Last Updated:January 18, 2026, 23:05 ISTSultanpur news: कटावा ग्राम सभा में ही जन्मे बाबा सरवन दास ने 6 वर्ष की उम्र में ही वैराग्य धारण कर लिया था और वह धर्म की खोज में निकल पड़े थे.ख़बरें फटाफटसुल्तानपुरः धार्मिक मान्यता और आस्था को लेकर भारत प्राचीन काल से ही सजग रहा है. यहां पर कई ऐसे सिद्ध पुरुष हुए जिनकी दिव्य वाणी और उनके दिव्य गुणों ने समाज को ईश्वर के प्रति भक्त रहने का सकारात्मक संदेश दिया है. इसी तरह एक ऐसे बाबा उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में हुए जिन्हें सरवन दास बाबा कहा जाता है इनके बारे में लोग कहते हैं कि यह बाबा सुल्तानपुर से अयोध्या प्रत्येक दिन सरयू नदी में स्नान करने जाते थे और जब वह स्नान कर लेते तो अयोध्या के संतों को सुबह जगते थे कि उठिए अब सुबह हो गई इनकी एक कुटिया सुल्तानपुर में गोमती नदी के किनारे बनाई गई है.
सैकड़ों वर्ष पुराना है सरवन दास कुटिया का इतिहास
सुल्तानपुर के कटावा ग्राम सभा में स्थित बाबा सरवन दास की कुटिया का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना माना जाता है. यहां के पुजारी रामदास लोकल 18 से बातचीत के दौरान बताते हैं कि बाबा सरवन दास का इतिहास काफी पुराना है. वह एक सिद्ध पुरुष थे. कटावा ग्राम सभा में जिस स्थल पर बाबा सरवन दास की कुटिया बनाई गई है. यहां पर पहले सिर्फ जंगल ही हुआ करता था. यहां पर बाबा सरवन दास ने समाधि ली हुई है. बाबा सरवन दास के बारे में कहा जाता है कि वह प्रत्येक दिन सुल्तानपुर से अयोध्या स्नान करने जाते थे और जब सुबह स्नान करके सरयू से वापस लौटते तो अयोध्या के संतों को जगाते थे कि उठिए अब सुबह हो गई है.
बचपन में ही ले लिया था संन्यास
कटावा ग्राम सभा में ही जन्मे बाबा सरवन दास ने 6 वर्ष की उम्र में ही वैराग्य धारण कर लिया था और वह धर्म की खोज में निकल पड़े थे. उनके बारे में यह भी कहा जाता है कि बाबा सरवन दास के इस स्थल पर कोई भी व्यक्ति श्रद्धा भाव और सच्चे मन से आता है तो बाबा सरवन दास उसकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण कर देते हैं.
अगर आप भी बाबा सरवन दास की कुटिया में दर्शन करना चाहते हैं और अपनी मन्नते मांगना चाहते हैं तो आपको सुल्तानपुर मुख्यालय से कुड़वार रोड की तरफ लगभग 2 किलोमीटर आना होगा और कटावा मोड़ से आपको लगभग 3 किलोमीटर अंदर आना ह. यहीं पर आपको एक भव्य गेट मिलेगा जहां पर बाबा सरवन दास कुटिया का जिक्र हुआ है. यहां पर आकर आप दर्शन और पूजन कर सकते हैं. यह कुटिया गोमती नदी के किनारे बनाई गई है जो काफी सुंदर और दिव्य है.About the AuthorRajneesh Kumar Yadavमैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ेंLocation :Sultanpur,Uttar PradeshFirst Published :January 18, 2026, 23:05 ISThomeuttar-pradesh100 किलोमीटर दूर, रोज अयोध्या स्नान करने जाते थे बाबा सरवन दास

