Last Updated:January 23, 2026, 23:07 ISTAnimal husbandry tips : खुरपका और मुंहपका विषाणु जनित गंभीर रोग हैं, जो बदलते मौसम में ज्यादा होता है. इस रोग में पशु को भूख लगना कम हो जाता है. मुंह और खुर में छाले पड़ जाते हैं. लार टपकना और लंगड़ापन की स्थिति आ सकती है. पशु जुगाली छोड़ देता है और दूध उत्पादन 80% तक गिर जाता है. अगर पशु के पेट में बच्चा है, तो इस बीमारी की वजह से बच्चा गिर सकता है. ऐसे बीमार पशु को अलग रखें. पशुओं को साल में दो बार टीका लगवाएं. बलिया. इस बदलते मौसम में पशु मालिकों को बेहद सावधान रहने की जरूरत है. इस दौरान कुछ ऐसी समस्याएं पशुओं में आती हैं, जिनको अगर नजरअंदाज किया जाए, तो पशु पालकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, इसका बेहतरीन विकल्प टीकाकरण होता है, जिसकी शुरुआत बलिया जनपद में हो चुकी है. राजकीय पशु चिकित्सालय नगर बलिया के उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एसडी द्विवेदी बताते हैं कि पशुपालकों के लिए खास चेतावनी के तौर पर बदलते मौसम में खुरपका और मुंहपका रोग के बारे में जान लेने जरूरी है. जो अभियान के तहत 45 दिन तक पशुपालन विभाग की टीम घर-घर जाकर हर पशुओं को टीका लगाती है. ये शुरू कर दिया गया हैं. खुरपका और मुंहपका रोग से बचने के लिए पशुओं को यह टीका लगाना बहुत जरूरी है.
खुरपका और मुंहपका एक विषाणु जनित गंभीर रोग है. यह अगर एक बार किसी पशु में हो जाता है, तो उसमें दूध की उत्पादन क्षमता घट जाती है और भूख लगना कम हो जाता है. इसका लक्षण यह होता है कि पशुओं के मुंह और खुर में छाले पड़ जाते हैं. खुर पका और मुंह पका (FMD) पशुओं में फैलने वाला खतरनाक वायरल है, जिसमें तेज बुखार, मुंह और खुरों में छाले, लार टपकना और लंगड़ापन की स्थिति आ सकती है. पशु जुगाली छोड़ देता है और दूध उत्पादन 80% तक गिर जाता है. काफी दिन तक खाना-पीना छोड़ने के कारण पशु कमजोर हो जाता है. इसके बाद पशु गिर सकता हैं.
सबसे मजबूत बचाव
खुरपका और मुंहपका (FMD) से बचाव का सबसे मजबूत हथियार है कि नियमित टीकाकरण करा लें. पशुओं को साल में दो बार टीका लगवाएं, बीमार पशु को अलग रखें. पशुओं के रहने की जगह पर सफाई, खुर और मुंह की नियमित धुलाई करनी चाहिए. अगर पशु के पेट में बच्चा है, तो इस बीमारी के कारण बच्चा गिर सकता है. पशुओं की उत्पादन क्षमता एकदम कम हो जाती है और बच्चा देने की क्षमता भी कम होती जाती है. खुरपका और मुंहपका बीमारी से पशुओं को बचाने के लिए टीका जरूर लगवा लें. अगर लक्षण दिखते ही इसका तुरंत समाधान न किया जाए तो पशु की जान भी जा सकती है. इसलिए अगर किसी प्रकार के लक्षण दिखें तो तुरंत पशु एक्सपर्ट से सलाह लेनी चाहिए.About the AuthorPriyanshu GuptaPriyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ेंLocation :Ballia,Uttar PradeshFirst Published :January 23, 2026, 23:07 ISThomeagricultureखाना छोड़ देगा पशु, घट जाएगा 80% दूध, बदले मौसम में ये 2 रोग सबसे ज्यादा घातक

