Uttar Pradesh

क्‍यों अटका नोएडा-नोएडा ए‍क्‍सप्रेसवे प्रोजेक्‍ट? किसने अटकाया NOC वाला रोड़ा, अब बची है यह आखिरी उम्‍मीद

Noida – Greater Noida Expressway: नोएडा और ग्रेटर नोएडा को जोड़ने वाले मौजूदा नोएडा एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक का दबाव दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है. लाखों गाड़ियां रोजाना इस रोड का इस्तेमाल करती हैं. इस समस्या को दूर करने के लिए नोएडा अथॉरिटी ने यमुना नदी के किनारे एक दूसरा समानांतर एक्सप्रेसवे बनाने की योजना बनाई थी. यह नया 30 किमी लंबा कॉरिडोर ओखला बैराज के पास कालिंदी कुंज से शुरू होकर परी चौक के पास यमुना एक्सप्रेसवे तक जाना था. लेकिन अब इस प्रोजेक्‍ट को बड़ा झटका लगा है.

सिंचाई विभाग ने यमुना के बांध (एम्बैंकमेंट) के साथ निर्माण के लिए एनओसी देने से इनकार कर दिया है. विभाग का कहना है कि बांध के पास निर्माण से बाढ़ नियंत्रण की व्यवस्था और नदी के जल निकासी चैनल खराब हो सकते हैं. इससे नदी के किनारे एलिवेटेड (ऊंचा) एक्सप्रेसवे बनाने का प्लान भी रुक गया है. पहले ग्राउंड लेवल पर रोड बनाने की योजना थी, लेकिन यमुना के फ्लडप्लेन में अवैध निर्माण और फार्महाउस होने की वजह से एलिवेटेड रोड का प्रस्ताव लाया गया था.

इस साल की शुरुआत में नोएडा अथॉरिटी के बोर्ड ने इस प्रोजेक्ट को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी. राज्य सरकार ने यूपीडा को इसे बनाने की जिम्मेदारी सौंपी थी. लागत नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना अथॉरिटी मिलकर उठाने वाली थीं. जुलाई में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी एनएचएआई से विचार करने को कहा था. लेकिन अब सिंचाई विभाग की मेरठ डिवीजन ने फिर से एनओसी नहीं दी. दूसरी समस्या यह है कि पुश्ता रोड को नेशनल हाईवे घोषित करके एनएचएआई से बनवाने का प्लान भी अटका हुआ है.

नोएडा अथॉरिटी ने बदला अपना फोकसअब नोएडा अथॉरिटी ने अपना फोकस बदल लिया है. फिलहाल अंतरिम व्यवस्था के तौर पर मौजूदा नोएडा एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ चलने वाली 45 मीटर चौड़ी सेक्टर रोड को पूरी तरह चालू करने पर जोर दिया जा रहा है. ये सेक्टर रोड एक्सप्रेसवे के साथ-साथ चलती हैं और लोकल ट्रैफिक के लिए कनेक्टर का काम करती हैं. अगर इन्हें पूरी तरह जोड़ दिया जाए तो ये एक्सप्रेसवे का कुछ बोझ कम कर सकती हैं.

मौजूदा छह लेन का नोएडा एक्सप्रेसवे 25 किलोमीटर लंबा है. इसके बीच में मुख्य रोड है, दोनों तरफ संकरी सर्विस लेन हैं और बाहर की तरफ ये 45 मीटर वाली सेक्टर रोड हैं. अथॉरिटी इन बाहरी रोड को रिलीफ कॉरिडोर बनाना चाहती है. अधिकारी कहते हैं कि इससे एक्सप्रेसवे पर चलने वाली लाखों गाड़ियों का कुछ हिस्सा यहां शिफ्ट हो सकता है.

जमीन अधिग्रहण की वजह से अटकी हैं ये रोडलेकिन इन सेक्टर रोड में भी समस्या है. ग्रेटर नोएडा और नोएडा के बीच तीन जगहों पर रोड टूटी हुई है. ये गैप 74 मीटर, 75 मीटर और 81.5 मीटर के हैं, जो सेक्टर 163 और 167 के बीच हैं. वजह है कि वहां की जमीन अधिग्रहण अभी बाकी है. किसान जमीन देने में विरोध कर रहे हैं. डीजीएम (सिविल) विजय रावल ने बताया कि बातचीत चल रही है. जल्द ही जमीन ले ली जाएगी ताकि ये रोड लगातार चल सके. भारी जाम, ब्रेकडाउन या निर्माण के समय ये वैकल्पिक रास्ता बन सकती है. इससे कई सेक्टरों के रहने वाले प्रभावित हैं.

सेक्टर 150, 151, 152, 153, 155, 163, 167, 135 और 168 के लोग पूरी यात्रा के लिए सेक्टर रोड नहीं इस्तेमाल कर पाते. उन्हें एक्सप्रेसवे पर आना पड़ता है, जिससे जाम और बढ़ता है. पहले 2014 में खुली 11 किलोमीटर की यमुना एम्बैंकमेंट रोड भी खराब हो गई है और उसे फिर से बनाने की जरूरत है. अधिकारी के अनुसार, समानांतर एक्सप्रेसवे का प्लान अभी खत्म नहीं हुआ है. फिर से मंजूरी लेने की कोशिश जारी रहेगी. लेकिन फिलहाल सेक्टर रोड को मजबूत करना जरूरी है क्योंकि ट्रैफिक का दबाव बढ़ता जा रहा है. आने वाले समय में जेवर एयरपोर्ट खुलने से और ज्यादा गाड़ियां आएंगी.

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