Uttar Pradesh

अंधेरा कमरा हो या कच्चा मकान! लगा दें मशरूम की ये 3 किस्में, बन जाएंगे ‘धन्ना सेठ’

मुरादाबाद में मशरूम की खेती एक कम लागत और अधिक मुनाफा देने वाला व्यवसाय बनकर उभर रहा है. कम जगह, कम निवेश और बंद कमरे में होने वाली इस खेती से किसान बहुत कम समय में अच्छी आमदनी कमा सकते हैं. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बटन मशरूम की मांग काफी अधिक है, इसलिए इसकी खेती किसानों और ग्रामीण महिलाओं दोनों के लिए लाभदायक मानी जाती है. सही तकनीक के साथ किसान सालभर ऑयस्टर, मिल्की और बटन मशरूम की खेती करके अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं.

मशरूम की खेती की खासियत यह है कि इसे चारदीवारी के अंदर, रोशनी से दूर और बंद कमरों में भी आसानी से किया जा सकता है. किसान चाहे तो कच्चे मकान, पुरानी इमारत, कमरे या छप्पर वाले शेड में भी इसका उत्पादन शुरू कर सकते हैं. बाजार में कई किस्में उपलब्ध हैं, लेकिन खाने योग्य और सबसे ज्यादा मांग वाली किस्मों में बटन, मिल्की और ऑयस्टर मशरूम शामिल हैं. इन किस्मों की खेती अलग-अलग मौसमों में की जाती है. जहां बटन मशरूम ठंड के मौसम में उगती है, वहीं ऑयस्टर और मिल्की मशरूम गर्मी व बरसात में भी अच्छी पैदावार देती हैं.

इन मशरूम की बाजार में कीमत 100 से 200 रुपये किलो तक मिल जाती है, जबकि सुखी मशरूम इससे कई गुना अधिक दाम पर बिकती है. उत्पादन में लगने वाली लागत बेहद कम होती है, क्योंकि इसके लिए सिर्फ भूसा, स्पॉन, पुआल और तापमान नियंत्रित कमरे की आवश्यकता रहती है. कम खर्च और तेज़ पैदावार के कारण किसानों को इसमें दोगुना तक मुनाफा आसानी से मिल जाता है. इसी वजह से आज मशरूम की खेती ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से लोकप्रिय हो रही है और किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ यह एक स्थायी आय का बेहतर साधन प्रदान कर रही है.

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