Uttar Pradesh

Magh Mela 2026: संगम में उमड़ा आस्था का सैलाब, टूटे भीड़ के सारे रिकॉर्ड, चप्पे-चप्पे पर कमांडो तैनात, AI कैमरों से रखी जा रही नजर

Prayagraj Magh Mela 2026: संगम की रेती पर अध्यात्म और आस्था का महापर्व ‘माघ मेला 2026’ अब अपने चरमोत्कर्ष की ओर है. चार प्रमुख स्नान पर्वों के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद, अब पांचवें बड़े स्नान पर्व माघी पूर्णिमा को लेकर संगम तट पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा ‘मिनी कुंभ’ के रूप में आयोजित इस मेले ने भीड़ के पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं.

15 करोड़ का अनुमान था, पहुंचे 18 करोड़ श्रद्धालुइस वर्ष माघ मेले ने अपनी लोकप्रियता और श्रद्धालुओं की श्रद्धा के मामले में नया इतिहास रचा है. प्रशासन ने शुरुआती अनुमान में पूरे मेला सत्र के दौरान 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद जताई थी. लेकिन आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 18 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में पुण्य की डुबकी लगा चुके हैं.

अकेले माघी पूर्णिमा के अवसर पर प्रशासन को 1 से 1.5 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है. इसे देखते हुए संगम तट पर बने 3.5 किलोमीटर लंबे स्नान घाटों को विशेष रूप से दुरुस्त किया गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके.

सुरक्षा का अभेद्य किला: AI कैमरों और ड्रोन से निगरानीमेला क्षेत्र की सुरक्षा के लिए पुलिस प्रशासन ने ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई है. सुरक्षा व्यवस्था को निम्नलिखित श्रेणियों में बांटा गया है:

तकनीकी निगरानी: पहली बार भीड़ नियंत्रण के लिए AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) युक्त कैमरों का उपयोग किया जा रहा है. पूरे क्षेत्र पर ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी से पैनी नजर रखी जा रही है.
सुरक्षा बल: सुरक्षा के लिए यूपी एटीएस (ATS) के कमांडो, आरएएफ (RAF), पीएसी (PAC) और खुफिया एजेंसियों को तैनात किया गया है.
जल सुरक्षा: स्नान घाटों पर किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जल पुलिस, एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) और गोताखोरों की टीमें 24 घंटे मुस्तैद हैं.

ट्रैफिक प्लान और वीआईपी प्रोटोकॉल पर पाबंदीश्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए यातायात व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए हैं.

नो वीआईपी मूवमेंट: मेला प्राधिकरण ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रमुख स्नान पर्वों की तरह माघी पूर्णिमा पर भी कोई वीआईपी प्रोटोकॉल लागू नहीं होगा, ताकि आम श्रद्धालुओं को परेशानी न हो.रूट डायवर्जन: रात 12 बजे से ही मेला क्षेत्र में भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है.वन-वे ट्रैफिक: कल्पवासियों की वापसी और नए श्रद्धालुओं के आगमन के लिए एकल दिशा मार्ग (One-way) बनाए गए हैं.

कल्पवास की पूर्णाहुति और समापन की ओर मेलामाघी पूर्णिमा का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसी दिन से एक माह का कठिन ‘कल्पवास’ समाप्त होता है. अधिकांश साधु-संत और कल्पवासी इसी दिन स्नान के बाद अपने घरों की ओर प्रस्थान करते हैं. हालांकि, कुछ कल्पवासी तीन दिन बाद होने वाले ‘त्रिजटा स्नान’ के बाद विदा लेंगे. बता दें कि माघ मेले का विधिवत समापन 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के अंतिम स्नान के साथ होगा. तब तक मेला क्षेत्र में कुछ प्रमुख संस्थाएं और साधु-संत रुके रहेंगे.

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