Uttar Pradesh

Ghaziabad Air Pollution: नए साल 2026 में भी गाजियाबाद की हवा गंभीर स्तर पर, सांस लेना हुआ मुश्किल, लोनी में 401 पहुंचा AQI

Ghaziabad Air Pollution Today: नए साल की शुरुआत के साथ ही गाजियाबाद वासियों के लिए हवा की स्थिति चिंता का सबब बनी हुई है. 1 जनवरी 2026 को शहर के अधिकांश इलाकों में वायु गुणवत्ता (AQI) गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई. गाजियाबाद के कई इलाकों में एक्यूआई 399 से 401 तक पहुंच गया, जो स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद खतरनाक माना जाता है. यानी शहर के कोई इलाका ऐसा हो जहां हवा सांस लेने लायक हो.

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम की हल्की बारिश से कुछ राहत तो मिल सकती है, लेकिन आने वाले दिनों में कोहरा और ठंड बढ़ने से प्रदूषण का असर जारी रहेगा. 1 जनवरी 2026 को गाजियाबाद शहर के विभिन्न इलाकों में AQI गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया. लोनी क्षेत्र में एक्यूआई 401, वसुंधरा में 399, जबकि इंदिरापुरम में 274 और संजय नगर में 279 दर्ज किया गया.

वहीं, नोएडा के सेक्टरों में भी हवा की गुणवत्ता बेहद चिंताजनक बनी हुई है. नोएडा के सेक्टर-1 में एक्यूआई 393, सेक्टर-125 में 354, सेक्टर-62 में 348 और सेक्टर-116 में 363 रिकॉर्ड किया गया. इन आंकड़ो के अनुसार, एनसीआर का बड़ा हिस्सा गंभीर से बहुत खबर श्रेणी में बना हुआ है. इस बीच, भारतीत मौसम विभाग ने नए साल के पहले दिन यानी 1 जनवरी को दिनभर बादल छाए रहने और हल्की बारिश होने की संभावना जताई है.

अधिकतम तापमान 15 डिग्री और न्यूनतम 10 डिग्री सेल्सियस तक रहने का अनुमान है. हालांकि, 2 और 3 जनवरी को सुबह के समय घना कोहरा रहने की संभावना है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है. गाजियाबाद की 45 लाख से अधिक आबादी ने पिछले साल महज छह दिन ही साफ हवा में सांस ली. बाकी 359 दिन संतोषजनक, मध्यम, खराब, बेहद खराब और गंभीर श्रेणी में ही रही.

प्रदूषण के मुख्य हॉटस्पॉट और कारणमोहननगर: वाहनों का दबाव, सड़क धूलराजनगर एक्सटेंशन: निर्माण कार्य, वाहनों का दबाव, धूललोनी: अवैध औद्योगिक क्षेत्र, खुले निर्माण सामग्री, सड़क धूलभोपुरा-दिल्ली बार्डर: अवैध फैक्ट्री, धूलसिद्धार्थ विहार: टूटी सड़कें, निर्माण सामग्री, वाहनों का दबावकनावनी पुस्ता रोड: वाहनों का दबाव, निर्माण कार्य, टूटी सड़केंविजय नगर & साउथ साइड GT रोड: NH-9 वाहनों का दबाव, औद्योगिक उत्सर्जनलालकुआं: सड़क धूल, निर्माण गतिविधियां

क्या है समाधान?टूटी सड़कों की मरम्मत और धूल वाले इलाकों में पानी का छिड़कावशहर में जाम कम करना और पुराने वाहनों को सील करनाअवैध फैक्ट्रियों पर रोक और सभी फैक्ट्रियों में नियमों के अनुसार चिमनीई-वेस्ट जलाने पर रोक, खासकर लोनी जैसे प्रदूषित क्षेत्रों में

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अंकित सिंह ने बताया कि प्रदूषण रोकने की जिम्मेदारी 20 से अधिक विभागों को मिली हुई है. बोर्ड निगरानी और कार्रवाई करता है और इस साल इसे और सख्ती से लागू किया जाएगा.

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