नई दिल्ली (IIT Kanpur Mental Health). देश की सबसे कठिन जेईई परीक्षा की बाधा पार कर IIT कानपुर की दहलीज पर कदम रखने वाला स्टूडेंट सफलता के शिखर पर पहुंचने का सपना जीता है. लेकिन हाल ही में कैंपस के अंदर एक महीने में 2 होनहार छात्रों- पीएचडी स्कॉलर और बीटेक छात्र की आत्महत्या ने सफलता के पीछे छिपा गहरा अंधेरा उजागर कर दिया है. ये घटनाएं चीख-चीख कर कह रही हैं कि एकेडमिक योग्यता के बोझ तले कहीं न कहीं छात्रों की मानसिक शांति दम तोड़ रही है.
इसी गंभीर संकट को देखते हुए आईआईटी कानपुर ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए हर नए छात्र के लिए ‘मानसिक स्वास्थ्य जांच’ अनिवार्य कर दी है. यह पहल केवल एक नियम नहीं, बल्कि NEET, JEE और UPSC जैसी कठिन परीक्षाओं की अंतहीन रेस में दौड़ रहे लाखों युवाओं और उनके अभिभावकों के लिए एक बड़ा सबक है. यह कदम याद दिलाता है कि एक डॉक्टर, इंजीनियर या अफसर बनने से कहीं ज्यादा जरूरी छात्र का मानसिक रूप से सुरक्षित और स्वस्थ होना है.
आईआईटी कानपुर का अनिवार्य मेंटल हेल्थ चेकअप
आईआईटी कानपुर ने कैंपस में बढ़ते तनाव और हालिया आत्महत्या की घटनाओं के बाद अपने नियमों में बड़ा बदलाव किया है. अब संस्थान में आने वाले सभी नए स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) छात्रों के लिए पहले ही हफ्ते में मानसिक स्वास्थ्य जांच कराना अनिवार्य कर दिया गया है. संस्थान का मानना है कि इस स्क्रीनिंग के जरिए उन छात्रों की पहचान समय रहते की जा सकेगी जो किसी भी प्रकार के मानसिक दबाव या जोखिम में हैं.
दो दर्दनाक घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
यह निर्णय हाल ही में हुई दो दुखद घटनाओं के बाद लिया गया है. 29 दिसंबर 2025 को बीटेक अंतिम वर्ष के छात्र जय सिंह मीणा और उसके कुछ ही दिनों बाद पीएचडी छात्र रामस्वरूप ईशराम की आत्महत्या ने आईआईटी कानपुर के सुरक्षा इंतजामों और काउंसलिंग सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए थे. इन घटनाओं के बाद न केवल छात्रों में रोष था, बल्कि शिक्षा मंत्रालय ने भी तीन सदस्यीय समिति गठित कर संस्थान से जल्द से जल्द जवाब मांगा था.
स्क्रीनिंग और विशेषज्ञों की बड़ी टीम
आईआईटी कानपुर ने अपनी ‘सेंटर फॉर मेंटल हेल्थ एंड वेलबीइंग’ (CMHW) टीम का विस्तार किया है. अब यहां 10 फुल टाइम प्रोफेशनल मनोवैज्ञानिक और 3 मनोचिकित्सक तैनात हैं. अनिवार्य स्क्रीनिंग के दौरान जिन छात्रों में मध्यम या गंभीर जोखिम (Moderate or Severe Risk) के लक्षण पाए जाएंगे, उनसे काउंसलर खुद संपर्क करेंगे. जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत मनोचिकित्सकीय सहायता और निरंतर देखभाल (Continuity of Care) प्रदान की जाएगी.
चौबीसों घंटे उपलब्ध होगी सहायता
IIT कानपुर ने कैंपस में 24×7 इमरजेंसी मेंटल हेल्थ सपोर्ट सिस्टम भी लागू किया है. इसके तहत संस्थान के स्वास्थ्य केंद्र और मेंटल हेल्थ सेंटर के बीच सीधा कोऑर्डिनेशन रहेगा. संकट की स्थिति में छात्र किसी भी समय मदद मांग सकते हैं. इसके अलावा, संस्थान केवल छात्रों ही नहीं, बल्कि सुरक्षाकर्मियों, मेस स्टाफ, लाइब्रेरी कर्मचारियों और सफाईकर्मियों को भी प्रशिक्षित कर रहा है. इससे वे छात्रों के व्यवहार में बदलाव या तनाव के संकेतों को पहचान सकेंगे.
प्रतियोगी परीक्षाओं के दौर में मिसाल
यह कदम उनके लिए भी महत्वपूर्ण है जो नीट, जेईई और यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं. कोचिंग के दौरान और फिर बड़े संस्थानों में जाने के बाद छात्र ‘बर्नआउट’ और ‘परफॉर्मेंस प्रेशर’ का शिकार हो जाते हैं. IIT कानपुर की अनिवार्य जांच प्रणाली भविष्य में ऐसा मॉडल बन सकती है, जिसे अन्य IIT और प्रतियोगी परीक्षाओं के कोचिंग संस्थानों को भी अपनाना चाहिए. संस्थान अब कैंपस में ‘वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे’ और ‘रन फेस्ट’ जैसे आयोजनों के जरिए मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करने की संस्कृति को बढ़ावा दे रहा है.

