Last Updated:January 21, 2026, 14:46 ISTAyodhya Latest News: शंकराचार्य स्वामी अभीमुक्तेश्वरनंद के साथ माघ मेला में जो हुआ वह अब सुर्खियों में है. चाहे राजनीति हो या संतों का समाज हर जगह चर्चा उसी विषय पर हो रही है. ऐसे में अब अयोध्या के संतों का रिएक्शन का है. कुछ संत तो जो हुआ है उसे गलत बता रहे लेकिन कुछ संत शंकराचार्य को ही गलत ठहरा रहे है. अयोध्या: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेला चल रहा है. कई करोड़ श्रद्धालु माघ मेला में त्रिवेणी संगम में आस्था की ड्यूटी लगाकर पुण्य को अर्जित कर रहे हैं. इसी बीच स्वामी शंकराचार्य स्वामी अभीमुक्तेश्वरनंद की स्नान को लेकर अब विवाद बढ़ता जा रहा है. संतों ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर सवाल खड़ा किया है. जगद्गुरु रामभद्राचार्य का ने कहा कि पालकी पर बैठकर नहीं जाना चाहिए था. वहीं जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा 50 फीट पैदल भी संत के रूप में नहीं चल सकते क्या. अब इस पूरे मामले पर अयोध्या के संत समाज के लोगों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है अयोध्या में भी संत समाज के लोग दो धड़े में बढ़ते नजर आ रहे हैं.
हनुमानगढ़ी के संत दिवेशाचार्य ने बताया कि प्रयागराज माघ मेला में शंकराचार्य के साथ जो भी हुआ है. यह बड़ा ही दुखद है किसी के साथ भी इस तरह का घटना नहीं होना चाहिए. इस पर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए जो भी लोग दोषी हो उनके ऊपर कार्रवाई होनी चाहिए. अगर शासन प्रशासन निवेदन करता तो जरूर शंकराचार्य पैदल जाकर स्नान करते. लेकिन शंकराचार्य और प्रशासन के बीच कोई माहौल खराब करने वाला भी घुस गया था. जिन्होंने इस तरीके से भड़काने का काम किया और इसका दुष्परिणाम भी अब सामने आया है. आगे से शासन और प्रशासन के साथ सभी पूज्य संतों को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए उनके बीच में कोई आताताई ना आ पाए.
शंकराचार्य को नहीं जाना चाहिए था पालकी परयूपी के सीताराम दास ने बताया कि माघ माह के पावन पर्व पर शंकराचार्य पालकी पर जा रहे थे. यह गलत था लेकिन शंकराचार्य को पीटने का जो मामला आया है. यह भी बिल्कुल गलत है जिस तरह हमारे समाज को साधु संतों को बदनाम करने का कुचक्र रचा जा रहा है इससे बचना चाहिए और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी जो नित्य निरंतर साधु संतों के लिए सनातन धर्म के लिए इस प्रकार के कृत को बर्दाश्त नहीं करेंगे. लेकिन पूज्य शंकराचार्य को पैदल जाकर 50 फीट की दूरी पर स्नान करना चाहिए था. प्रशासन ने उनको समझने का काम किया लेकिन वह नहीं समझे यह भी अच्छा नहीं है. हम लोग यही कहेंगे सब साधु संत संगठित रहिए एकत्रित रहिए.
अध्यक्ष कल्कि राम ने कहा इन्हें न बोलो शंकराचार्यरामादल ट्रस्ट के अध्यक्ष कल्कि राम ने बताया कि पहले तो शंकराचार्य को शंकराचार्य कहना बंद किया जाए. क्योंकि देश में और भी शंकराचार्य हैं, देश में जितने भी शंकराचार्य है उनके ऊपर कोई भी मुकदमा नहीं चल रहा है. इनके ऊपर मुकदमा भी चल रहा है. और वह भी शंकराचार्य के पद को लेकर तो ऐसी स्थिति में यह शंकराचार्य नहीं है. दूसरी बात आप वहां पर मां गंगा का आशीर्वाद लेने गए हैं या वहां पर आप अपनी अहंकार का प्रदर्शन करने गए हैं. जहां पर देश के बड़े-बड़े संत पैदल जाते हैं. ऐसी स्थिति में वहां पर आप पालकी पर बैठकर जा रहे हैं प्रशासन ने आपसे निवेदन भी किया कि आप पैदल भी जा सकते हैं. बावजूद इसके आप नहीं माने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विवाद में बेवजह कूदना इनकी फितरत बन गई है. यह वही शंकराचार्य हैं जिनको वाराणसी में पीटा गया था.About the AuthorAbhijeet Chauhanन्यूज18 हिंदी डिजिटल में कार्यरत. उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल और हरियाणा की पॉलिटिक्स और क्राइम खबरों में रुचि. वेब स्टोरी और AI आधारित कंटेंट में रूचि. राजनीति, क्राइम, मनोरंजन से जुड़ी खबरों को लिखने मे…और पढ़ेंLocation :Ayodhya,Faizabad,Uttar PradeshFirst Published :January 21, 2026, 14:46 ISThomeuttar-pradesh’शंकराचार्य को पीटना गलत’, माघ मेला में जो अब अयोध्या के संतों का आया रिएक्शन

