Uttar Pradesh

Chandauli News : आपके घर का पानी कितना सुरक्षित, फिल्टर वाला क्या वाकई शुद्ध, किसी को भी हिला देगा सच

चंदौली. आपके घर की टंकी और नल तक पहुंचने वाला पानी क्या वाकई पीने लायक है? क्या वह पानी शुद्ध है या उसमें ऐसे तत्व मिल चुके हैं, जो आपकी सेहत को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा रहे हैं? मध्य प्रदेश के इंदौर में पेयजल से हुई मौतों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है. पानी हमारे जीवन की सबसे बुनियादी जरूरत है, लेकिन यही पानी सबसे बड़ा सवाल भी बन गया है. इन तमाम सवालों के जवाब जानने के लिए लोकल 18 ने चंदौली के डॉक्टर पल्लव से बातचीत की. इस बातचीत में उन्होंने पीने के पानी के स्रोत, उसकी शुद्धता, फिल्टर बनाम बोरिंग का पानी, सप्लाई लाइन की हकीकत और पानी रखने के सही तरीकों के बारे में बताया. डॉ. पल्लव के मुताबिक, वे पिछले 10 वर्षों से समरसेबल का पानी ही इस्तेमाल कर रहे हैं. फिल्टर का पानी लंबे समय तक पीने से शरीर में मिनरल्स की कमी हो सकती है. आमतौर पर RO और अन्य फिल्टर पानी को शुद्ध करने के साथ-साथ कई जरूरी खनिज तत्वों को भी निकाल देते हैं.

डॉ. पल्लव बताते हैं कि हालांकि आजकल ऐसे फिल्टर भी बाजार में आ गए हैं, जो मिनरल्स मिलाने का दावा करते हैं, लेकिन प्राकृतिक रूप से मिलने वाला पानी अब भी ज्यादा बेहतर है. आयुर्वेद में भी यह माना गया है कि रुका हुआ पानी नहीं पीना चाहिए, बल्कि बहते हुए पानी का सेवन करना चाहिए. पहले नदियों का पानी शुद्ध हुआ करता था, लेकिन आज नालों और फैक्ट्रियों का गंदा पानी नदियों में मिलने से बहता पानी भी सुरक्षित नहीं रहा.

कौन सा पानी अच्छा

डॉ. पल्लव के मुताबिक, जमीन के अंदर का पानी कई लेयर्स से होकर गुजरता है. इस दौरान वह प्राकृतिक रूप से फिल्टर हो जाता है. मिट्टी, रेत और पत्थरों की परतें पानी को सेडीमेंटेशन की प्रक्रिया से साफ करती है. इसी वजह से बोरिंग या समरसेबल का पानी आमतौर पर ज्यादा शुद्ध, स्वच्छ और मिनरल्स से भरपूर होता है. इस पानी में कैल्शियम, मैग्नीशियम जैसे तत्व मौजूद रहते हैं, जो शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत बनाए रखने में मदद करते हैं. जो लोग लगातार फिल्टर का पानी पीते हैं, अगर वे किसी गांव या बाहर के इलाके में फंस जाएं और वहां का सामान्य पानी पी लें, तो अक्सर बीमार पड़ जाते हैं. इसकी वजह यह है कि उनका शरीर प्राकृतिक बैक्टीरिया और मिनरल्स का आदी नहीं रह जाता. इसलिए बेहतर यही है कि जितना हो सके प्रकृति के करीब रहा जाए, लेकिन स्वच्छता का पूरा ध्यान रखा जाए.

शहरों में सप्लाई कैसी

डॉ. पल्लव ने बताते हैं कि शहरों में पानी गंदा मिलने के पीछे कई कारण हैं. बढ़ता पॉल्यूशन, जमीन के अंदर कचरे को दबाना और अव्यवस्थित सीवरेज सिस्टम इसकी बड़ी वजह है. कई जगहों पर पानी की सप्लाई के पाइप नालियों में डूबे होते हैं, ऐसे पाइप कहीं भी क्रैक या फट सकते हैं, जब मोटर चलाई जाती है, तो नाली का गंदा पानी भी पाइप के जरिए घरों तक पहुंच सकता है. कई इलाकों में लोग नल खोलते हैं, तो झाग वाला पानी आता है, जो साफ संकेत है कि पानी दूषित है, ऐसे पानी को पीना बेहद खतरनाक हो सकता है.

किन बातों का रखें ध्यान

अगर आपके पास बोरिंग या समरसेबल की सुविधा नहीं है और आप सरकारी सप्लाई वाले पानी पर निर्भर हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है.

-यह जांचें कि आपके इलाके में नियमित रूप से क्लोरीन मिलाया जाता है या नहीं.-नालियों की सफाई सही तरीके से हो रही है या नहीं.-पानी का रंग, गंध और स्वाद असामान्य तो नहीं है.

अगर इन बातों को लेकर संदेह है, तो पानी को उबालकर या छानकर ही पीएं. आयुर्वेद में कहा गया है कि पानी जिस पात्र में रखा जाता है, वह उसके गुणों को ग्रहण कर लेता है. यही वजह है कि नवजात शिशु को पहली बार भोजन चांदी के चम्मच से खिलाया जाता है.

-चांदी का पात्र पानी को शीतल बनाता है.-सोने का पात्र पानी में सकारात्मक गुण जोड़ता है.-तांबे का पात्र बैक्टीरिया को नष्ट करने की क्षमता रखता है और पाचन संबंधी समस्याओं, एसिडिटी और पित्त विकार में लाभदायक होता है. आजकल ऑफिस टेबल पर तांबे की बोतल रखने का ट्रेंड भी इसी वजह से बढ़ा है.

पानी सिर्फ प्यास नहीं बुझाता

डॉक्टर पल्लव बताते हैं कि सबसे बेहतर विकल्प वही है, जो आपके क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार सुरक्षित हो. अगर आपके इलाके में साफ बोरिंग का पानी उपलब्ध है, तो वही सबसे अच्छा है. अगर सप्लाई का पानी ही पीना पड़ता है, तो उसे उबालकर, छानकर या सही तरीके से शुद्ध करके ही इस्तेमाल करें. फिल्टर, बोतलबंद पानी या प्राकृतिक स्रोत हर विकल्प के अपने फायदे और नुकसान हैं, लेकिन सबसे जरूरी है स्वच्छता, ताजगी और जागरूकता, क्योंकि याद रखिए पानी सिर्फ प्यास नहीं बुझाता, बल्कि आपकी सेहत की नींव भी मजबूत या कमजोर करता है.

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