Kanpur latest news : कानपुर का बूढ़ा बरगद सिर्फ एक पेड़ नहीं था, बल्कि 1857 की क्रांति और स्वतंत्रता संग्राम का साक्षी रहा. नाना साहब, तात्या टोपे और रानी लक्ष्मीबाई के संघर्ष की गूंज इस बरगद के नीचे सुनाई देती थी. अंग्रेजों ने इसे फांसी के लिए चुना, लेकिन यह डर नहीं, हौसले का प्रतीक बन गया.
सेना में नहीं मिली नौकरी, तो खेती को बनाया करियर, गोंडा के किसान ने विदेशी अमरूद की खेती से बदल दी किस्मत
गोंडा: बदलते समय के साथ अब किसान भी खेती के नए-नए तरीके अपना रहे हैं. परंपरागत फसलों की…

