Uttar Pradesh

बांके बिहारी मंदिर की लाइव स्ट्रीमिंग पर गहराया विवाद, आपत्तियों और आरोपों की बौछार, जानें क्यों इतना हंगामा

मथुरा. ठाकुर श्री बांके बिहारी जी मंदिर की लाइव दर्शन/लाइव स्ट्रीमिंग परियोजना को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है. लोक कल्याण मीडिया प्राइवेट लिमिटेड ने परियोजना को सुयोग्य मीडिया को दिए जाने के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराई है. सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत विस्तृत आवेदन भी दाखिल किया गया है. लोक कल्याण मीडिया की ओर से जिलाधिकारी मथुरा (सदस्य सचिव) के माध्यम से ठाकुर बांके बिहारी जी मंदिर की उच्चस्तरीय प्रबंधन समिति को सौंपी गई आपत्ति में आरोप लगाया गया है कि समिति माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश दिनांक 08 अगस्त 2025 के अधीन कार्य कर रही है. इसके बावजूद लाइव स्ट्रीमिंग परियोजना के आवंटन में पारदर्शिता, निष्पक्षता और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया.

क्या है पूरा विवाद

कंपनी का कहना है कि 02 अक्टूबर 2025 को जारी सार्वजनिक विज्ञापन के तहत उसने 09 अक्टूबर को तकनीकी रूप से पूर्ण प्रस्ताव जमा किया था, जिसमें एचडी कैमरा नेटवर्क, क्लाउड आधारित लाइव स्ट्रीमिंग, एलईडी डिस्प्ले, भीड प्रबंधन प्रणाली और फेल सेफ नेटवर्किंग जैसी व्यवस्थाएं शामिल थीं. इसके बावजूद 20 नवंबर 2025 की बैठक के बाद बिना किसी तकनीकी मूल्यांकन, तुलनात्मक स्कोरिंग और समिति के औपचारिक प्रस्ताव के मीडिया में ये घोषणा कर दी गई कि परियोजना सुयोग्य मीडिया को दे दी गई है. लोक कल्याण मीडिया ने आरोप लगाया कि 29 अक्टूबर 2025 की पहली बैठक में सुयोग्य मीडिया शामिल ही नहीं था और दूसरी बैठक में उनकी प्रस्तुति के दौरान लोक कल्याण मीडिया के प्रतिनिधियों को बैठक कक्ष से बाहर निकाल दिया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है. कंपनी ने यह भी कहा कि विज्ञापन में सीएसआर आधारित मॉडल का कोई उल्लेख नहीं था, इसके बावजूद मौखिक सीएसआर आश्वासन के आधार पर चयन किया गया.

RTI से सामने आएगा सच?

लोक कल्याण मीडिया की ओर से अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी की ओर से जिलाधिकारी कार्यालय में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत विस्तृत आवेदन दायर किया गया है. आरटीआई में 29 अक्टूबर और 20 नवंबर 2025 की बैठकों की पूर्ण कार्यवृत्त, उपस्थिति रजिस्टर, एजेंडा डॉकेट, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग, सीसीटीवी फुटेज, सभी आवेदकों की प्रस्तुतियां, तकनीकी मूल्यांकन, तुलनात्मक स्कोर शीट, फाइल नोटिंग, समिति के किसी भी प्रस्ताव या निर्णय, सीएसआर प्रस्ताव, ईमेल और दूसरे पत्राचार की प्रतियां मांगी गई हैं. ये भी पूछा गया है कि समिति के अध्यक्ष को एकतरफा रूप से किसी एजेंसी का चयन कर मीडिया में घोषणा करने का अधिकार किस नियम, शासनादेश या न्यायालयी आदेश से मिला है.

केवल व्यावसायिक हितों की रक्षा नहीं येलोक कल्याण मीडिया का कहना है कि यह पूरा मामला एक सार्वजनिक धार्मिक संस्था से जुड़ा है और सुप्रीम कोर्ट के प्रत्यक्ष पर्यवेक्षण में चल रही व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अपारदर्शिता जनहित के विरुद्ध है. कंपनी ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते अवैध घोषणा को निरस्त कर पारदर्शी पुनर्मूल्यांकन नहीं कराया गया तो वह माननीय उच्चतम न्यायालय में अवमानना और दूसरी विधिक कार्यवाही के लिए बाध्य होगी. कंपनी का दावा है कि उसकी यह आपत्ति और आरटीआई केवल व्यावसायिक हितों की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि ठाकुर श्री बांके बिहारी जी के लाइव दर्शन जैसी पवित्र सेवा को निष्पक्ष, पारदर्शी और नियमों के अनुरूप संचालित कराने के उद्देश्य से दाखिल की गई है.

20 मिनट में हरी झंडीलोक कल्याण मीडिया के निदेशक अनिल गुप्ता ने कहा कि ठाकुर बांके बिहारी मंदिर प्रबंध समिति स्वयं कुप्रबंधन, पक्षपातपूर्ण कार्यशैली और निहित स्वार्थों से ग्रस्त हो चुकी है. समिति ने मंदिर के दर्शन की लाइव स्ट्रीमिंग जैसी संवेदनशील परियोजना को गलत तरीके से एक ऐसी कंपनी को दे दिया, जो पहली बार प्रस्तुति देने आई और केवल एक फिल्म दिखाकर चली गई. उस कंपनी ने मौखिक रूप से कहा कि वो सीएसआर फंड से यह काम करेगी, जबकि सीएसआर फंड से जुड़े कानूनी प्रावधान स्पष्ट हैं और उसके लिए लिखित प्रमाण, आकलन और परीक्षण अनिवार्य होता है. जांच तो दूर, मात्र 15–20 मिनट में परियोजना को हरी झंडी दे दी गई.

आश्वासनों के आधार पर चयन

लोकल 18 से बात करते हुए अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी बताया कि उच्चाधिकार प्राप्त समिति सीधे उच्चतम न्यायालय के आदेशों के अधीन कार्य करती है और संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 25 व सार्वजनिक न्यास सिद्धांत से बंधी हुई है. कथित आवंटन के लिए न कोई समिति प्रस्ताव है, न मतदान, न तकनीकी मूल्यांकन और न ही कोई वित्तीय परीक्षण. मौखिक CSR आश्वासनों के आधार पर किया गया चयन विधि में अज्ञात है.

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