Uttar Pradesh

गाजियाबाद में आवारा कुत्तों का ‘डेथ ट्रैप’: 2025 में 1.38 लाख लोग हुए शिकार, हर महीने 10 हजार से ज्यादा केस

Dog Bite Cases in Ghaziabad: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में आवारा कुत्तों का आतंक अब जानलेवा होता जा रहा है. शहर की गलियों से लेकर हाईराइज सोसायटियों तक, कोई भी इलाका सुरक्षित नहीं बचा है. स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं. साल 2025 में गाजियाबाद में डॉग बाइट (कुत्तों के काटने) के 1,38,557 मामले दर्ज किए गए हैं, जिसने स्थानीय प्रशासन और नगर निगम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. कई इलाकों में लोगों ने आवारा कुत्तों के खिलाफ प्रदर्शन तक किए, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात में अब तक कोई खास सुधार नजर नहीं आ रहा है.

2025 में 1.38 लाख से ज्यादा डॉग बाइट के मामले
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में गाजियाबाद में कुल 1 लाख 38 हजार 557 डॉग बाइट के मामले दर्ज किए गए. इससे पहले 2023 में करीब 71 हजार मामले सामने आए थे, जबकि 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर दो लाख से अधिक पहुंच गया. लगातार बढ़ते ये आंकड़े नगर निकायों और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं.

हर महीने औसतन 10 हजार लोग हो रहे शिकारजिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. राकेश कुमार गुप्ता के मुताबिक, जिले में डॉग बाइट की दर खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है. आंकड़ों का विश्लेषण करें तो हर महीने औसतन 10 हजार से अधिक लोग कुत्तों का शिकार बन रहे हैं. विशेष रूप से साल 2025 के आखिरी दो महीने सबसे घातक रहे. नवंबर में 15,000 और दिसंबर में लगभग 13,000 मामले रिपोर्ट हुए, जो साल के उच्चतम स्तर थे.

गंभीर श्रेणी के हमलों में बढ़ोतरीस्वास्थ्य विभाग डॉग बाइट की घटनाओं को तीन श्रेणियों (हल्की, मध्यम और गंभीर) में बांटता है. साल 2025 की रिपोर्ट के अनुसार:– कुल मामलों में से करीब 1 प्रतिशत (लगभग 1,380) मामले ‘गंभीर’ श्रेणी के थे.– इन घटनाओं में लोग बुरी तरह घायल हुए और उन्हें लंबे इलाज की जरूरत पड़ी.– तुलनात्मक रूप से देखें तो 2023 में यह आंकड़ा करीब 71 हजार था, जो 2024 में 2 लाख के पार पहुंचा और 2025 में भी सवा लाख के ऊपर बना हुआ है.

जागरूकता बढ़ी, 170 केंद्रों पर वैक्सीन की सुविधाराहत की बात यह है कि डॉग बाइट की रिपोर्टिंग बढ़ने का एक कारण लोगों में आई जागरूकता भी है. स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि अब लोग काटने के तुरंत बाद बिना लापरवाही किए एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) लगवाने पहुंच रहे हैं. वर्तमान में जिले के 170 स्वास्थ्य केंद्रों पर रेबीज वैक्सीन उपलब्ध है. आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं के माध्यम से ग्रामीण और शहरी इलाकों में लोगों को जागरूक किया जा रहा है.

नसबंदी की रफ्तार और भविष्य की योजनाकुत्तों की आबादी पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ‘एनिमल बर्थ कंट्रोल’ (ABC) प्रोग्राम चला रहा है. वर्तमान में नंदग्राम और नए बस अड्डे के पास दो सेंटर संचालित हैं, जहां रोजाना करीब 80 कुत्तों की नसबंदी की जा रही है. अधिकारियों को उम्मीद है कि फरवरी 2026 से तीसरा सेंटर शुरू हो जाएगा, जिससे रोजाना नसबंदी की क्षमता बढ़कर 120 तक पहुंच जाएगी. हालांकि, स्थानीय निवासियों का कहना है कि ये प्रयास नाकाफी हैं. कई इलाकों में आवारा कुत्तों की संख्या इतनी अधिक है कि बच्चों और बुजुर्गों का शाम के समय घर से निकलना दूभर हो गया है.

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