बाराबंकी: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में इस समय काफी हंगामा देखने को मिल रहा है. यहां टोल कर्मियों द्वारा की गई बदतमीजी को लेकर बवाल मचा हुआ है. दरअसल, बुधवार को 4 वकील एक कार से लखनऊ हाईकोर्ट जा रहे थे. इस दौरान टोल टैक्स को लेकर टोल कर्मचारियों से बहस हो गई. ये बहस इतनी बढ़ की टोल कर्मचारियों ने सारी हदें पार कर दीं. दौड़ा-दौड़ाकर अधिवक्ताओं को पीटा. इससे एक अधिवक्ता बेहोश हो गया. जब ये मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो अधिवक्ताओं में गुस्सा भड़क गया. पुलिस की कार्रवाई से नाराज होकर लखनऊ सहित कई जिलों के अधिवक्ताओं ने टोल प्लाजा पर प्रदर्शन किया, जिससे यातायात बाधित हुआ और टोल प्लाजा लगभग 20 घंटे तक टोल फ्री रहा. अब इस मामले में 5 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है. आइए जानते हैं पूरा मामला…
यह है मामला
प्रतापगढ़ के परानूपुर थाना हथिगवां निवासी अधिवक्ता रत्नेश कुमार शुक्ला इलाहाबाद हाई कोर्ट में कार्यरत हैं. 14 जनवरी को वह अपनी कार से लखनऊ जा रहे थे. उनके साथ तीन और अधिवक्ता भी मौजूद थे. जब वह बारा टोल प्लाजा पर पहुंचे तो टोल कर्मियों से बहस हो गई. बहस होने पर कर्मचारी भड़क गए और अधिवक्ता के साथ मारपीट की और उनकी सोने की अंगूठी छीन ली. इस घटना में अन्य अधिवक्ता भी घायल हो गए. इस पूरे मामले का सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गया. वीडियो वायरल होते ही मामले आग की तरह फैल गया.
3 दर्जन से अधिक अधिवक्ता ने किया प्रदर्शन
इधर, पुलिस ने पहले गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने का आश्वासन दिया था. हालांकि, बाद में आरोपियों का केवल शांतिभंग की धाराओं में चालान किए जाने की सूचना मिलने पर गुरुवार को अधिवक्ता समुदाय आक्रोशित हो गया. इसके बाद हैदरगढ़, लखनऊ, बाराबंकी, प्रतापगढ़ और सुलतानपुर के वकील टोल प्लाजा पर एकत्र हुए. उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के सदस्य अखिलेश अवस्थी भी हाईकोर्ट लखनऊ के तीन दर्जन से अधिक अधिवक्ताओं के साथ मौके पर पहुंचे. उन्होंने अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी), उप-जिलाधिकारी (एसडीएम) और क्षेत्राधिकारी (सीओ) से सवाल किया कि मारपीट जैसे गंभीर मामले में शांतिभंग की धाराएं क्यों लगाई गईं. अधिकारियों द्वारा संतोषजनक जवाब न दिए जाने पर अधिवक्ताओं की नाराजगी और बढ़ गई.
टोल प्लाजा संचालक कंपनी का किया जाए लाइसेंस रद्द लगातार बढ़ते दबाव के बाद पुलिस ने टोल प्लाजा के मैनेजर जंगभान सिंह को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस अधिकारियों ने अधिवक्ताओं को वीडियो दिखाकर गिरफ्तारी की पुष्टि की. अधिवक्ताओं ने मांग की कि टोल प्लाजा संचालक कंपनी का लाइसेंस रद्द किया जाए, स्थानीय अधिवक्ताओं को टोल फ्री सुविधा दी जाए और लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाए. उन्होंने शांतिभंग की धाराओं में चालान को वकीलों के साथ धोखा बताया और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की.
पांच आरोपी हुए गिरफ्तारअपर पुलिस अधीक्षक विकास चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि मारपीट के मामले में पांच आरोपियों को जेल भेजा गया है. शेष आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित की गई हैं. अधिकारियों ने अधिवक्ताओं को यह भी आश्वासन दिया कि टोल प्लाजा के संचालन और स्थानीय अधिवक्ताओं के लिए टोल फ्री व्यवस्था पर प्रबंधक से बात कर गंभीरता से विचार किया जाएगा.

