Uttar Pradesh

Ramdana Firming : न खाद, न सिंचाई…बिना देखभाल वाली ये खेती वरदान, प्रति किलो कीमत गेहूं-धान से 5 गुना ज्यादा

Last Updated:February 01, 2026, 04:04 ISTRamdana Cultivation Benefits : बलिया के रहने वाले किसान ने बतौर प्रयोग अपने खेत में सिर्फ मुट्ठी भर रामदाने का बीज छिड़का था. बिना खाद, उर्वरक और सिंचाई नतीजा देखकर वे खुद हैरान रह गए. पौधे न सिर्फ तेजी से उगे, बल्कि भरपूर फल भी देकर गए. आलू के साथ-साथ उसी खेत में इसे आसानी से उगाया जा सकता है. अलग से भी रामदाना की खेती कर सकते हैं. रामदाना को व्रत और प्रसाद में शुद्ध अन्न के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है.बलिया. रामदाना की खेती किसानों के लिए वरदान बन सकती है. बलिया के एक किसान ने इसे सच कर दिखाया है. हनुमानगंज ब्लॉक अंतर्गत पटखौली गांव निवासी इस किसान ने इसकी खेती को आजमाकर दूसरे किसानों के लिए भी रास्ता खोल दिया है. किसान नवीन कुमार राय उर्फ चुन्ना राय इसके फायदों पर मोहित हैं. वे कहते हैं कि रामदाना की ये खेती न केवल हरियाली बढ़ा रही है, बल्कि भारतीय खान-पान और किसान की उम्मीदों को भी नई ताकत दे रही है. उन्होंने शोध के उद्देश्य से अपने खेत में सिर्फ मुट्ठी भर रामदाना का बीज छिड़का था. बगैर खाद, उर्वरक और सिंचाई नतीजा देखकर वे खुद हैरान रह गए. पौधा न सिर्फ तेजी से उगा, बल्कि भरपूर फल देकर पूरे खेत में अपनी मौजूदगी दर्ज करा दी. रामदाना जिसे फलाहारी में गिना जाता हैं, जो व्रत और प्रसाद में शुद्ध अन्न के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, कभी भारतीय भोजन का अहम हिस्सा हुआ करता था.

आय का मजबूत जरिया

पुराने समय में लोग इसी तरह के मोटे अनाज खाकर ताकतवर और स्वस्थ जीवन जीते थे. किसान नवीन कुमार बताते हैं कि रामदाना आज भी उतना ही पोषक और शक्तिवर्धक है, जितना पहले था. बस हमने इसे अपनी थाली से बाहर कर दिया है, जिसको शामिल करने समय अब आ गया है. आजमाने के तौर पर की गई इस छोटी सी खेती से उत्साहित होकर किसान ने तय किया है कि अगले वर्ष बड़े पैमाने पर रामदाना की खेती की जाएगी, ताकि इसे आय का मजबूत जरिया बनाया जा सके.

कितने रुपये किलो

रामदाना की खेती में लागत कुछ भी नहीं है. केवल बीज लेकर खेत में छिड़काव कर दिया जाए, तो यह अपने आप पनपने लगता है. आलू की बुवाई के साथ-साथ इसकी खेती आसानी से की जा सकती है. अलग से भी रामदाना की खेती की जाती है. बाजार में रामदाना ₹100 प्रति किलो के भाव से बिक रहा है, जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा मिल सकता है. यह न केवल आर्थिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि सेहत के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है.About the AuthorPriyanshu GuptaPriyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ेंLocation :Ballia,Uttar PradeshFirst Published :February 01, 2026, 04:04 ISThomeagricultureन खाद, न सिंचाई…बिना देखभाल वाली ये खेती, कीमत गेहूं-धान से 5 गुना ज्यादा

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