Uttar Pradesh

कौन होते हैं जंगम साधु, कहां से आते हैं ये, क्या है इनकी कहानी? माघ मेले में आए पहली बार

Last Updated:January 13, 2026, 20:45 ISTजंगम साधु परंपरा के मुताबिक कुंभ और महाकुंभ मेले में ही आते हैं. जंगम साधु पंजाब और हरियाणा से आते हैं. लेकिन पहली बार माघ मेले में भी जंगम साधु पहुंचे हैं. माघ मेले में जगह-जगह साधु संतों के पास जाकर अखाड़े और सन्यास परंपरा का गुणगान कर रहे हैं.माघ मेले में पहली बार आए जंगम साधु.प्रयागराजः संगम की रेती पर आयोजित हो रहे माघ मेले में इन दिनों धर्म और अध्यात्म की बयार बह रही है. जगह-जगह जहां साधु संत और नागा संन्यासी धूनी रमाए बैठे हैं. वहीं तरह-तरह के अनुष्ठान भी इस माघ मेले में आयोजित किये जा रहे हैं. योगी सरकार भी इस माघ मेले को मिनी कुंभ की तर्ज पर आयोजित कर रही है. यही वजह है कि इस बार माघ मेले में बड़ी संख्या में अखाड़ों के नागा संन्यासी भी पहुंचे हैं. नागा संन्यासियों के साथ ही पहली बार माघ मेले में जंगम साधु भी नजर आ रहे हैं.

कुंभ या महाकुंभ में आते हैं जंघम साधुजंगम साधु परंपरा के मुताबिक कुंभ और महाकुंभ मेले में ही आते हैं. जंगम साधु पंजाब और हरियाणा से आते हैं. लेकिन पहली बार माघ मेले में भी जंगम साधु पहुंचे हैं. माघ मेले में जगह-जगह साधु संतों के पास जाकर अखाड़े और सन्यास परंपरा का गुणगान कर रहे हैं. इसके अलावा भगवान शिव की भी महिमा गाकर सुना रहे हैं. श्री पंचदशनाम जूना अखाड़े के महंत शिवानंद गिरि के मुताबिक जंगम साधु भी भगवान शिव के गण माने जाते हैं.

नागा संन्यासियों का करते हैं बखानयह नागा संन्यासियों की गाथा का बखान करते हैं. इसके साथ ही भगवान शिव के विवाह और उनकी महिमा को गाकर सुनाते हैं. यह चार-पांच लोगों के समूह में चलते हैं. जंगम साधुओं को नागा संन्यासी और साधु संत कुछ दक्षिणा देकर विदा करते हैं. इसके बाद यह जंगम साधु किसी दूसरे साधु संत की शिविर की ओर आगे बढ़ जाते हैं.

क्या है जंगम साधुओं की कहानीजंगम साधु शैव संप्रदाय से जुड़े साधुओं का एक समूह है, जिनकी उत्पति भगवान शिव की जांघ से मानी जाती है. इसलिए इन्हें जांघ से जन्मा (जंगम) साधु कहा जाता है. ये साधु शिव-पार्वती विवाह की कथाएं गाते हैं, सिर पर मोरपंख और कानों में कुंडल पहनते हैं तथा दान हमेशा विशेष घंटी में लेते हैं. हाथ से दान नहीं लेते. ये अखाड़ों के गायक भी कहलाते हैं.

कैसे जन्मे थे जंघम साधुऐसा कहा जाता है कि जब भगवान शिव और पार्वती का विवाह हो रहा था, उस दौरान महादेव, विष्णु जी और ब्रह्मा जी को दक्षिणा देने की इच्छा प्रकट की, जिसे दोनों ही देवों ने स्वीकार नहीं किया. इस वजह से शंकर भगवान ने अपनी जांघ को काटकर जंगम साधुओं की उत्पति की. फिर इन्हीं साधुओं ने भोलेनाथ का विवाह कराया और संपूर्ण दक्षिणा स्वीकार की.About the AuthorPrashant Raiप्रशान्त राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं. प्रशांत राय पत्रकारिता में पिछले 8 साल से एक्टिव हैं. अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए प्रशांत राय फिलहाल न्यूज18 हिंदी के साथ पिछले तीन …और पढ़ेंLocation :Allahabad,Uttar PradeshFirst Published :January 13, 2026, 20:45 ISThomeuttar-pradeshकौन होते हैं जंगम साधु, कहां से आते हैं ये, क्या है इनकी कहानी?

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