Uttar Pradesh

कदम का पेड़, अरबी की सब्जी, झांसी केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने खोजी तगड़ी तरकीब, गांव-गांव किसानों को सिखा रहे तरीका

Last Updated:December 29, 2025, 00:11 ISTAgro cropping method : एग्रो क्रॉपिंग को किसान तक पहुंचाने के लिए केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक गांव-गांव भ्रमण कर रहे हैं. यहां के कृषि वैज्ञानिकों ने एग्रो क्रॉपिंग के तहत महंगी लकड़ी के साथ-साथ सब्जियां उगाने का तरीका निकाला है. केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय का दावा है कि एग्रो क्रॉपिंग को झांसी के कई किसानों ने अपनाया है. कृषि की इस नई तकनीकी से उनकी दोहरी आमदनी शुरू हो गई है.झांसी. किसानों की आय कई गुना बढ़ाने के लिए केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक दिन रात मेहनत कर नई-नई तकनीकों पर शोध कर रहे हैं. कृषि वैज्ञानिक केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय परिसर में बने फार्म हाउस में कम से कम जगह में दो से अधिक फसलों को एक साथ उगाने में जुटे हैं. केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एग्रो क्रॉपिंग के तहत 5 साल की उम्र तक के ऐसे पेड़ लगाकर किसानों को महंगी लकड़ी के साथ-साथ सब्जियों की सौगात दी है. एग्रो क्रॉपिंग एक ऐसी कृषि तकनीकी है जिसमें एक फसल की छांव में दूसरी फसल भरपूर होती है. एग्रो क्रॉपिंग करने के लिए बहुत अधिक जगह की भी जरूरत नहीं होती है.

झांसी के केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक प्रभात तिवारी का कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार खासतौर से बुंदेलखंड के किसानों की आमदनी को बढ़ाने को लेकर लगातार नई-नई तकनीक पर काम कर हर संभव कोशिश की जा रही है. उत्तर प्रदेश सरकार की इसी कोशिश के तहत झांसी के केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में एग्रो क्रॉपिंग के तहत कदम के पेड़ लगाकर उनकी छाया में हल्दी और अरबी जैसी सब्जियों को भी उगने का काम शुरू कर दिया गया है. कृषि की इस नई तकनीक को किसानों के बीच प्रसार और प्रचार के लिए अलग-अलग गांव में जाकर कृषि वैज्ञानिक किसानों को एग्रो क्रॉपिंग करने के लिए प्रोत्साहित भी कर रहे हैं. केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय का दावा है कि एग्रो क्रॉपिंग झांसी के कई किसानों ने अपनाया है और कृषि की इस नई तकनीकी के बाद दोहरी आमदनी शुरू हो गई.

ये विधि जरूरी

कदम का पेड़ 5 साल तक ही रहता है. 5 साल में कदम का पेड़ इतना बड़ा हो जाता है कि इस पेड़ की छाया में अरबी जैसी फसल भरपूर मात्रा में होती है. कदम के पेड़ों को थोड़ी-थोड़ी दूरी पर लगाया जाता है ताकि पेड़ों की छाया के बीच अरबी की पैदावार में मदद मिलती रहे.About the AuthorPriyanshu GuptaPriyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ेंLocation :Jhansi,Uttar PradeshFirst Published :December 29, 2025, 00:11 ISThomeagricultureकदम का पेड़, अरबी की सब्जी, झांसी कृषि विश्वविद्यालय ने खोजी तगड़ी तरकीब

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