Last Updated:February 01, 2026, 22:27 ISTBareilly News: चर्म रोग का निवारण ऐसी अटूट मान्यता है. कि इस कुंड में स्नान करने से एलर्जी, दाने, और सभी प्रकार के चर्म रोग ठीक हो जाते हैं. मंदिर का इतिहास बताता है. कि अवध के नवाब शुजाउद्दौला की बेगम की मनोकामना यहाँ पूरी हुई थी. जिसके बाद नवाब ने इस सरोवर की कच्ची सीढ़ियों को पक्का करवाया था.ख़बरें फटाफटबरेली. धोपेश्वर नाथ मंदिर एक अत्यंत प्राचीन और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है. यह मंदिर लगभग 5,000 वर्ष पुराना माना जाता है, जिसका इतिहास द्वापर युग और महाभारत काल से जुड़ा है. माना जाता है कि यहाँ त्रेतायुग में अत्रि ऋषि के शिष्य धूम्र ऋषि (जो पांडवों के गुरु थे) ने कठिन तपस्या की थी. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और ऋषि की इच्छा अनुसार यहां शिवलिंग के रूप में प्रतिष्ठित हो गए.
धोपेश्वर नाथ मंदिर का कुंड विशेष महत्व रखता है और इसे रोगों के उपचार में अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है. मंदिर परिसर में स्थित पवित्र सरोवर/कुंड अपनी औषधीय और आध्यात्मिक शक्ति के लिए प्रसिद्ध है. ऐसा माना जाता है कि इस कुंड में स्नान करने से चर्म रोग, एलर्जी, दाने और अन्य सभी प्रकार के चर्म रोग ठीक हो जाते हैं. मंदिर का इतिहास बताता है कि अवध के नवाब शुजाउद्दौला की बेगम की मनोकामना यहां पूरी हुई थी. इसके बाद नवाब ने इस सरोवर की कच्ची सीढ़ियों को पक्का करवाया था.
नियमित शिव चालीसा का पाठ करने से मनोकामनाएं होती है पूरी
मंदिर के मुख्य पुजारी के अनुसार, यहां नियमित शिव चालीसा का पाठ करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. एक विशेष मान्यता यह है कि चालीसा का फल तब पूर्ण होता है जब चालीसा के अंतिम सोमवार को भक्त क्यारा स्थित गोपालासिद्ध बाबा के मंदिर में भी पूजन करें. धोपेश्वर नाथ मंदिर को ‘स्वयं सिद्ध पीठ’ माना जाता है. यहां केवल शिव मंत्रों के उच्चारण मात्र से ही पापों का नाश होता है और मानसिक शांति का अनुभव होता है. इस मंदिर में भक्त भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर सकते हैं. इसके अतिरिक्त, जम्मू में बनी मां वैष्णो देवी की गुफा भी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का महत्वपूर्ण केंद्र बनी रहती है.
धोपेश्वर नाथ मंदिर को शहर के अन्य 6 पौराणिक नाथ मंदिरों से जोड़ने के लिए नाथ कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है. मंदिर परिसर में भक्तों और विद्यार्थियों के लिए लाइब्रेरी का निर्माण भी किया जा रहा है, जो ज्ञान केंद्र के रूप में कार्य करेगी. इसके साथ ही मंदिर की सौंदर्यकरण योजना के तहत रास्तों का चौड़ीकरण, प्रकाश व्यवस्था (दिव्य लाइटिंग) और यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार कार्य 2026 तक प्रगति पर है.About the AuthorMonali PaulHello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ेंLocation :Bareilly,Uttar PradeshFirst Published :February 01, 2026, 22:27 ISThomeuttar-pradeshबरेली का 5000 साल पुराना धोपेश्वर नाथ मंदिर, शिव की पवित्र शक्ति का केंद्र

