Uttar Pradesh

सर्दियों में स्ट्रॉबेरी की खेती करते समय बरतें ये सावधानियां, पौधे और प्रोडक्शन दोनों ही होंगे बढ़िया, अपनाएं कमाल के टिप्स

Last Updated:January 01, 2026, 18:18 ISTStrawberry Farming Tips: स्ट्रॉबेरी की खेती में अच्छा नतीजा सिर्फ मेहनत से नहीं बल्कि सही देखभाल और पानी देने पर भी निर्भर करता है. ज्यादा या कम पानी, कीट और रोग, मिट्टी का पोषण हर छोटी चीज पौधों की ग्रोथ और पैदावार को प्रभावित करती है. इस खबर में जानिए कैसे सही समय पर पानी डालने, ड्रिप सिंचाई करना, खेत की तैयारी और रोगों से बचाव करके आप अपने स्ट्रॉबेरी के पौधों को स्वस्थ रख सकते हैं और ज्यादा फसल पा सकते हैं. स्ट्रॉबेरी की खेती आज किसानों के बीच तेजी से पसंद की जा रही है, लेकिन इसके पौधे बहुत ही संवेदनशील होते हैं. देखभाल में छोटी सी चूक भी इसके विकास और पैदावार को प्रभावित कर सकती है. कृषि विज्ञान केंद्र सुलतानपुर में कार्यरत विशेषज्ञ डॉक्टर सी के त्रिपाठी लोकल 18 से बताते हैं कि स्ट्रॉबेरी में सूखने की समस्या का सबसे बड़ा कारण ड्रेनेज सिस्टम का सही तरीके से प्रबंधन न होना है. यदि खेत में पानी का निकास ठीक से नहीं होता है, तो पौधों में अधिक नमी जमा हो जाती है और पौधे धीरे-धीरे सूखने लगते हैं. जहां स्ट्रॉबेरी के पौधों में अधिक पानी की समस्या की वजह से इसके पौधे और पत्तियां सूख जाते हैं. वहीं यदि इसमें प्रत्येक सप्ताह पानी नहीं दिया जाता तो भी पेड़ और पौधे सूख सकते हैं. ऐसे में अगर यह समस्या आ रही है तो आपको सप्ताह में नमी के मुताबिक पौधों में पानी देना चाहिए. कृषि वैज्ञानिक ने आगे बताया कि स्ट्रॉबेरी के पौधों में फोमोप्सिस लीफ स्पॉट रोग लग जाता है. जिसकी वजह से स्ट्रॉबेरी के पौधे और फल में सूखापन आ जाता है या फिर वो मुरझा जाते हैं. ऐसे में जब भी आपको इस तरह के लक्षण दिखाई दें तो आपको तुरंत दवा का प्रयोग करना चाहिए. Add News18 as Preferred Source on Google किसान राधेश्याम वर्मा लोकल 18 से बताते हैं कि स्ट्रॉबेरी की खेती में खेत की तैयारी बहुत जरूरी है. बुवाई से एक सप्ताह पहले खेत को 3 से 4 बार अच्छी तरह जुताई करनी चाहिए. इसके बाद प्रति हेक्टेयर 75 टन सड़ी हुई गोबर की खाद खेत में मिलाना चाहिए. यह पौधों के लिए प्राकृतिक पोषण का सबसे अच्छा स्रोत है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है. डॉक्टर त्रिपाठी ने यह भी कहा कि कीटों की वजह से स्ट्रॉबेरी की पत्तियां और पौधे सूख सकते हैं. इससे बचने के लिए मिट्टी परीक्षण के आधार पर पोटाश और फास्फोरस की मात्रा खेत में मिलाना जरूरी है. यह पौधों को रोग और कीटों से सुरक्षित रखने में मदद करता है और उनकी वृद्धि को बढ़ावा देता है. यदि आपके स्ट्रॉबेरी के खेत में पानी अधिक हो जाता है या कमी की वजह से पौधे सूख रहे हैं, तो ड्रिप सिंचाई सबसे सही विकल्प है. इसके लिए ड्रिप पाइप को मिट्टी के स्तर के नीचे बढ़ाना चाहिए, ताकि पानी सीधे जड़ों तक पहुंचे. इससे पौधे पर्याप्त पानी पाते हैं और उनकी वृद्धि में कोई रुकावट नहीं आती. स्ट्रॉबेरी की खेती में ड्रिप सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि सिंचाई बहुत आसान हो जाती है. मेड के नीचे बिछाई गई पाइप के जरिए पौधों की जड़ों तक पानी पहुंचता है, जो पौधों की वृद्धि और स्वास्थ्य के लिए अत्यंत फायदेमंद है. इससे पौधे सूखते नहीं हैं और अच्छे से विकसित होते हैं, जिससे पैदावार भी बढ़ती है. सर्दियों में कोहरे के कारण स्ट्रॉबेरी के पौधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. इसे रोकने के लिए खेत में पॉलिथीन का प्रयोग करना या चूल्हे की राख का इस्तेमाल करना लाभकारी है. इससे पौधों की सुरक्षा होती है और उनकी पैदावार पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता.First Published :January 01, 2026, 18:18 ISThomeagricultureस्ट्रॉबेरी की खेती करते समय बरतें ये सावधानियां, अच्छी होगी पैदावार

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