Uttar Pradesh

यूजीसी गाइडलाइन पर रोक से युवा बोले– अब सभी वर्गों को मिलेगा न्याय, शिक्षण संस्थानों में नहीं चाहिए बंटवारा

Last Updated:January 31, 2026, 14:47 ISTMeerut News: यूजीसी की नई गाइडलाइन के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने अगले आदेश तक गाइडलाइन पर रोक लगाते हुए वर्ष 2012 की व्यवस्थाओं को ही शिक्षण संस्थानों में लागू रखने के निर्देश दिए हैं. इस फैसले के बाद देशभर में खुशी का माहौल है. लोकल-18 से बातचीत में युवाओं ने इसे समाज को जोड़ने वाला और शिक्षा के हित में लिया गया निर्णय बताया है.ख़बरें फटाफटमेरठ. यूजीसी द्वारा जारी की गई गाइडलाइन के खिलाफ जो याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थी, उस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए बड़ा निर्णय दिया है. इसमें अगले आदेश तक सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी की गाइडलाइन पर रोक लगाते हुए वर्ष 2012 वाली व्यवस्थाओं को ही शिक्षण संस्थानों में संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं. इस फैसले को लेकर अब देशभर में जश्न का माहौल देखने को मिल रहा है, इन्हीं बातों को देखते हुए लोकल-18 की टीम द्वारा भी युवाओं से खास बातचीत की गई.

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय स्वागत योग्य

लोकल-18 की टीम से खास बातचीत करते हुए अनंतदेव कौशिक ने कहा कि जिस तरह सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए इस गाइडलाइन पर रोक लगाई है, वह स्वागत योग्य है, क्योंकि जब से यह गाइडलाइन जारी हुई थी, तब से ही देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे, जो कहीं न कहीं समाज के लिए काफी घातक साबित हो रहे थे. ऐसे में निष्पक्ष तरीके से नई गाइडलाइन जारी की जानी चाहिए, जिससे सभी वर्ग के लोगों को न्याय मिल सके. क्योंकि गलत मानसिकता वाला व्यक्ति किसी भी समुदाय से हो सकता है.

जमीनी स्तर का हो आंकलन

रोशन सिरोही ने कहा कि जिस तरीके से यह निर्णय लिया गया था, वह समाज को बांटने वाला था. ऐसे में किसी भी निर्णय को लेने से पहले सरकार को सभी वर्ग के लोगों का विश्वास लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर जमीनी स्तर की बात करें तो हॉस्टल और विश्वविद्यालयों में सभी वर्ग के लोग मिलकर ही रहते हैं. लेकिन इस निर्णय के बाद कहीं न कहीं एक खाई उत्पन्न हो रही थी, जो भविष्य के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकती थी. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिया गया यह निर्णय भारत के बेहतर भविष्य के लिए एक अच्छी पहल है. अब सरकार को भी समानता का आंकलन करने के पश्चात ही नई गाइडलाइन जारी करनी चाहिए.

शिक्षण संस्थानों को लेकर न हो राजनीति

युवा शिवम का कहना है कि जिस तरीके से शिक्षण संस्थानों को लेकर राजनीति शुरू हुई है, वह देश के लिए सही नहीं है, क्योंकि शिक्षण संस्थानों में ही भारत का भविष्य शिक्षा हासिल करता है. अगर शिक्षण संस्थानों में ही इस तरीके से डिवाइड एंड रूल के तहत नियम बनाए जाएंगे, तो यह एक सभ्य समाज के लिए सही नहीं है. इसी तरह अविनाश भी कहते हैं कि नियम ऐसे बनाए जाने चाहिए, जिनमें गलत भावना रखने वाले लोगों पर कार्रवाई हो, न कि किसी समुदाय के प्रति घृणा फैलाई जाए. बताते चलें कि मेरठ में सभी वर्ग के लोग इस निर्णय का स्वागत कर रहे हैं. उनका कहना है कि जब सब मिलकर आगे बढ़ेंगे, तभी देश तरक्की कर सकता है.About the AuthorMonali PaulHello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ेंLocation :Meerut,Uttar PradeshFirst Published :January 31, 2026, 14:47 ISThomeuttar-pradeshसुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी गाइडलाइन रोकी, मेरठ में युवाओं ने फैसले का किया स्वागत

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