Uttar Pradesh

क्या भारत की ज़मीन में सचमुच दबा है सोने का खज़ाना? छतरपुर से उन्नाव तक की पूरी कहानी

Last Updated:January 29, 2026, 16:10 ISTChhatarpur District Treasure Found: भारत का इतिहास राजाओं, किलों और युद्धों से जुड़ा रहा है. यही वजह है कि आज भी जब कहीं खुदाई होती है या कोई दावा सामने आता है, तो लोग उम्मीद और जिज्ञासा से भर जाते हैं. छतरपुर और उन्नाव के मामले बताते हैं कि भारत में खज़ाना सिर्फ ज़मीन में नहीं, बल्कि लोगों की सोच और विश्वास में भी छिपा है. आइए जानते है दोनों मामलों से जुड़ी सच्चाई…ख़बरें फटाफटउन्नाव. भारत में खजानों की बातें अक्सर कहानियों तक सीमित होती हैं, लेकिन कभी-कभी ये हकीकत भी बन जाती हैं. हाल ही में मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के राजगढ़ गांव में लगभग 500 साल पुराना खज़ाना मिला है. वहीं, उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में 2013 में 1,000 टन सोने के खज़ाने की खोज की खबर ने भी लोगों की कल्पनाओं को उड़ान दी थी. दोनों घटनाओं ने देशभर में चर्चा का नया दौर शुरू कर दिया.

राजगढ़ का 500 साल पुराना खज़ानाछतरपुर के राजगढ़ गांव में पुरातन काल का लगभग 500 साल पुराना खज़ाना मिला. जमीन खोदने पर सोने के सिक्के और कुछ अन्य धातु की वस्तुएं भी मिलीं. जैसे ही यह खबर गांव में फैली, लोगों में खज़ाना लूटने की होड़ मच गई. इस खोज ने न केवल ग्रामीणों को हैरान किया, बल्कि इतिहास और पुरातत्व में रुचि रखने वाले विशेषज्ञ भी उत्साहित हो गए. प्रशासन ने खजाने की सुरक्षा के लिए कड़ी निगरानी रखी, ताकि कोई अवैध खुदाई या लूट न हो.

उन्नाव का 1,000 टन सोने का खज़ानाउत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में 2013 में खबर आई कि डौंडिया खेड़ा गांव में एक साधु के सपने के आधार पर 19वीं सदी के राजा के किले के नीचे 1,000 टन सोना दबा हुआ है. साधु ने दावा किया कि इसे बाहर निकालना चाहिए. 18 अक्टूबर 2013 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने खुदाई शुरू की. प्रशासन ने धारा 144 लागू की और भारी सुरक्षा तैनात की. खुदाई स्थल पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए. जैसे-जैसे खबर फैली, वहां मेले जैसा माहौल बन गया. लोग सोचने लगे कि अगर सोना निकल आया तो इसका असर अर्थव्यवस्था पर क्या होगा.पहले दिन ही खुदाई टीम ने केवल कुछ इंच मिट्टी खोदी. इसके बावजूद लोगों में उत्साह और कल्पनाएं चरम पर थी. कुछ ने कहा कि इससे महंगाई कम हो सकती है, तो कुछ लोग सोने के बाजार भावों पर अनुमान लगाने लगे.

सपना बनाम हकीकतउन्नाव के मामले में वैज्ञानिकों ने इस दावे की जांच की, लेकिन बड़े पैमाने पर कोई ठोस सबूत नहीं मिला. बाद में रिपोर्टों में भी पुष्टि हुई कि इतने बड़े खजाने के होने का कोई ठोस सबूत नहीं है. यह दिखाता है कि कभी-कभी कल्पना और लोकविश्वास वास्तविकता से आगे निकल जाते हैं.

दो अलग घटनाएं, एक संदेशराजगढ़ और उन्नाव दोनों घटनाएं अलग समय और जगह की हैं, लेकिन दोनों ने यह दिखाया कि भारत में इतिहास और लोककथाएं आज भी जिंदा हैं. छतरपुर में वास्तविक खुदाई से पुराने सिक्के और धातु की वस्तुएं मिल रही हैं. वहीं, उन्नाव में सपनों पर आधारित खोज ने यह सवाल उठाया कि क्या लोकविश्वास के आधार पर वैज्ञानिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहिए. इन दोनों घटनाओं ने लोगों में चर्चा और विवाद पैदा किया. यह दिखाता है कि भारत की मिट्टी न केवल इतिहास और संस्कृति की कहानी बताती है, बल्कि कभी-कभी सपनों और दावों की परछाइयां भी सामने लाती है.About the AuthorMadhuri Chaudharyपिछले 4 साल से मीडिया इंडस्ट्री में काम कर रही हूं और फिलहाल News18 में कार्यरत हूं. इससे पहले एक MNC में भी काम कर चुकी हूं. यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की बीट कवर करती हूं. खबरों के साथ-साथ मुझे…और पढ़ेंLocation :Unnao,Uttar PradeshFirst Published :January 29, 2026, 16:10 ISThomeuttar-pradesh500 साल पुराना ख़ज़ाना या अफ़वाह? छतरपुर की मिट्टी ने खोल दिया राज, पढ़िए कहानी

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