Ghaziabad Murder Mystery: कहते हैं प्यार अंधा होता है, लेकिन जब यह प्यार मर्यादाओं की दहलीज लांघ जाए, तो वह खौफनाक अपराध की शक्ल ले लेता है. गाजियाबाद के सिकरोड़ गांव की यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी लगती है, जहां एक घर की दहलीज पर शुरू हुआ ‘अवैध प्रेम’ न केवल एक इंसान की जान ले गया, बल्कि रिश्तों के विश्वास को भी हमेशा के लिए दफन कर दिया.
सूने घर में आई थी ‘सविता’, बनी थी नई उम्मीदकहानी शुरू होती है साल 2003 में, जब सिकरोड़ गांव के रहने वाले चंद्रवीर सिंह की पहली पत्नी की मौत हो गई. घर सूना था और चंद्रवीर गम में डूबा रहता था. साल 2004 में 15 साल छोटी सविता की शादी चंद्रवीर से हुई. सविता की चंचलता ने घर में फिर से रौनक लौटा दी. वक्त बीता, तीन बच्चे हुए और बाहर से सब कुछ किसी हंसते-खेलते परिवार जैसा दिखने लगा.
देवर की दस्तक और धुंधली होती मर्यादाएंहंसते-खेलते इस घर में धीरे-धीरे अंधेरा तब छाने लगा जब चंद्रवीर नशे का आदि हो गया. इसी दौरान चंद्रवीर के चचेरे भाई अरुण का घर में आना-जाना बढ़ गया. उम्र में छोटा और स्वभाव में सहज अरुण, सविता के लिए हमदर्द बन गया. देवर-भाभी के बीच का यह ‘सहारा’ कब समाज की नजरों में गुनाह और आपस में गहरा इश्क बन गया, किसी को पता नहीं चला. जब चंद्रवीर को इस ‘अवैध रिश्ते’ की भनक लगी, तो घर कुरुक्षेत्र बन गया.
28 सितंबर की वो खौफनाक रात: बाल्टी में जमा किया खूनसाल 2018 की 28 सितंबर को इस त्रिकोणीय प्रेम कहानी का अंत बेहद वीभत्स रहा. सविता ने अपनी साजिश में अरुण को शामिल किया. रात के सन्नाटे में जब चंद्रवीर घर पर था, सविता ने उसे बातों में उलझाए रखा. तभी अरुण तमंचा लेकर पहुंचा और चंद्रवीर के सीने में गोली उतार दी. कत्ल के बाद हैवानियत की हदें पार कर दी गईं. फर्श पर खून न फैले, इसलिए शव के नीचे बाल्टी रखी गई.
पहचान छिपाने के लिए चंद्रवीर का हाथ काट दिया गया ताकि उसका कड़ा निकाला जा सके. अरुण के घर में पहले से ही 7 फीट गहरा गड्ढा तैयार था. लाश वहां दबाकर ऊपर से पक्का सीमेंट का फर्श बना दिया गया. बदबू न आए, इसलिए वहां अगरबत्तियां जलाई गईं और बाद में उसे तबेला बना दिया गया.
4 साल बाद मासूम की गवाही ने खोला राजचार सालों तक सविता ‘बेचारा विधवा’ बनकर सबको गुमराह करती रही. उसने तो चंद्रवीर के बड़े भाई भूरे पर ही संपत्ति हड़पने के लिए हत्या का शक जता दिया था. मामला ठंडे बस्ते में था, लेकिन 2022 में गाजियाबाद पुलिस ने जब फाइल दोबारा खोली, तो सच सामने आ गया. चंद्रवीर की बेटी ने पुलिस को बताया कि पिता के गायब होने से पहले चाचा अरुण अक्सर रात को मां से मिलने आते थे.
कंकाल ने दी गवाही, सलाखों के पीछे पहुंचा ‘अधूरा इश्क’पुलिस की सख्ती के आगे सविता और अरुण टूट गए. उनकी निशानदेही पर जब तबेले की जमीन खोदी गई, तो वहां से चंद्रवीर का कंकाल बरामद हुआ. वह प्रेम जो कभी सहारा बना था, अब सलाखों के पीछे पहुंच चुका था. यह मामला आज भी गाजियाबाद में ‘दृश्यम’ जैसी साजिश की याद दिलाता है.

