Uttar Pradesh

unique story of kukraha baba temple mysterious history behind name, गांव में फैली हैजा बीमारी, तो बाबा ने अपनी जगह कुत्ता भेज दिया, मान्यताओं से जुड़ी इस मंदिर की रहस्यमय कहानी

Last Updated:December 31, 2025, 17:07 ISTGonda News: देश में ऐसे कई मंदिर हैं, जिनकी कहानी बेहद अनोखी है. ऐसा ही एक रहस्यमयी मंदिर गोंडा में है, जहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है. इस मंदिर का नाम कुकरहा बाबा है. आइए इसकी अनोखी मान्यता के बारे में जानते हैं.
गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड छपिया के ग्राम सभा गुरुग्राम में स्थित कुकरहा बाबा मंदिर आस्था और विश्वास का एक प्रमुख केंद्र है. यह मंदिर न सिर्फ गोंडा, बल्कि आसपास के जिलों में भी काफी प्रसिद्ध है. दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं और अपनी मनोकामनाएं बाबा के चरणों में रखते हैं. लोगों का मानना है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद यहां जरूर पूरी होती है.

मंदिर के नाम को लेकर कई मान्यताएं प्रचलित हैं. माना जाता है कि जो बाबा यहां तपस्या करते थे. उनके साथ दो कुत्ते रहते थे, इसीलिए इस स्थान का नाम कुकरहा बाबा पड़ा है. लोकल 18 से बातचीत के दौरान मंदिर के महंत शिव प्रसाद दास बताते हैं कि जब यहां पर कुकरहा बाबा आए थे तो उनके साथ दो कुत्ते रहते थे. आसाराम और मंसाराम एक ही थाली में भोजन किया करते थे. इसलिए उनका नाम कुकरहा बाबा पड़ा था.

क्या है मान्यताशिव प्रसाद दास बताते हैं कि जब पहले किसी गांव में हैजा पढ़ता था तो उसके बारे में गांव के व्यक्ति आकर बाबा जी से बताते थे और बाबा जी स्वयं नहीं जाते थे, बल्कि अपने कुत्ते मंसाराम को भेजते थे और मंसाराम पूरे गांव का चक्कर लगाते थे और अपना पूछ पटक कर आ जाते थे. कहते हैं कि उससे गांव से हैजा की बीमारी खत्म हो जाती थी. उन्होंने बताया कि इस समय इस स्थान पर जो अपने सच्चे मन से कुछ भी मांगता है, तो उसको कुकरहा बाबा पूरी करते हैं.

कितनी पुरानी है मंदिरशिवप्रसाद दास बताते हैं कि कुकरहा बाबा बस्ती जिला के दुबौली दुबे के रहने वाले थे यह एक ब्राह्मण परिवार के थे. शिवप्रसाद दास बताते हैं कि कुकरहा बाबा की मंदिर और समाधि लगभग 400 से 500 वर्ष पुरानी है और यह घटना भी 400 से 500 वर्ष पुरानी मानी जाती है. घटना के बारे में हमारे पूर्वज हमको बताते थे कि यहां पर ऐसी घटना घटी थी. इसलिए इस स्थान का नाम कुकरहा बाबा पड़ा है. अभी माना जाता है कि कुकरहा बाबा जीते जी समाधि ले लिए थे.

कहां-कहां से आते हैं लोगशिव प्रसाद दास बताते हैं कि इस स्थान पर गोंडा, बस्ती, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, अयोध्या, मुंबई, गुजरात समेत पूरे भारत के लोग दर्शन करने आते हैं. यहां पर जिसकी मन्नतें पूरी होती हैं, वह घंटा चढ़ता है. उसके अलावा यहां पर जिसकी जो मनसा हो, वह प्रसाद के रूम में चढ़ा सकता है. शिव प्रसाद दास बताते हैं कि यहां पर तो प्रत्येक दिन श्रद्धालु आते हैं, लेकिन यहां पर विशेष रूप से मंगलवार को मेला लगता है.About the Authorआर्यन सेठआर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.Location :Gonda,Uttar PradeshFirst Published :December 31, 2025, 16:34 ISThomedharmगांव में फैली हैजा बीमारी, तो बाबा ने अपनी जगह कुत्ता भेज दिया! अनोखी कहानीDisclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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