Last Updated:December 30, 2025, 21:08 ISTMirzapur Dharohar: मिर्जापुर शहर के मध्य में 1891 ई. में घंटाघर का निर्माण हुआ था. इस भवन में बलुआ लाल पत्थरों का प्रयोग किया गया है. 10 हजार रूपये खर्च करके अंग्रेजों ने इस भवन का निर्माण कराया था, जिसका ब्यौरा इसकी दीवारों पर दर्ज है. खास भवन में एक घंटा लगाया गया है, जिसकी आवाज दूर-दूर तक सुनाई देती है. अंग्रेजों ने समय के आंकलन के लिए खास घंटे को लगाया था.The historical clock tower of Mirzapur: बलुआ लाल पत्थरों से बने ऐतिहासिक भवन में लगे हुए घंटे से कभी मिर्जापुर के लोगों को समय के बारे में पता चलता था. इस भवन की खूबसूरती ऐसी है कि देखते ही कायल हो जाएंगे. शहर के मध्य में अंग्रेजों के द्वारा बनवाए गए घंटाघर से ही पूरे शहर को कंट्रोल किया जाता था. हालांकि, बदलते समय के साथी घंटाघर उपेक्षित हो गया, लेकिन खूबसूरती आज भी वैसी की वैसी ही है. आज भी इस घंटे की आवाज शहर के लोगों को सुनाई देती है और इस भवन को मिर्जापुर का दिल कहा जाता है. नगर पालिका द्वारा भवन को संरक्षित करते हुए रंग-बिरंगी लाइट भी लगाई गई है, जो रात में बेहद ही अलौकिक नजर आते हैं.
शहर के मध्य में 1891 ई. में घंटाघर का निर्माण हुआ था. इस भवन में बलुआ लाल पत्थरों का प्रयोग किया गया है. 10 हजार रूपये खर्च करके अंग्रेजों ने इस भवन का निर्माण कराया था, जिसका ब्यौरा इसकी दीवारों पर दर्ज है. खास भवन में एक घंटा लगाया गया है, जिसकी आवाज दूर-दूर तक सुनाई देती है. अंग्रेजों ने समय के आंकलन के लिए खास घंटे को लगाया था. लंदन की मेसर्स स्टैन बैंक ने इसी घड़ी को लगवाया है, जो गुरुत्वाकर्षण से चलता था. इस घंटे का वजन करीब एक हजार किलो है. आज भी यह घड़ी संचालित होती है, जहां इसकी आवाज दूर-दूर तक सुनाई देती है.
एक किलोमीटर तक सुनाई देती है आवाजगणेश मोदनवाल ने बताया कि यह प्राचीन भवन है, जिसमें पत्थरों का प्रयोग हुआ है. इसमें जो कलाकृतियां है, उसका निर्माण दोबारा नहीं हो सकता है. इसकी सुरक्षा व देखभाल होना जरूरी है. मैं 65 साल का हूं और तबसे देख रहा हूँ. घंटाघर का घड़ी लंदन से आया था. इसकी गूंज रात्रि में एक किलोमीटर और दिन में 500 मीटर तक सुनाई देती है. पहले इस घंटे की आवाज से ही हम लोगों की नींद खुलती थी. सरकार को इसपर ध्यान देकर विकसित करना चाहिए. बबलू ने बताया कि इस प्राचीन धरोहर को संभाला जाए. इसकी सहेजने की जरूरत है. पहले घंटाघर को अलार्म कहा जाता था.
ऐतिहासिक है यह धरोहररमेश चंद्र जायसवाल ने बताया कि यह मेरे मिर्जापुर का धरोहर है. इसे काफी पहले बनाया गया था. इसकी खासियत यह है कि ऐसा भवन अब नहीं बन पाएगा. अब देख-रेख के अभाव में वीरान होता चला जा रहा है. इसके देख-रेख की आवश्यकता है. कई जगहों से भवन की दीवारें टूट गई है. प्रशासन को अच्छे से भवन का पुनर्निर्माण करना चाहिए और इसे विकसित करना चाहिए.About the AuthorManish Raiकाशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ेंLocation :Mirzapur,Uttar PradeshFirst Published :December 30, 2025, 21:08 ISThomeuttar-pradeshमिर्जापुर का दिल है घंटाघर, कभी इसकी आवाज से समय जानते थे नगरवासी

