Uttar Pradesh

कम लागत में तगड़ा मुनाफा चाहिए? तो अपनाएं ये खास फिश फार्मिंग तकनीक, बत्तख-मछली-सब्जी एक साथ, कमाई होगी तिगुनी

Last Updated:January 24, 2026, 14:57 ISTProfitable Fish Farming: मछली पालन किसानों के लिए तेजी से लाभ देने वाला व्यवसाय बनता जा रहा है. कम लागत और उच्च उत्पादन के कारण यह न केवल आमदनी बढ़ाता है, बल्कि प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत भी है. विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में जलीय संसाधनों का सही इस्तेमाल भविष्य की खाद्य सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है. इस खबर में हम आपको बताएंगे की किन किस्मों को अपनाकर आप अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.अलीगढ़: तेज़ी से बदलते समय में जहां खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, वहीं मछली पालन किसानों के लिए कम खर्च में अधिक मुनाफा देने वाला विकल्प बनकर उभर रहा है. मछली न केवल आमदनी का जरिया है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए बेहतरीन प्रोटीन स्रोत भी है. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के जूलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद अफजल खान का कहना है कि आने वाले समय में जलीय संसाधनों के जरिए खाद्य उत्पादन ही भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत होगी.

पॉलीकल्चर तकनीक से बढ़ाएं उत्पादनडॉ. अफजल खान के अनुसार, भारत में इंडियन मेजर कार्प्स की सबसे ज्यादा पैदावार होती है, जिसमें कतला, रोहू और मृगल प्रमुख हैं. इन मछलियों को एक साथ पालने की तकनीक को पॉलीकल्चर कहते हैं, जिससे उत्पादन बढ़ता है और किसानों को अच्छा आर्थिक लाभ मिलता है. कम कांटे या बिना कांटे वाली मछलियों में पंगास जैसे विकल्प भी काफी लोकप्रिय हो रहे हैं, क्योंकि यह कम जगह, कम लागत और कम समय में ज्यादा उत्पादन देती हैं.

आधुनिक तकनीक से आसान होगा पालनपंगास मछली पालन में एरेटर, टैंक और कंट्रोल्ड सिस्टम जैसे आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है. मछलियों की खुराक के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध बाय-प्रोडक्ट्स जैसे ऑयल सीड्स का केक इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है. इसके अलावा इंड्यूस्ड ब्रीडिंग तकनीक का उपयोग मछली के बीज उत्पादन में किया जाता है, जिससे गुणवत्ता बेहतर होती है. सरकार की ओर से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत किसानों को सब्सिडी और वित्तीय मदद भी दी जा रही है.

इंटीग्रेटेड फिश फार्मिंग का फायदाडॉ. अफजल खान बताते हैं कि इंटीग्रेटेड फिश फार्मिंग भविष्य की एक महत्वपूर्ण तकनीक है. इसमें मछली पालन के साथ बत्तख, मवेशी या सब्जियों की खेती भी की जाती है. बत्तखों का अपशिष्ट तालाब में प्राकृतिक खाद का काम करता है, जिससे प्लैंकटन उत्पन्न होते हैं और वही मछलियों का प्राकृतिक भोजन बनता है. इसी तरह मछलियों को भी सुरक्षित और अनुकूल वातावरण मिलता है.

जैसे-जैसे जमीन कम होती जा रही है और जनसंख्या बढ़ती जा रही है, लोगों को पर्याप्त और सस्ती प्रोटीन डाइट देना चुनौती बन रहा है. मछली प्रोटीन का सबसे बेहतरीन स्रोत है और इसी कारण फिश कल्चर और एक्वाकल्चर न केवल आर्थिक रूप से लाभकारी हैं, बल्कि भविष्य की खाद्य सुरक्षा के लिए भी बेहद जरूरी हैं.About the AuthorSeema Nathसीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ेंLocation :Aligarh,Uttar PradeshFirst Published :January 24, 2026, 14:57 ISThomeagricultureकम लागत में तगड़ा मुनाफा चाहिए? तो अपनाएं ये खास फिश फार्मिंग तकनीक

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