Last Updated:January 30, 2026, 17:20 ISTWheat crop protect rust disease : गेहूं की फसल दाने बनने के चरण में पहुंच चुकी है. इस वक्त इसे अधिक देखभाल की जरूरत पड़ती है. कुछ दिन में रस्ट (गेरूई रोग) का खतरा दिखने लगेगा. ये पैदावार को कम कर सकता है. लोकल 18 ने इससे बचाव के तरीके जानने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र नियामतपुर में तैनात एक्सपर्ट डॉ. हादी हुसैन खान के पास पहुंचा. डॉ. हादी बताते हैं कि किसान सफेद धोती पहनकर खेत में घूमें. अगर कपड़ों पर पीला या भूरा पाउडर लगे, तो ये फसल के संक्रमित होने का संकेत है. इस रोग का समय रहते पहचान करना सबसे जरूरी है.
शाहजहांपुर. देश के कई हिस्सों में गेहूं की फसल अब अपने महत्त्वपूर्ण चरण में है. लेकिन बदलते मौसम के साथ ‘रस्ट’ यानी गेरूई रोग का खतरा बढ़ गया है, जो किसानों के लिए चिंता का विषय है. इस रोग में पीली, भूरी या काली गेरूई फसल की पत्तियों को सुखाकर दानों को हल्का और खोखला कर देती है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस रोग की पहचान के लिए आप सफेद धोती पहन कर खेत में जाएं. यदि खेत में चलने पर धोती पर पीला या भूरा पाउडर लगने लगे, तो समझ लें कि संक्रमण फैल चुका है. सही समय पर फंगीसाइड का छिड़काव न केवल फसल को बचा सकता है, बल्कि आपकी मेहनत की कमाई को भी सुरक्षित रख सकता है.
फफूंद जनित
कृषि विज्ञान केंद्र नियामतपुर में तैनात कृषि एक्सपर्ट डॉ. हादी हुसैन खान बताते हैं कि गेहूं में रस्ट एक फफूंद जनित रोग है, जो सीधे प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की प्रक्रिया को बाधित करता है. इस रोग में पत्तियां संक्रमित हो जाती हैं, तो पौधे का भोजन बनाने का कारखाना बंद हो जाता है, जिससे दाने सिकुड़ जाते हैं. किसान इसकी पहचान कपड़ों के रंग परीक्षण से आसानी से कर सकते हैं. काली और भूरी गेरूई के लिए मैनकोजेब या कार्बेंडाजिम का 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव काफी प्रभावी रहता है. पीली गेरूई अधिक खतरनाक होती है, जिसके नियंत्रण के लिए प्रोपिकोनाजोल 0.5 ml प्रति लीटर का इस्तेमाल सबसे सटीक समाधान है.
दिखते ही करें ये काम
गेहूं में रस्ट की रोकथाम के लिए सबसे पहला कदम नियमित निगरानी है. यदि खेत में ‘पाउडर’ जैसा संक्रमण दिखे, तो तुरंत उपचार शुरू करें. काली और भूरी गेरूई (Black & Brown Rust) के नियंत्रण के लिए मैनकोजेब, जिनेब या ‘साफ’ (SAAF) जैसे फंगीसाइड का 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से स्प्रे करें. यदि फसल में पीली गेरूई (Yellow Rust) के लक्षण दिखाई दें, तो प्रोपिकोनाजोल का प्रयोग करें. ध्यान रहे कि स्प्रे करते समय पत्तियों का ऊपरी और निचला हिस्सा अच्छी तरह भीग जाए. उचित नमी बनाए रखने और संतुलित नाइट्रोजन के प्रयोग से भी रोग के प्रसार को कम किया जा सकता है.About the AuthorPriyanshu GuptaPriyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ेंLocation :Shahjahanpur,Uttar PradeshFirst Published :January 30, 2026, 17:20 ISThomeagricultureपत्तियां संक्रमित, दाने छोटे…ये रोग गेहूं के लिए घातक, धोती टेस्ट से मुक्ति

