Uttar Pradesh

13 साल की उम्र में शादी, 96 वर्ष में भी गाना जारी… सुल्तानपुर के राम फेर की जिंदगी का अद्भुत सफर, पढ़िए कहानी

राम फेर यादव आज 96 साल के हैं, लेकिन उनके भीतर संगीत का जुनून आज भी वैसा ही कायम है. स्थानीय और पारंपरिक गीतों के शौकीन राम फेर जब भी रिश्तेदारों के यहां जाते, लोग उन्हें दो-दो तीन-तीन दिन तक रोक लेते थे ताकि वह गांव वालों को अपने सुरीले गीत सुनाते रहें. उनके गीतों का ऐसा जादू था कि हर कोई उनकी आवाज़ का दीवाना बन जाता था. आइए जानते है इनकी कहानी इन्ही की जुबानी…

सुल्तानपुर. “जब मेरा विवाह हुआ, तब मेरी उम्र मात्र 13 वर्ष की थी. उस समय मैं गाना भी खूब गाता था, लेकिन भूल जाता था. मेरी बारात पूरे 2 दिन तक मेरी ससुराल में रुकी थी. मेरी पत्नी सावित्री अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी मोहब्बत ने हमें कभी किसी चीज़ की कमी नहीं होने दी. मैं दूल्हा बैल की लड़ीया से बनकर गया था.”

दरअसल, यह कहानी सुल्तानपुर के 96 वर्षीय बुजुर्ग बता रहे हैं, जिन्होंने अपने विवाह के किस्से न्यूज़ 18 के साथ साझा किए. आइए सुनते हैं उनके जीवन का यह मजेदार और दिल छू लेने वाला किस्सा।

इतने साल में हो गई थी शादी

सुल्तानपुर के कुंदा भैंरोपुर गांव के रहने वाले राम फेर यादव लोकल 18 को बताते हैं कि उनकी शादी बचपन में ही हो गई थी, जब उनकी उम्र मात्र 13 साल की थी. एक साल बाद उनका गौना हुआ. राम फेर यादव ने अपनी शादी का किस्सा साझा करते हुए कहा कि उनकी शादी में 25 लोग बारात गए थे और बारात पूरे 2 दिनों तक रुकी हुई थी, जहां लोगों ने खूब आनंद लिया. उनकी बारात बैल और लढ़िया के साथ गई थी।

गाना गाने के हैं शौकीन

राम फेर यादव भले ही आज 96 वर्ष की आयु के हैं, लेकिन उनका गीत-संगीत के प्रति शौक आज भी पहले जैसा है. वह स्थानीय और पारंपरिक गीत गुनगुनाते और गाते रहते हैं. उनका कहना है कि जब वह अपने रिश्तेदारों के यहां जाते थे, तो लोग उनके गीत सुनने के लिए उन्हें दो-दो, तीन-तीन दिन तक रोक लेते थे और वहां वे गांव वालों को गीत सुनाया करते थे।

यह है पारिवारिक स्थिति

अगर राम फेर यादव की पारिवारिक स्थिति की बात करें तो उनकी दो बेटियां और दो बेटे हैं. सभी बच्चों की शादी हो चुकी है और अब वह फुर्सत के दिन बिता रहे हैं. वह बताते हैं कि उनकी पत्नी सावित्री उनसे बहुत प्रेम करती थीं, लेकिन 4 वर्ष पहले उनका देहांत हो गया, जिसके बाद राम फेर अकेले पड़ गए. अब उनके जीवन का एक ही उद्देश्य है कि बचे हुए दिन हंसी-खुशी और घूम-फिरकर बीत जाएं।

राम फेर का परिवार काफी संपन्न है। उनके मुताबिक गाँव में उनका पक्का मकान है और उनके बच्चे उनसे बहुत प्यार करते हैं।

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