Uttar Pradesh

70 दिन में तैयार… 1 बीघा में 8 क्विंटल तक पैदावार, रामपुर के किसान ने मटर की खेती से रचा मुनाफे का रिकॉर्ड, तगड़ी हो रही कमाई

Last Updated:December 27, 2025, 10:17 ISTRampur News: रामपुर के किसान अब परंपरागत खेती छोड़ कम समय में मुनाफा देने वाली फसलों की ओर बढ़ रहे हैं. अलिम खान ने 2 एकड़ में उदय काशी मटर की खेती की, जो मात्र 65-70 दिनों में तैयार हो जाती है. इस किस्म से उन्हें एक बिघा में लगभग 8 क्विंटल पैदावार और 1.3 लाख रुपए तक का मुनाफा हो रहा है. सही समय पर बुवाई, मिट्टी की तैयारी और देखभाल से मटर की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है.Rampur News: यूपी के रामपुर जिले में किसान अब परंपरागत खेती से हटकर ऐसी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिनसे कम समय में अच्छा मुनाफा कमाया जा सके. जिले के स्थानीय किसान अलिम खान इसका बेहतरीन उदाहरण हैं. उन्होंने इस बार 2 एकड़ भूमि में उदय काशी किस्म की मटर की खेती की है, जो मात्र 65 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है. इस किस्म से उन्हें एक बिघा में लगभग 8 क्विंटल तक पैदावार मिल रही है.

लाखों में होता है मुनाफा
अलिम खान बताते हैं कि इस समय बाजार में हरी मटर की मांग काफी अच्छी बनी हुई है. मंडी में मटर 20 से 25 रुपए प्रति किलो के भाव बिक रही है. लागत निकालने के बाद उन्हें करीब 1 लाख 30 हजार रुपए तक का शुद्ध मुनाफा हो रहा है. किसान का कहना है कि यदि मौसम अनुकूल रहे और सही समय पर देखभाल की जाए, तो मटर की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है.

बुवाई से पहले खेत की जुताई करना होता है जरूरीमटर की खेती का सही समय अक्टूबर के अंत से नवंबर के मध्य तक माना जाता है. ठंड शुरू होते ही बीज की बुवाई कर दी जाती है. बुवाई से पहले खेत की अच्छी जुताई करना जरूरी होता है. मिट्टी भुरभुरी होनी चाहिए, ताकि बीज आसानी से अंकुरित हो सके. एक बार गहरी जुताई और उसके बाद दो हल्की जुताई पर्याप्त होती है. इसके बाद पाटा लगाकर खेत को समतल कर लिया जाता है.

बीज को लाइन में बोना रहता है बेहतरकिसान के अनुसार, उदय काशी किस्म की मटर जल्दी तैयार होने वाली किस्म है. एक बिघा खेत में लगभग 10 से 12 किलो बीज पर्याप्त होता है. बीज को लाइन में बोना बेहतर रहता है, जिससे निराई-गुड़ाई में आसानी होती है. बीज को ज्यादा गहराई में नहीं बोना चाहिए, वरना अंकुरण प्रभावित हो सकता है. बुवाई के समय सड़ी हुई गोबर की खाद डालना फायदेमंद रहता है. इससे मिट्टी में नमी बनी रहती है और पौधे मजबूत होते हैं.

65 से 70 दिनों में तोड़ाई के लिए तैयार हो जाती है मटरअधिक रासायनिक खाद की आवश्यकता नहीं पड़ती. खेत से समय-समय पर खरपतवार निकालना जरूरी है, नहीं तो पौधों की बढ़वार रुक जाती है. मटर की फसल में कभी-कभी माहू या इल्ली का प्रकोप देखने को मिलता है. किसान बताते हैं कि यदि शुरुआत में ही ध्यान दिया जाए, तो नुकसान से बचा जा सकता है. जरूरत पड़ने पर हल्का छिड़काव किया जाता है. मौसम साफ रहने पर बीमारी का खतरा कम रहता है. उदय काशी किस्म की मटर 65 से 70 दिनों में तोड़ाई के लिए तैयार हो जाती है.About the AuthorRahul Goelराहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ेंLocation :Rampur,Uttar PradeshFirst Published :December 27, 2025, 10:17 ISThomeagriculture70 दिन में तैयार… 1 बीघा में 8 क्विंटल तक पैदावार, रामपुर के किसान ने मटर की

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