चंदौली: जिले के डीडीयू जंक्शन पर RPF की टीम हमेशा अलर्ट रहती है. कभी अवैध शराब का भंडाफोड़ करती है, कभी मोबाइल छीनने वाले को गिरफ्त में ले लेती है, कभी चांदी तस्करों को पकड़ लेती है, तो कभी महिलाओं की मदद करती है. अब एक बार फिर आरपीएफ को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है. आरपीएफ ने ऑपरेशन आहट के तहत 5 नाबालिग बच्चों का बचपन बचा लिया.
दरअसल, आरपीएफ डीडीयू द्वारा ऑपरेशन आहट के तहत बाल मजदूरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है. आरपीएफ डीडीयू पोस्ट के प्रभारी निरीक्षक प्रदीप कुमार रावत के नेतृत्व में यह अभियान चलाया गया, जिसमें बचपन बचाओ आंदोलन, चाइल्ड हेल्प डेस्क और सीआईबी टीम का सक्रिय सहयोग रहा.
डरे सहमे हालत में बैठे थे बच्चे
मुखबिर की सूचना के आधार पर ट्रेन संख्या 12487 सीमांचल एक्सप्रेस के डीडीयू जंक्शन के प्लेटफॉर्म संख्या 06 पर आगमन के समय जांच की गई. जांच के दौरान ट्रेन की पिछली जनरल कोच में 05 नाबालिग बच्चे डरे-सहमे अवस्था में पाए गए, जिनके साथ एक व्यक्ति संदिग्ध परिस्थितियों में मौजूद था. पूछताछ के दौरान मामला संदिग्ध प्रतीत होने पर उक्त व्यक्ति और सभी बच्चों को आगे की पूछताछ के लिए आरपीएफ डीडीयू पोस्ट लाया गया.
बिहार के रहने वाले हैं सभी बच्चे
प्राथमिक पूछताछ में बच्चों ने अपना नाम व आयु क्रमशः फरियाद (12 वर्ष), मो. नवाजिश (13 वर्ष), रहमत (14 वर्ष), अंजार (14 वर्ष), हसनैन (15 वर्ष) और एक अन्य किशोर राहुल भुइयां (17 वर्ष) बताया. सभी बच्चे जिला अररिया, बिहार के निवासी हैं. बच्चों ने बताया कि उन्हें ले जाने वाला व्यक्ति माजिद (उम्र 40 वर्ष), पुत्र स्व. नजाम, निवासी थाना महलगांव, जिला अररिया, बिहार है, जो उन्हें दिल्ली के उस्मानपुर क्षेत्र में बिंदी बनाने वाली कंपनी में काम कराने के लिए ले जा रहा था. आरोपी द्वारा बच्चों से 12 घंटे काम के बदले लगभग 10,000 रुपये मासिक देने की बात कही गई थी, जबकि बच्चों के अभिभावकों को 2,000 से 5,000 रुपये प्रति बच्चा अग्रिम दिए गए थे.
चाइल्ड हेल्प डेस्क को किया सुपुर्द
पूछताछ में आरोपी माजिद ने स्वीकार किया कि उसने सभी बच्चों का टिकट अपने खर्च पर कराया, उन्हें भोजन कराया और उनके माता-पिता को पैसे देकर दिल्ली में बाल मजदूरी के उद्देश्य से ले जा रहा था. बच्चों के परिजनों से संपर्क करने पर यह भी स्पष्ट हुआ कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि उनके बच्चों से कहां और किस प्रकार का कार्य कराया जाएगा.
मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू कर सुरक्षित रूप से चाइल्ड हेल्प डेस्क को सुपुर्द किया गया. वहीं, आरोपी माजिद को अग्रिम कानूनी कार्रवाई हेतु कोतवाली मुगलसराय को सौंप दिया गया है, जहां विधिक प्रक्रिया प्रचलित है.
इन कर्मियों की रही महत्वपूर्ण भूमिका
इस सफल अभियान में आरपीएफ के उप निरीक्षक सुनील कुमार, सहायक उप निरीक्षक राकेश कुमार सिंह, आरक्षी अशोक यादव, सीआईबी के सहायक उप निरीक्षक सतीश सिंह, आरक्षी अवधेश प्रताप पांडेय, बचपन बचाओ आंदोलन से चंदा गुप्ता, चाइल्ड हेल्प डेस्क से शब्बो कुमारी सहित अन्य कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही.

