Uttar Pradesh

Padma Shri 2026 : कालाजार की बनाई सिंगल डोज दवा, 24 घंटे में मरीज को छुट्टी, BHU के डॉ. श्याम सुंदर को पद्म श्री

Last Updated:January 25, 2026, 19:12 ISTPadma Shri Dr. Shyam Sundar : भारत सरकार ने डॉ. श्याम सुंदर अग्रवाल को पद्म सम्मन देने का फैसला किया है. डॉ. श्याम सुंदर मूलतः बिहार के मुज्जफरपुर के रहने वाले हैं. बिहार उनकी जन्मभूमि है, लेकिन कर्मभूमि काशी बनी. कभी बिहार और पूर्वांचल के कई जिले ‘कालाजार’ से जूझ रहे थे. डॉ. श्याम सुंदर ने ऐसा तरीका भी खोजा, जो इस बीमारी के इलाज में काफी काम आया. उस वक्त इसकी जांच के लिए 300 से 400 रुपये खर्च होते थे, लेकिन अब सिर्फ 50 रुपये में हो जाता है. डॉ. श्याम सुंदर ने ऐसी तकनीक इजाद की, जिससे 10 मिनट में इस रोग का पता लगाया जा सकता है.वाराणसी. साल 1980. बिहार और पूर्वांचल के कई जिले ‘कालाजार’ से जूझ रहे थे. लोग बीमारी से दम तोड़ रहे थे. उस समय बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के डॉक्टर श्याम सुंदर अग्रवाल ने मोर्चा संभाला और कालाजार जैसी खतरनाक बीमारी पर उन्होंने काम शुरू किया. करीब 4 दशक यानी 40 सालों तक लम्बी मेहनत के बाद अब इस खतरनाक बीमारी को लगभग जड़ से खत्म किया जा चुका है. समाज में उनके इस योगदान के लिए अब उन्हें पद्म श्री अवार्ड से नवाजा जा रहा है. इस अवार्ड की घोषणा के बाद प्रोफेसर श्याम सुंदर अग्रवाल के घर बधाइयों का तांता लग गया. लगातार उनके फोन बजने लगे. लोकल 18 से बातचीत में प्रोफेसर श्याम सुंदर ने बताया कि कालाजार जैसी खतरनाक बीमारी को डायग्नोज करने के लिए उन्होंने ऐसी तकनीक इजाद की, जिससे 10 मिनट में इसका पता लगाया जा सकता है. उस वक्त इस जांच के लिए 300 से 400 रुपये खर्च होते थे, लेकिन अब इस तकनीक के जरिए सिर्फ 50 रुपये खर्च होते हैं.

अगले दिन छुट्टीउन्होंने इस बीमारी से बचाव के लिए टैबलेट भी बनाई है. साल 2002 में इस दवा को भारत सरकार ने एप्रूव्ड कर दिया. इसके पहले इस बीमारी के लिए इंजेक्शन का प्रयोग होता था. इसके बाद साल 2010 में उन्होंने इस बीमारी की सिंगल डोज दवा को भी तैयार किया, जिसके बाद काफी हद तक इस बीमारी के इलाज में मदद मिली. इस सिंगल डोज दवा के बाद कालाजार जैसी बीमारी में भी मरीज शाम को हॉस्पिटल आता और 10 मिनट में उसकी जांच और फिर इस दवा को देकर अगले दिन उसे छुट्टी मिल जाती है. उनकी इस तकनीक को साल 2014 में नेपाल और बांग्लादेश में भी अपनाया गया.

हजारों मरीजों को नया जीवनडॉ. श्याम सुंदर अग्रवाल मूलतः बिहार के मुज्जफरपुर के रहने वाले हैं. वे कहते हैं कि बिहार उनकी जन्मभूमि है. कभी भी अवॉर्ड के लिए काम नहीं किया है. देश और अपनी जन्मभूमि के बारे में हमेशा सोचा है. देश-विदेश में इसके पहले भी उन्हें कई अवॉर्ड मिले हैं. अब उस कड़ी में पद्म अवॉर्ड का नाम भी जुड़ गया है. डॉ. श्याम सुंदर ने कालाजार जैसी बीमारी से ग्रसित हजारों लोगों को अब तक ठीक किया है. उनकी ये मुहिम आज भी जारी है. जब तक रहेंगे, इस काम को ऐसे ही करते रहेंगे.About the AuthorPriyanshu GuptaPriyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ेंLocation :Varanasi,Uttar PradeshFirst Published :January 25, 2026, 19:12 ISThomeuttar-pradeshकालाजार की बनाई सिंगल डोज दवा, 1 दिन में छुट्टी, BHU के डॉ. श्याम को पद्म श्री

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