननिर्माण कार्य एक बार फिर से 1 फरवरी 2026 से किया जा रहा है. जहां सभी ग्रामीणों के सहयोग से इसे भव्य बनाने की तैयारी है. इस मंदिर के निर्माण में सभी ग्रामीण अपने-अपने स्तर से सहयोग कर रहे हैं. जहां इसे धीरे-धीरे भव्य मंदिर बनाने की तैयारी है. इस मंदिर के निर्माण में सहयोग के रूप में भानु प्रताप सिंह साईं, अशोक कुमार सिंह, राम सिंह, रामचंदर सिंह, देवेंद्र बहादुर सिंह, नरेंद्र बहादुर सिंह गौतम, विजय बहादुर सिंह, भुवाल सिंह, भोला ठाकुर, मंजू सिंह, अनूप सिंह, दिनेश सिंह, सत्येंद्र प्रताप सिंह बादल,  संतोष सिंह, सचिन, श्रीलाल रजक, चुगुड्डी काका, प्रदीप सिंह, गौरव सिंह, अर्जुन सिंह, शिवा सिंह अधिवक्ता समेत अन्य ग्रामीणों के सहयोग राशि प्रदान की है, जिसकी मदद से मंदिर को भव्य रूप दिया जा रहा है.

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