चंदौली: केंद्र सरकार द्वारा आम बजट पेश किया गया, जिसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रिकॉर्ड 9वीं बार प्रस्तुत किया. इस बजट में जहां किसानों, बुनियादी ढांचे और कुछ जरूरी वस्तुओं को लेकर राहत की बातें सामने आईं, वहीं शराब को लेकर एक अहम फैसला भी लिया गया है. बजट में संकेत दिया गया है कि शराब पर टैक्स बढ़ाया जाएगा, जिससे आने वाले समय में शराब के दाम बढ़ना तय माना जा रहा है. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि बढ़े हुए दाम कब से लागू होंगे और सरकारी ठेकों पर नई दरें कब तक दिखने लगेंगी, लेकिन इस घोषणा ने आम लोगों से लेकर कारोबारियों तक के बीच चर्चा तेज कर दी है.
यूपी में शराब की होती है ज्यादा बिक्री
दरअसल, यूपी में जहां शराब की बिक्री बड़े पैमाने पर होती है और इससे सरकार को भारी राजस्व मिलता है, इस फैसले का असर कई स्तरों पर देखने को मिल सकता है. खासतौर पर चंदौली जैसे जिले, जो बिहार बॉर्डर से सटे हैं. बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद से बड़ी संख्या में लोग शराब खरीदने के लिए उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में आते हैं, ऐसे में दाम बढ़ने का सीधा असर न सिर्फ स्थानीय उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, बल्कि बाहर से आने वाले ग्राहकों पर भी होगा.
ग्राहकों की संख्या में आएगी कमी
शराब कारोबार से जुड़े पीयूष जायसवाल ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि अभी जो जानकारी उन्हें मिली है, उसके अनुसार क्वार्टर पर लगभग 10 से 15 रुपये और कुछ ब्रांड्स में 50 से 100 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि यह अभी अनुमान है, क्योंकि आधिकारिक तौर पर नई दरों की सूची सामने नहीं आई है.
पीयूष ने कहा कि अगर यह बढ़ोतरी लागू होती है, तो खासकर बिहार से आने वाले ग्राहकों की संख्या में कमी आ सकती है. लोग पहले ही लंबी दूरी तय कर पेट्रोल खर्च करके आते हैं, ऐसे में शराब महंगी मिलने पर वे आने से कतराएंगे. पीयूष ने कहा कि अगले महीने होली भी है, उस समय अधिक बिक्री होती है, तो उसपर भी इसका असर पड़ेगा.
शराब छोड़ने को मजबूर होंगे लोग
आलोक दुबे ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि सरकार ने बजट में किसानों को लेकर कुछ सकारात्मक कदम उठाए हैं, लेकिन किसान सम्मान निधि में और बढ़ोतरी की उम्मीद थी. वहीं शराब के दाम बढ़ाने का फैसला एक बड़ा वर्ग सीधे तौर पर महसूस करेगा. उन्होंने बताया कि प्रदेश में ऐसे बहुत से लोग हैं, जो नियमित, साप्ताहिक या कभी-कभार शराब पीते हैं. दाम बढ़ने पर निम्न और मध्यम वर्ग के लोग या तो शराब कम करेंगे या पूरी तरह छोड़ने को मजबूर होंगे.
टैक्स कलेक्शन पर भी पड़ेगा असर
आगे आलोक ने बताया कि बिहार में शराबबंदी के बाद वहां की महिलाओं में खुशी देखी गई है, क्योंकि घरेलू खर्च में सुधार हुआ है और शराब पर होने वाला पैसा बचने लगा है, लेकिन उत्तर प्रदेश में अभी ऐसी कोई नीति नहीं है. यहां शराब बिक्री से मिलने वाला टैक्स राज्य की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा है. कोरोना काल में तो सोशल मीडिया पर यह तक कहा जाने लगा था कि शराब की बिक्री ही अर्थव्यवस्था को संभाले हुए है, ऐसे में अगर दाम बढ़ते हैं और बिक्री घटती है, तो सरकार के टैक्स कलेक्शन पर भी असर पड़ सकता है.
छोटे दुकानदारों पर भी पड़ेगा असर
दुकानदार संजय ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि सरकार को इस मुद्दे पर स्पष्ट नीति अपनानी चाहिए या तो शराब पर दाम बढ़ाने की बजाय इसे कम कर दिया जाए या फिर अगर सामाजिक सुधार के लिए फैसला लेना है, तो पूरे देश में एकसमान नीति लागू की जाए. केवल कुछ राज्यों में बिक्री और कुछ में पूरी तरह प्रतिबंध से दिक्कत बढ़ती है. वहीं, संजय ने कहा कि अगर दाम ज्यादा बढ़े तो सबसे पहले असर छोटे दुकानदारों पर पड़ेगा. बिहार से आने वाले ग्राहक कम हो जाएंगे, जिससे बिक्री घटेगी और हम लोगों का रोजगार खतरे में पड़ जाएगा. उसने कहा कि सरकार या तो दाम यही रखे या फिर शराब पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाए, ताकि किसी को कोई परेशानी न हो.

